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    चढ़ावे की गणना के लिए SBI के अलावा शामिल होगा एक और बैंक? राम मंदिर ट्रस्ट जल्द ले सकता है बड़ा फैसला

    Updated: Thu, 23 Jul 2026 06:55 AM (IST)

    राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बड़ा फैसला ले सकता है। चढ़ावा गणना के लिए एसबीआई के साथ एक और बैंक को जोड़ा जा स ...और पढ़ें

    राम मंदिर

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    HighLights

    1. राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर ट्रस्ट ले सकता है बड़ा फैसला।

    2. एसबीआई के साथ एक और बैंक होगा गणना में शामिल।

    3. वित्त समिति बैंक के साथ संबंधों पर करेगी पुनर्विचार।

    प्रवीण तिवारी, अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर घिरा श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट जल्द ही बड़ा निर्णय ले सकता है। सूत्र बताते हैं कि चढ़ावा में अर्पित होने वाली राशि की गणना के लिए भारतीय स्टेट बैंक के साथ ही एक और भी बैंक को इस कार्य में लगाया जा सकता है।

    हालांकि इस पर अभी अधिकृत निर्णय ट्रस्ट को ही लेना है। बैंक व ट्रस्ट के संबंधों पर निर्णय लेने का अधिकार वित्त समिति को दिया गया है। बताया गया कि जल्द ही बैंक प्रबंधन व इस समिति के अधिकारियों में चर्चा प्रारंभ होगी। चढ़ावा की राशि अभी तक एसबीआई की अयोध्या शाखा में ही जमा होती है। प्रारंभ से ही ये खाता इसी बैंक में है। फिलहाल इस मामले में ट्रस्ट बैंक के रुख से सहमत नहीं है।

    मंदिर के दानपात्रों में अर्पित होने वाली राशि को समुचित रूप से संयोजित व सुरक्षित रखने के लिए बैंक व ट्रस्ट में एमओयू हुआ था। बैंक के अतिरिक्त ट्रस्ट ने भी गणना प्रभारी नियुक्त किया था। इस चोरी के आरोपितों में छह बैंक के कर्मचारी हैं। दो ट्रस्ट के कर्मी हैं। महाकुंभ के दौरान ही बैंक ने एजेंसी हायर की। छह आरोपित कर्मचारी इसी एजेंसी के हैं।

    उधर ट्रस्ट का कहना है कि भारतीय स्टेट बैंक के साथ संपन्न एमओयू के अंतर्गत बैंक के दायित्वों और उनके अनुपालन मेें त्रुटियां मिलीं, जिस पर बुधवार को बैठक में चर्चा हुई। अनियमितताओं के प्रकाश में आने के बाद बैंक की प्रतिक्रिया और गंभीरता के अभाव पर ट्रस्टी निराश भी हैं।

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    इसीलिए न्यास की वित्त समिति को बैंक के साथ ट्रस्ट के संबंधों पर और मानक प्रक्रियाओं पर पुनर्विचार करने को कहा गया। इसी के बाद ट्रस्ट बैंक से संबंधों पर निर्णय लेगा। उधर गणना में एसबीआई सहित अन्य बैंक को शामिल करने की चर्चा चल रही है।

    यह भी हो सकता है कि एसबीआई को इस प्रक्रिया से हटा दिया जाए। फिलहाल इसके लिए अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा करनी होगी। ट्रस्टी महांत दिनेंद्र दास ने कहा कि यह सब वित्त समिति को तय करना है।

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