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अब पराली जलाने वालों की एआई और मोबाइल सेंसिंग से होगी निगरानी, खेत तक पहुंचेगी टीम

By Nafees Edited By: Ashish Mishra
Published: Fri, 16 Oct 2026 03:11 PM (IST)

अयोध्या में प्रशासन अब पराली जलाने वालों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट डेटा से निगरानी रखेगा। किसानों को पराली के ...और पढ़ें

यह फोटो एआई टूल की मदद से बनाई गई है।

यह फोटो एआई टूल की मदद से बनाई गई है।

HighLights

  1. AI, सैटेलाइट से पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी।

  2. किसानों को पराली के नुकसान और प्रबंधन हेतु जागरूक किया जाएगा।

  3. मोबाइल वैन, बैनर और गोष्ठियों से चलेगा जागरूकता अभियान।

नफीस खां, रुदौली (अयोध्या)। खेतों में पराली जलाकर बच निकलना अब आसान नहीं होगा। धान की कटाई के दौरान फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने निगरानी और जागरूकता अभियान तेज करने की तैयारी की है।

पराली जलने की घटनाओं का पता लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सैटेलाइट डेटा और मोबाइल सेंसिंग जैसी तकनीकों की मदद ली जाएगी, ताकि पर्यावरण प्रदूषण रोकने के साथ फसल अवशेष का उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सके। सैटेलाइट डेटा और मोबाइल सेंसिंग के माध्यम से आग लगने की घटनाओं का पता लगाया जा सकेगा।

अभियान के माध्यम से पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के तरीके भी बताए जाएंगे।

उप निदेशक कृषि कार्यालय के सीनियर टेक्निकल असिस्टेंट प्रवीण बरनवाल ने बताया कि किसानों को जागरूक करने के लिए छह मोबाइल वैन के माध्यम से अभियान चलाया जाएगा। विभिन्न स्थानों पर बैनर लगाकर पराली जलाने के नुकसान और उसके उचित प्रबंधन के विकल्पों की जानकारी दी जाएगी।

तहसीलदार विजय कुमार गुप्ता ने बताया कि धान की कटाई के दौरान खेतों में बचने वाले फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। पराली जलाने से जहां वायु प्रदूषण बढ़ता है, वहीं मिट्टी के उपयोगी सूक्ष्मजीवों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में गोष्ठियों के माध्यम से किसानों को पराली निस्तारण के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी देना भी जरूरी है।

वहीं सहायक विकास अधिकारी कृषि चंद्रसेन ने बताया कि पिछले वर्ष पराली जलाने की 33 घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं को देखते हुए इस बार निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के साथ जागरूकता अभियान पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य किसानों को फसल अवशेष जलाने से रोकना और उन्हें उपलब्ध विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

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