चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस को मिली अनुकल्प, लवकुश और करुणेश की 40 घंटे की रिमांड
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस को अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र और करुणेश पांडेय का 40 घंटे का कस्टडी रिमांड मिला है। यह रिमांड आरोपितों ...और पढ़ें
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राम मंदिर।
HighLights
पुलिस को तीन आरोपितों का 40 घंटे का रिमांड मिला।
रिमांड पूछताछ और चोरी के सामान की बरामदगी के लिए।
आरोपितों के वकील भी पूछताछ के दौरान साथ रहेंगे।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस को तीन अन्य आरोपितों का कस्टडी रिमांड मिल गया है। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने जेल में निरुद्ध अनुकल्प मिश्र, उसके बहनोई लवकुश मिश्र व करुणेश पांडेय का 40 घंटे का रिमांड स्वीकृत कर दिया है। पुलिस इन्हें बुधवार की सुबह छह बजे से गुरुवार रात दस बजे तक अभिरक्षा में लेकर पूछताछ करेगी।
आरोपित अविनाश शुक्ल के बाद अब न्यायालय ने अन्य तीन आरोपितों का पुलिस रिमांड दिया है। हालांकि, पुलिस ने इनका सात दिन का रिमांड मांगा था, लेकिन कोर्ट ने सीमित अवधि का ही रिमांड मंजूर किया। गत दिनोंं जेल में पूछताछ के दौरान पुलिस को आरोपितों के बयान से कुछ ऐसे सुराग हाथ लगे हैं, जिनके आधार पर पुलिस इनकी निशांदेही पर बरामदगी कर सकती है।
पुलिस के आवेदन पर दर्ज कराया विरोध
रिमांड अर्जी पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान आरोपितों की ओर से डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल कुलशेखर सिंह ने पुलिस के आवेदन पर विरोध दर्ज कराया। तर्क दिया कि पुलिस रिमांड के बहाने आरोपितों का उत्पीड़न कर सकती है। उनका कहना था कि यदि पुलिस को किसी सामान की बरामदगी या तलाशी लेनी है, तो वह जिला मजिस्ट्रेट से आदेश प्राप्त कर आरोपितों के घरों की तलाशी भी ले सकती है।
ऐसे में पुलिस कस्टडी रिमांड की आवश्यकता नहीं है। इससे पहले आरोपित अविनाश शुक्ल की निशांदेही पर चारपहिया वाहन समेत कई सामान बरामद किए गए थे। इन्हीं बरामदगी और पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने अन्य तीनों आरोपितों की कस्टडी ली है।
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सशर्त मिला रिमांड, आरोपितों के साथ रहेंगे उनके अधिवक्ता
तीनाें आरोपितों को पुलिस आठ जुलाई की सुबह छह बजे से नौ जुलाई की रात 10 बजे तक अपनी कस्टडी में रखेगी। ऐसे में पुलिस को शर्तों का पूरा पालन करना होगा। कस्टडी लेने से पूर्व आरोपितों का चिकित्सीय परीक्षण कराया जाएगा। आरोपितों के जेल से निकलते ही समयावधि शुरू हो जाएगी।
पूछताछ के लिए पुलिस उन्हें संभावित ठिकानों पर ले जा सकेगी। आरोपितों की ओर से उनके अधिवक्ता को उनसे कुछ दूरी बनाकर साथ रहने का भी अधिकार दिया गया है। जेल भेजने से पहले आरोपितों का पुन: चिकित्सीय परीक्षण होगा।