विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

राम मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता की बड़ी पहल, रोज दर्ज होगा चढ़ावे और श्रद्धालुओं का ब्योरा

Published: Mon, 07 Sep 2026 01:13 AM (IST)Updated: Mon, 07 Sep 2026 04:13 AM (IST)

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट राम मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लाने के लिए चढ़ावे और श्रद्धालुओं की संख्या का ब्योरा ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. राम मंदिर में चढ़ावे, श्रद्धालुओं का ब्योरा रोज होगा सार्वजनिक।

  2. ट्रस्ट वेबसाइट पर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बदलाव जारी।

  3. नए महासचिव ने हटाए गए तीन कर्मियों को वापस बुलाया।

जागरण संवाददाता, अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट राम मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। अब गुप्त दान के अलावा मंदिर में अर्पित होने वाला चढ़ावे का पूरा ब्योरा व मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिदिन वेबसाइट में अपडेट होगी। इसमें बड़े दानदाताओं का नाम भी सार्वजनिक किए जाने की तैयारी है, बस गुप्त दान करने वालों का नाम सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

इसके लिए ट्रस्ट की वेबसाइट में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है और इसमें तीन माह तक लगने की संभावना है। चढ़ावा चोरी की घटना के बाद शुरू हुए व्यवस्था में सुधार के प्रयासों में इसे एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देख जा रहा है। चढ़ावे की निगरानी, डिजिटल रिकार्ड, गणना और बैंकिंग प्रक्रिया में बेहतर समन्वय को लेकर मंथन चल रहा है।

ट्रस्ट सूत्रों के अनुसार दो बैंकों के अतिरिक्त आइआइटी से इसके लिए बेहतर सुझाव आए हैं। इस पर विचार-विमर्श के बाद व्यवस्था तय कर दी जाएगी। ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव गिरि ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं को मंदिर की व्यवस्थाओं में कई बदलाव दिखाई देंगे। सबसे अहम पहल के तहत राम मंदिर में रोज आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और प्राप्त दानराशि का ब्योरा वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा।

बैंक को भेजा रिजोल्यूशन
ट्रस्ट के नए महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि और कोषाध्यक्ष महेश भागचंदका के हस्ताक्षर वाला रिजोल्यूशन बैंक को भेज दिया गया है। खाते में बदलाव का आधिकारिक निर्णय पत्र देने के बाद अब ट्रस्ट के वित्तीय कामकाज को गति मिलने की उम्मीद है। इसमें एक सप्ताह का समय लगेगा।

कार्यकारी अधिकारी पद का कार्यकाल प्रत्येक तीन वर्ष पर बढ़ाएगा ट्रस्ट
करीब दो महीने तक मंथन के उपरांत राम मंदिर में प्रथम मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति हो गई जिनका कार्यकाल सितंबर 2029 तक होगा। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इसके बाद सीईओ पद का नवीनीकरण करेगा। कार्यकाल बढ़ाने के लिए ट्रस्ट को बैठक में ट्रस्टियों की सहमति लेकर औपचारिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

यदि सीईओ पद पर पुनः किसी व्यक्ति का चयन करना पड़ा तो ट्रस्ट चयन समिति की ओर से सुझाए गए नामों पर विचार करके आगे बढ़ेगा। इस स्थिति में अंतिम साक्षात्कार के लिए आमंत्रित या पैनल में शामिल रहे लोगों से संपर्क किया जाएगा। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर में चढ़ावा चोरी उजागर होने के उपरांत प्रबंधन से जुड़ी समस्त व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने और सतत निगरानी के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की है।

अब ये ट्रस्ट के नियमानुसार अगले तीन वर्ष तक रामभक्तों की सेवा में निर्बाध संलग्न रहेंगे। चयन समिति के सदस्य परमाणु विज्ञानी सुरेश हावरे ने कहा कि सीईओ के नवीनीकरण का क्षेत्राधिकार ट्रस्ट का है। वह कोई भी निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है।

