Ram Mandir: पहली बार ढाई हजार, फिर ढाई लाख...1 साल 4 महीने तक होती रही राम मंदिर में चढ़ावा चोरी
अयोध्या के राम मंदिर में मार्च 2025 से शुरू हुई चढ़ावा चोरी का सिलसिला इस वर्ष चार जून तक चला, ...और पढ़ें

राम मंदिर चढ़ावा चोरी।
HighLights
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी डेढ़ साल से जारी थी।
लगभग 2.54 करोड़ रुपये की राशि चुराई गई।
आठ आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हुआ।
रविप्रकाश श्रीवास्तव, अयोध्या। राममंदिर में चढ़ावा चोरी हफ्ते-दस दिन की बात नहीं है, बल्कि यह सिलसिला लगभग डेढ़ साल से चल रहा था। आरोपित अनुकल्प के दिमाग की इस खुराफात में उसका रिश्तेदार लवकुश भी शामिल हुआ, फिर अविनाश, मनीष, टिन्नू, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र भी इस कृत्य से जुड़ गए।
मार्च 2025 से राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की शुरुआत हुई, जिसका मास्टरमाइंड अनुकल्प ही था। आरोपितों से पूछताछ में पता चला कि मार्च 2025 से शुरू हुई चढ़ावा चोरी इस वर्ष चार जून तक चलती रही।
नोटों के बंडल अविनाश पार करता था। अन्य आरोपित भी उसका सहयोग करते थे। अधिकांश लोगों की भूमिका नोटों का बंडल पार करने वालों को सीसीटीवी कैमरे की नजर से बचाने की होती थी।
पहली बार दो से ढाई हजार हुई थी चोरी
मार्च में पहली बार चोरी दो से ढाई हजार रुपये की हुई थी। फिर दुस्साहस बढ़ता गया और चार जून को दो लाख 25 हजार रुपये पार किए गए। कुल चढ़ावा चोरी दो करोड़ 54 लाख रुपये के आसपास है। हालांकि पुलिस इस मामले में अभी-भी कहने से बच रही है।

यह प्रकरण गत सात जून को प्रकाश में आया। इसमें प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया, जिसके बाद 25 जून को रामजन्मभूमि थाने में आठ नामजद आरोपितों पर प्राथमिकी दर्ज हुई। नामजद आरोपितों में रामशंकर यादव टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव हैं। ये सभी जेल में हैं।
कुंभ मेले के दौरान सबसे ज्यादा हुई चढ़ावा चोरी
अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल की जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है। इस मामले में बुधवार को पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया है। चढ़ावा चोरी कुंभ मेले के दौरान सबसे अधिक हुई। चोरी की धनराशि का बंटवारा कभी जनौरा के निकट बाग में, तो कभी टेढ़ीबाजार, सआदतगंज सहित अलग-अलग स्थानों पर होता था।
इस पूरी जांच में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी के ऑडिटरों की रही, जिन्होंने आरोपितों व उनके रिश्तेदारों के बैंक खाते, चढ़ावे के ब्योरे, सीसीटीवी फुटेज आदि का अध्ययन करके दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया।
