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कौन हैं तीन सदस्यीय समिति के मेंबर? जो चुनेंगे राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO

Published: Tue, 07 Jul 2026 01:29 PM (IST)

रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई है। इसमें शिरडी साईं ...और पढ़ें

राम मंदिर। (तस्वीर- फाइल)

राम मंदिर। (तस्वीर- फाइल)

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जागरण संवाददाता, अयोध्या। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी का चयन करने के लिए जिस तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, उसमें सुरेश हावड़े को 10 वर्षों तक मंदिर की व्यवस्थाओं के संचालन का भी अनुभव है। वह भी किसी छोटे-मोटे मंदिर का नहीं, बल्कि शिरडी साईं जैसे समृद्ध मंदिर का।

समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (से.) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े को सम्मिलित किया गया है।

चढ़ावा चोरी का प्रकरण सामने आने के बाद यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि मंदिर प्रबंधन एवं संचालन की पद्धति और प्रणाली में कई स्थानों पर कमजोरियां रहीं। सोमवार को हुई राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में इसे दूर करने और सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

एसआइटी ने भी विशेषज्ञों से स्वतंत्र परामर्श लेने का सुझाव दिया है, जिससे मंदिर प्रबंधन में आदर्श, कुशल और पारदर्शी व्यवस्था स्थापित हो सके। इसीलिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति का निर्णय लिया गया है।

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सुरेश हावड़े शिर्डी साईं जैसे मंदिर के प्रबंधन से जुड़े रहे हैं। इसीलिए माना जा रहा है कि समिति का सुझाया नाम न सिर्फ राममंदिर प्रबंधन को बेहतर बनाएगा, बल्कि व्यवस्थाओं के प्रति जनविश्वास को भी दृढ़ करेगा।

सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल भी समिति में शामिल

इसके अलावा फर्रुखाबाद के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी को अयोध्या श्रीराम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति में शामिल किया गया है।

वर्तमान में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूतपूर्व सैनिक सेवा परिषद के आऑल इंडिया चेयरमैन के पद पर काम कर रहे हैं। इस कमेटी में रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली भी शामिल हैं। 

ट्रस्ट ने सार्वजनिक किया दान का हिसाब

बता दें कि राम मंदिर ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को होगी। 6 जुलाई को बैठक में ट्रस्ट ने मंदिर में प्राप्त चढ़ावे और भेंट का विस्तृत वित्तीय ब्योरा भी सार्वजनिक किया। ट्रस्ट के अनुसार, अब तक निधि समर्पण अभियान और अन्य स्रोतों से कुल 3264 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इनमें से 2370 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण और अन्य पूंजीगत कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं।

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