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    Ram Mandir Ayodhya: भव्य नव्य राम मंदिर में विराजित रामलला का ठाठ भी राजसी, धारण करते हैं सिल्क के वस्त्र

    By Praveen Tiwari Edited By: Dharmendra Pandey
    Updated: Mon, 24 Nov 2025 06:07 PM (IST)

    RamLalla Dresses: रामलला के वस्त्र डिजाइनर मनीष त्रिपाठी अनवरत नए वस्त्र तैयार करने में ही जुटे रहते हैं। इन्हें श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पराम ...और पढ़ें

    दिन के अनुरूप रंगों के विशिष्ट वस्त्र

    दिन के अनुरूप रंगों के विशिष्ट वस्त्र

    HighLights

    1. रामलला को भाया असम, उड़ीसा, बंगाल, राजस्थान व आंध्र का सिल्क

    2. दिन के अनुरूप रंगों के विशिष्ट वस्त्र कराए जाते निर्मित

    प्रवीण तिवारी, जागरण अयोध्याः रामनगरी के भव्य नव्य राम मंदिर में विराजित रामलला का ठाठ भी राजसी है। उनके राग भोग में विशिष्ट व्यंजनों का समावेश है। इसके साथ ही वह नित्य नये अलग-अलग रंगों के वस्त्र धारण करते हैं। रामलला के वस्त्र भी सिल्क के होते है।

    रामलला के अधिकांश वस्त्र राजस्थान, बंगाल, कश्मीर, उड़ीसा, आंध्र में निर्मित सिल्क से बनते हैं। वह सोमवार को सफेद, मंगलवार को लाल, बुधवार को हरा, गुरुवार को पीला, शुक्रवार को क्रीम, शनिवार को नीला व रविवार को गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करते हैं। नित्य नई धोती व दो पटका पहनते हैं। इसमें एक छोटा पटका और दूसरा बड़ा होता है। इन पर गुलाबी रंग की डाइंग (छपाई) की जाती है। ये पूर्णतया भारतीय व परंपरागत परिधान हैं।

    रामलला के वस्त्र डिजाइनर मनीष त्रिपाठी अनवरत नए वस्त्र तैयार करने में ही जुटे रहते हैं। इन्हें श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के परामर्श के बाद अंतिम रूप से दिल्ली में तैयार किया जाता है। बुनाई आंध्र प्रदेश के धर्मावरम के हथकरघा में होती है। इन वस्त्रों को तैयार करने में देश के विभिन्न प्रदेशों के सिल्क का प्रयोग होता है।

    अब तक असम के हरे रंग के सिल्क, उड़ीसा की संबलपुरी, बंगाल की जामदानी, राजस्थान की बंधेज बांधनी, आंध्र की इक्कत सिल्क रामलला के वस्त्रों में प्रयुक्त हो चुकी है। मौसम के अनुसार भी वस्त्र बदलते रहते हैं। मनीष ने बताया कि व गर्मी व सावन में काटन सिल्क, सर्दी में ऊनी, प्रचंड ठंडक में पश्मीना से बने वस्त्र रामलला को पहनाए जाते हैं।

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    प्रचंड सर्दी में ऊनी वस्त्र लद्दाख, हिमाचल व कश्मीर की पश्मीना शिल्क से तैयार किये जाते हैं। इन सिल्क से तैयार वस्त्रों पर विभिन्न प्रदेशों के क्राफ्ट की छाप होती। मनीष बताते हैं कि भगवान को ऐसे वस्त्र पहनाये जाते हैं, जो उन्हें चुभें न, इसका भी विशेष ध्यान रखा जाता है।