नवनियुक्त महासचिव स्वामी गोविंददेव गिरि ने पलटा अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन का आदेश
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन के पश्चात ट्रस्ट पदाधिकारियों के मध्य अंतर्विरोध भी सामने आने लगा है। कुछ दिनों पूर्व शिकायतों के आधार पर जिन तीन कर्मियों को अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने राम मंदिर से बाहर किया था, दायित्व में परिवर्तन होते ही नवनियुक्त महासचिव स्वामी गोविंददेव गिरि ने उन्हें वापस कर लिया है। उनकी ओर से शनिवार को इसका आदेश भी जारी कर दिया गया। जल्द ही तीनों कर्मी फिर सेवारत दिखेंगे।

इनमें मंदिर आंदोलन के कारसेवक रहे वासुदेव गुप्ता के पुत्र संदीप गुप्ता भी शामिल बताए गए हैं, जिन्हें पूर्व महासचिव चंपतराय ने नियुक्त किया था। पखवारे भर पूर्व रामजन्मभूमि परिसर में कार्यरत एक महिला पुलिस क्षेत्राधिकारी की लिखित शिकायत पर ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने मंदिर के गर्भगृह में सेवा दे रहे बजरंग पाठक व कृष्ण दत्त तिवारी को निष्कासित कर दिया था। इन पर अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन न करने और महिला सीओ के आगंतुक अतिथि से दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा था।

अंतरिम महासचिव ने दोनों कर्मियों से उनका पक्ष भी जाना था लेकिन इसे संतोषजनक न मानते हुए उन्होंने दोनों को मंदिर से हटाकर तीन किमी दूर बाग बिजेसी स्थित तीर्थ क्षेत्र पुरम में भेज दिया था। बताते हैं कि एक-दो दिन बाद इनकी सेवा ही समाप्त कर दी गई थी। इस घटनाक्रम के एक-दो दिन बाद ही एक विदेशी श्रद्धालु की शिकायत पर अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने कारसेवक रहे वासुदेव गुप्ता के पुत्र संदीप गुप्ता को भी ट्रस्ट की लाकर सेवा से हटा दिया था।

आरोप है कि उनका पक्ष भी नहीं लिया गया था। उनकी इस कार्रवाई से ट्रस्ट कर्मियों में रोष के साथ ही भय भी व्याप्त हो गया था। एकमात्र कारसेवक के पुत्र को ट्रस्ट में नौकरी मिलने के बाद भी उन्हें निकाले जाने को लेकर तमाम सवाल उठे थे। इस बीच ट्रस्ट की दो सितंबर को हुई बैठक में दायित्व परिवर्तन हुआ। कोषाध्यक्ष रहे स्वामी गोविंददेव गिरि नए महासचिव बने और कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव से पदमुक्त किया गया तो अब अंतर्विरोध के स्वर उभरते दिख रहे हैं।

तीनों ट्रस्ट कर्मियों की वापसी को इसी का परिणाम बताया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि महासचिव स्वामी गोविंददेव गिरि को जब इस कार्रवाई की जानकारी हुई और दोनों कर्मियों की तरफ से स्वयं को निर्दोष बताया गया तो उन्होंने न केवल इन्हें, बल्कि लाकर में कार्यरत रहे संदीप गुप्ता की भी शनिवार को वापसी करा दी। ट्रस्ट सूत्रों का कहना है कि तीनों कर्मचारी फिर मंदिर लौटा लिए गए हैं। अभी इनके नवीन दायित्व की जानकारी नहीं हुई है। हालांकि ट्रस्ट कर्मी बजरंग पाठक ने कहा कि उन्हें कभी निकाला ही नहीं गया था। वह तो पहले से ही कार्यरत हैं।

यह भी पढ़ें- राम मंदिर ट्रस्ट से निकाले गए तीन कर्मियों की हुई वापसी, स्वामी गोविंद देव गिरि ने पलटा अंतरिम महासचिव का आदेश