अगले 10 सालों तक रामनवमी पर रामलला का सूर्य तिलक होगा, CBRI रुड़की ने कर दिया इंतजाम
अयोध्या के राम मंदिर में रामनवमी पर रामलला का सूर्य तिलक अब हर साल होगा। ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता, अयोध्या। राम मंदिर में इस वर्ष की रामनवमी को भी आस्था, विज्ञान व तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। तकनीक के माध्यम से राम मंदिर के मुख्य शिखर से भूतल पर विराजमान रामलला के मस्तक पर सूर्य की किरणें चार-पांच मिनट तक अभिषेक करेंगी।
रामलला का यह सूर्य तिलक प्राण प्रतिष्ठा के बाद मनाई गई प्रथम व द्वितीय रामनवमी को भी कराया गया था।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसे अब प्रत्येक रामनवमी पर निर्बाध ढंग से संपन्न कराने के लिए केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआइ) के साथ दस वर्ष का अनुबंध करने की योजना बनाई है। यह अनुबंध शीघ्र ही ट्रस्टी नृपेंद्र मिश्र के नेतृत्व में दिल्ली में होने जा रहा है।
2024 में हुआ था सूर्यतिलक
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 22 जनवरी 2024 को भव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद आयोजित हुई प्रथम रामनवमी के अवसर पर रामलला का सूर्यतिलक कराया था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस अभिलाषा को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के निर्देश पर सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआइ) रुड़की, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आइआइए) बेंगलुरु व भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के विज्ञानियों व विशेषज्ञों की टीम ने पूरा किया था।
विज्ञानियों ने सघन परीक्षण कर एक तकनीक विकसित की थी, जिसके माध्यम से राम मंदिर के द्वितीय तल के ऊपर स्थित मुख्य शिखर से पीतल के पाइप व लेंस के सहारे प्रकाश की किरणें भूतल पर विराजित रामलला के मस्तक तक लाई गईं थीं।
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रामनवमी का ये है कार्यक्रम
इसी आयोजन को सूर्य तिलक कहा गया। रामनवमी के दिन मध्याह्न 12 बजे से चार से पांच मिनट तक सूर्य की किरणों ने रामलला के ललाट पर तिलक लगाया था। इस तकनीक को बेंगलुरु की आप्टिका नामक संस्था ने विकसित किया था।
किरणों को रिफ्लेक्टर व लेंस के माध्यम से सीधे गर्भगृह में 75 मिलीमीटर गोलाकार रूप में पहुंचाया गया था। आप्टिका ने पूरी तकनीक को विशेष आप्टो मैकेनिकल सिस्टम (दर्पण व लेंस) के आधार पर विकसित किया था।
इस वर्ष 26 मार्च को पड़ रही रामनवमी के दिन भी इस आयोजन की पुनरावृत्ति होगी। इसके परीक्षण के लिए सीबीआरआइ की टीम के होली के बाद अयोध्या आने की संभावना है।
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डा. अनिल कुमार मिश्र ने बताया कि सीबीआरआइ रुड़की से दस वर्ष का अनुबंध करने की योजना बनी है। यह अनुबंध दिल्ली में मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष व ट्रस्टी नृपेंद्र मिश्र के नेतृत्व में होगा। उन्होंने बताया कि अभी सीबीआरआइ की टीम के परीक्षण के लिए आने की कोई सूचना नहीं प्राप्त हुई है।