राम मंदिर चढ़ावा चोरी: हेराफेरी के लिए गलवा गए दान के गहने! SIT को सबूत मिलने में परेशानी
अयोध्या राम मंदिर में दान किए गए आभूषणों के गायब होने के आरोपों की जांच एसआईटी कर रही है। आभूषणों को गलवाए जाने के कारण साक्ष्य नहीं मिल रहे, जिससे हे ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
राम मंदिर में दान किए आभूषणों के गायब होने के आरोप।
एसआईटी जांच में आभूषणों को गलवाने का खुलासा।
हेराफेरी की आशंका, साक्ष्य जुटाने में हो रही कठिनाई।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण के बीच कई दानदाताओं ने सामने आकर आभूषणों को भी गायब कर दिए जाने का आरोप लगाया है। जांच के दौरान इन आरोपों की सत्यता परख रही एसआईटी को अब इनसे जुड़े रिकॉर्ड ही नहीं मिल पा रहे हैं।
हालांकि यह भी कहा जा रहा कि सभी आभूषणों को गलवा कर सुरक्षित रखा गया है, परंतु इनका भी कोई साक्ष्य नहीं उपलब्ध कराया जा रहा है।
ऐसे में यह आरोप सही साबित होते दिख रहे हैं कि दान के आभूषणों में हेराफेरी की योजना पहले से ही चल रही थी। अब यह प्रमाणित किए जाने का प्रयास हो रहा कि आभूषणों को गलवाने का निर्णय किसका था, क्या इसे आम सहमति से लिया गया था? या रामशंकर यादव टिन्नू ने ऐसा स्वयं करवाया था।
आभूषणों को गलवा दिए जाने के कारण एसआईटी के साथ ही पुलिस को भी नहीं मिल रहे साक्ष्य
सूत्रों का कहना है कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद से प्रतिदिन आ रहे दानदाताओं की ओर से दी जा रही विभिन्न वस्तुओं को स्वीकार करने में मंदिर व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव टिन्नू की ही प्रमुख भूमिका रही है। दरअसल, टिन्नू यादव ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय का पहले ड्राइवर रह चुका था, इसलिए उसे काफी विश्वसनीय माना जाता था और इस पर चंपतराय भी बहुत भरोसा करते थे। यही वजह रही कि उसकी राम मंदिर परिसर में भी खूब चलती थी।
रामलला को दान में दिए गए आभूषणों को गायब कर दिए जाने के आरोपों को सुलझाना कठिन
बताया जाता है कि जब दानदाता आभूषण या कोई अन्य वस्तु दान के लिए चंपतराय के पास लेकर जाते थे, तो इसी की भूमिका उसके रखरखाव की थी। कई दानदाताओं ने भी टिन्नू यादव पर ही आभूषण गायब करने का आरोप लगाया है। टिन्नू ने अपने बयान में भी बताया है कि उन्हें बेंगलुरु में भेज कर गलवा दिया जाता था, जिससे कीमती धातु को सुरक्षित रखा जा सके।
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अब एसआईटी की जांच में यही सवाल अनुत्तरित है कि ऐसा किसके आदेश पर किया गया। क्या आभूषणों को उनके मूल स्वरूप में सुरक्षित नहीं रखा जा सकता था।
दो दिन पहले मांगे थे एसआईटी ने आभूषण के साक्ष्य
सूत्रों ने बताया कि दो दिन पूर्व जब एसआईटी सदस्यों ने आभूषणों से संबंधित साक्ष्य मांगे, तो कुछ कागजात अवश्य दिखाए गए और बताया गया कि कुछ सोना-चांदी की ईंटें बैंकों के लाकर में सुरक्षित हैं, लेकिन यह नहीं पता चल पा रहा कि कितनी मात्रा में दान आया था और कितना सुरक्षित है। ऐसे में यह सामने आया है कि आभूषणों को गलवाने का उद्देश्य हेराफेरी ही रहा है।