राम मंदिर सीईओ पद: रेस के चेहरे आए सामने, दो Ex. IAS और दो Ex. IPS में से एक का होगा चयन
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में राम मंदिर के पहले स्थायी सीईओ का चयन होगा। राजेश पांडेय, योगेश्वर ...और पढ़ें

HighLights
राम मंदिर के पहले स्थायी सीईओ का चयन बुधवार को होगा।
राजेश पांडेय, योगेश्वर मिश्रा, परेश सक्सेना, दिनेश सिंह प्रमुख दावेदार।
स्थानीय सुरक्षा समन्वय समिति के गठन पर भी होगा विचार।
प्रहलाद तिवारी, अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को होने वाली अहम बैठक में मंदिर के पहले स्थायी मुख्य कार्यकारी अधिकारी के नाम पर निर्णय होगा। सीईओ चयन के लिए गठित समिति ने तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंप दिया है।
अब इन तीन नामों में पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय, पूर्व आईएएस योगेश्वरराम मिश्रा, आईएएस दिनेश सिंह सहित बिहार कैडर के आईपीएस डॉ. परेश सक्सेना के नाम सबसे आगे बताए जा रहे हैं। एक ओर राजेश पांडेय के पास पुलिस, सुरक्षा और बड़े आयोजनों के प्रबंधन का लंबा अनुभव है तो योगेश्वरराम मिश्रा प्रशासनिक और शासन स्तर की जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
वहीं, डॉ. परेश सक्सेना के पास पुलिस प्रशासन के साथ चिकित्सा क्षेत्र की पृष्ठभूमि भी है। दिनेश सिंह भी कई जिलों के डीएम रहे हैं और जनसंवाद सहित अलग कार्यशैली से चर्चा में रहे हैं। ऐसे में ट्रस्ट के सामने अनुभव और जरूरत के लिहाज से उपयुक्त नाम चुनने की चुनौती होगी।
निगाहें तो इन चारों पर टिकीं हैं, लेकिन राम मंदिर की सुरक्षा, श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या और मंदिर परिसर की विस्तारित व्यवस्थाओं को देखते हुए सुरक्षा एवं प्रशासनिक समन्वय का अनुभव राजेश पांडेय के पक्ष में अहम माना जा रहा है।
पूर्व आईएएस अधिकारी योगेश्वरराम मिश्रा भी मजबूत दावेदारों में हैं। प्रशासनिक सेवा के दौरान जिलाधिकारी से लेकर विशेष सचिव और मंडलायुक्त तक की जिम्मेदारियां संभालीं। प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का अनुभव उन्हें इस पद के लिए मजबूत विकल्प बनाता है।
तीसरे नाम पर बिहार कैडर के आईपीएस डॉ. परेश सक्सेना की दावेदारी बताई जा रही है। बिहार के अलावा केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। चिकित्सा शिक्षा की पृष्ठभूमि भी उनके अनुभव को अलग बनाती है।
मंदिर की व्यवस्थाओं में प्रशासन, सुरक्षा, स्वास्थ्य, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालु सुविधाओं के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत को देखते हुए उनके नाम पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
अब सभी की निगाहें बुधवार को होने वाली ट्रस्ट की बैठक पर हैं। तीन नामों के पैनल में से किसे राम मंदिर की विस्तारित व्यवस्थाओं की कमान मिलती है, इसका फैसला बैठक के बाद साफ होगा।
आज तय होगा स्थानीय सुरक्षा समन्वय समिति का ढांचा
बैठक के एजेंडा के अनुसार राम मंदिर सुरक्षा को लेकर महासचिव की अध्यक्षता में स्थानीय सुरक्षा समन्वय समिति बनाए जाने का प्रस्ताव भी विचार के लिए रखा जाएगा। इसका मुख्य मकसद मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन के बीच सुरक्षा संबंधी विषयों पर प्रभावी तालमेल कायम करना होगा।
प्रस्तावित समिति में ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ पुलिस-प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और मंदिर की सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों को प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना है।
समिति समय-समय पर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करने के साथ भीड़ नियंत्रण, प्रमुख पर्वों व विशेष आयोजनों की सुरक्षा रणनीति, विशिष्ट लोगों की आवाजाही, श्रद्धालुओं के प्रवेश-निकास की व्यवस्था, दर्शनार्थियों की सुरक्षा और किसी भी आपात परिस्थिति में तत्काल आपसी समन्वय जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर काम करेगी।
