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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद SOP का हो रहा सख्ती से पालन, गणनाकर्मी पहन रहे बिना जेब वाले नारंगी कपड़े

Published: Thu, 23 Jul 2026 05:30 AM (IST)

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी उजागर होने के बाद अब एसओपी का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। ...और पढ़ें

राम मंदिर

राम मंदिर

HighLights

  1. चोरी उजागर होने के बाद एसओपी का कड़ाई से पालन शुरू।

  2. दानराशि गणना से पहले-बाद में कर्मचारियों की विधिवत जांच।

  3. गणना कर्मियों के लिए नारंगी ड्रेस कोड, मोबाइल प्रतिबंधित।

लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी उजागर हुई और एसआईटी व पुलिस जांच में खामियां गिनाई गईं, ताे अब पहले से तय रहे एमओयू (समझौता ज्ञापन) का पालन कराया जाने लगा है। न केवल श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, बल्कि भारतीय स्टेट बैंक के स्तर से भी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का अक्षरक्ष: अनुपालन हो रहा है।

दानराशि की गणना से पहले और निकलते समय कर्मचारियों की विधिवत जांच हो रही है। संयुक्त उपस्थिति में दान पेटिकाएं खोली जा रही हैं। सीसी कैमरों से निगरानी बढ़ा दी गई है। ड्रेस कोड निर्धारित कर गणनाकर्मियों को नारंगी रंग का कपड़ा पहनाया जाने लगा है और बैंक में धनराशि जमा कराने से पहले व बाद में क्रॉस चेकिंग भी हो रही है।

मंदिर में दर्शनार्थियों की ओर से अर्पित दानराशि की गणना का दायित्व ट्रस्ट ने भारतीय स्टेट बैंक को सौंपा है। गणना के पर्यवेक्षण के लिए दोनों स्तरों पर कार्मिकों की तैनाती थी। वित्तीय पारदर्शिता के लिए ट्रस्ट व बैंक के बीच एसओपी तय की गई थी।

छह फरवरी 2025 को तय हुई एसओपी पर ट्रस्टी रहे डॉ. अनिल मिश्र व बैंक प्रबंधक गोविंद मिश्र के हस्ताक्षर रहे, लेकिन किसी भी मानक का पालन नहीं कराया गया। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी भी नाममात्र रही। कैमरे लगे रहे, लेकिन इनकी सतत निगरानी नहीं होती थी।

यात्री सुविधा केंद्र में स्थित गणना कक्ष में जाते समय या निकलते समय कर्मियों की जांच नहीं होती थी। रामशंकर यादव टिन्नू जैसे अनधिकृत कर्मियों का बेरोकटोक प्रवेश होता था। गणना प्रभारी रहे सुभाष श्रीवास्तव ने अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया। गणना के समय कर्मी भोजन व अन्य खाद्य पदार्थ मंगवाकर पार्टी करते थे।

गिनती के बाद बैंक में धनराशि जमा कराते समय मिलान नहीं होता था। पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्र भी गणना कक्ष से सटे ट्रस्ट कार्यालय में बैठे रहते थे, लेकिन उन्होंने प्रशासकीय दायित्वों का निर्वहन नहीं किया। इन्हीं शिथिलताओं का लाभ उठाते हुए गणना कर्मी अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, अविनाश शुक्ल, रमाशंकर मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय जैसे कर्मी चढ़ावे की धनराशि में लगातार चोरी को अंजाम देते गए। पांच जून को चोरी खुली तो एसआईटी की जांच व पूछताछ में सच सामने आ गया। हंगामा मचा तो अब दोनों स्तरों से एसओपी का पालन होने लगा है।

ट्रस्टियों के निर्देश पर आगे भी होंगे बदलाव

स्टेट बैंक की अयोध्या शाखा के प्रबंधक अनूप कुमार त्रिपाठी ने बताया कि गणना कक्ष में वित्तीय पारदर्शिता को सुनिश्चित कराया जा रहा है और काम पर नहीं आने वाले कर्मियों को हटा दिया गया है। नए कर्मियों को भेजा जा रहा है। वर्तमान में 10-12 कर्मी गणना कर रहे हैं। आगे जैसा ट्रस्टियों का निर्देश होगा, वैसा कार्य किया जाएगा।

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एसओपी के अंतर्गत अब क्या-क्या होने लगा

  • सुरक्षाकर्मियों की कड़ी निगरानी में दानपेटिकाएं गणना कक्ष तक पहुंचाई जाने लगीं।
  • दानपेटिकाओं (हुंडियों) से निकली धनराशि को अब एक साथ नहीं मिलाकर अलग-अलग इंट्री होने लगी।
  • प्रवेश करते समय व निकलते समय जांच होने लगी और गणनाकर्मियों का मोबाइल प्रतिबंधित किया गया।
  • गणना कक्ष में खाद्य पदार्थ या निजी सामान ले जाने की मनाही हो गई।
  • दानपेटिकाओं से निकली नकदी व सिक्कों का अलग-अलग हिसाब दुरुस्त होने लगा।
  • मूल्यवान वस्तुएं और आभूषणों को रजिस्टर पर दर्ज किया जाने लगा।
  • बिना जेब वाले कपड़े का ड्रेस कोड गणना कर्मियों के लिए अनिवार्य किया गया।
  • गिनती के पश्चात बने बंडलों और लोहे के कंटेनरों में रखी गई धनराशि अंकित की जाने लगी।
  • ट्रस्ट के तीन प्रतिनिधियों कृष्ण मोहन, जगदीश आफले व चंदन राय के संयुक्त हस्ताक्षर से नकदी बैंक में जमा होने लगी और मिलान होने लगा।
  • हुंडियों के अलावा गर्भगृह व काउंटर पर दिए गए दान की स्पष्ट रसीद दी जा रही, अभिलेखीकरण हो रहा, आभूषणों का वजन हो रहा और कर्मियों की जवाबदेही तय की गई है।

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