अगर सच में अयोध्या से चुनाव लड़ जाएं CM योगी और अखिलेश यादव, तो कौन होगा भारी?
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी, जिस पर योगी ने पलटवार करते ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
अखिलेश ने योगी को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी।
योगी ने अखिलेश को अयोध्या से लड़ने का पलटवार किया।
अयोध्या यूपी चुनावों में राजनीतिक गरमाहट का केंद्र बनी।
रमाशरण अवस्थी, अयोध्या। विधानसभा चुनाव करीब छह माह बाद संभावित है, किंतु चुनावी पारा अभी से चढ़ने लगा है। इसके केंद्र में एक बार पुन: रामनगरी है। इसकी शुरुआत गुरुवार को हुई, जब सपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर अयोध्या सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने की चुनौती उछाली।
अखिलेश सपा की ओर से अयोध्या सीट से घोषित प्रत्याशी एवं पूर्व इलाकाई विधायक तेजनारायण पांडेय पवन के पैतृक घर कृष्णापुर में आयोजित भागवतकथा में भाग लेने आए थे और समर्थकों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा था कि पवन के प्रत्याशी घोषित होने के बाद अब भाजपा को प्रत्याशी नहीं मिल रहे हैं और यदि मुख्यमंत्री अयोध्या में अपने किए कामों को लेकर बहुत आश्वस्त हैं, तो वह स्वयं चुनाव लड़ कर देख लें, अयोध्या उनका पानी उतार देगी।
रामनगरी पहले से ही प्रशस्त करती रही है राजनीतिक दशा-दिशा
स्वाभाविक है कि इस चुनौती पर रामनगरी के यशस्वी राजनीतिक दूत की तरह प्रतिष्ठित योगी आदित्यनाथ कहां चुप रहने वाले थे और इसी अपेक्षा के अनुरूप शनिवार को बलरामपुर में उन्होंने पलटवार किया और अयोध्या से स्वयं के सामने अखिलेश यादव को चुनाव लड़ने की चुनौती दी। फिलहाल चुनाव तक सरयू में बहुत पानी बहना है, किंतु वर्तमान मुख्यमंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री की तकरार यह संकेत देने लगी है कि निकट भविष्य में अयोध्या के साथ पूरे प्रदेश की चुनावी जंग कितनी रोचक होगी। यह कोई पहला मौका नहीं है, जब रामनगरी से प्रदेश का राजनीतिक और चुनावी ताप तय होने को है।
अयोध्या में हमेशा ही भारी रहा है भाजपा का पलड़ा
इसका सूत्रपात तो दशकों पूर्व रामलहर के साथ हो गयी थी। 1990 में मुख्यमंत्री रहते मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों को रोकने के लिए कहा था कि अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मार सकता और इस चुनौती के प्रतिकार में भाजपा समर्थक माने जाने वाले कारसेवकों ने न केवल रामजन्मभूमि पर बने विवादित ढांचे के शिखर पर भगवा फहराने में सफलता पायी, बल्कि कुछ माह बाद हुए चुनाव में भाजपा ने मुलायम सिंह को पदच्युत कर पहली बार उत्तर प्रदेश की सत्ता का स्वाद चखा।
घमासान की सुगबुगाहट
यद्यपि वर्तमान घमासान की सुगबुगाहट के बीच करतलिया भजनाश्रम के महांत रामदास त्यागी जैसे सपा के शुभचिंतक संत स्पष्ट करते हैं कि अखिलेश यादव ने स्वयं के मुकाबले नहीं, बल्कि स्थानीय प्रत्याशी पवन पांडेय के मुकाबले योगी आदित्यनाथ को चुनाव लड़ने की चुनौती दी है।
आठ चुनाव से एक बार छोड़ कर अयोध्या से भाजपा अपराजेय
तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य योगी की जवाबी चुनौती को न्यायसंगत ठहराते हुए कहते हैं कि यदि सपा को योगी से अयोध्या में लड़ने का इतना ही शौक है, तो अखिलेश यादव को आगे आने का साहस दिखाना होगा और वह यह न भूलें कि गत आठ चुनाव से एक बार छोड़ कर अयोध्या से भाजपा अपराजेय है। जिन पवन पांडेय के बूते अखिलेश योगी को ललकार रहे हैं, वह भी लगातार दो बार से भाजपा प्रत्याशी वेदप्रकाश गुप्त के सामने पराजय का सामना कर रहे हैं। गत लोकसभा चुनाव में फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र से जीत जरूर मिली, किंतु तब भी अयोध्या विस क्षेत्र में भाजपा अपराजेय रही।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।