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    आजमगढ़ में सीपू सिंह हत्याकांड के बाद हुए बवाल के 63 मुकदमे वापस, पूर्व विधायक की पत्नी की मांग पर फैसला

    Updated: Sun, 28 Jun 2026 07:24 PM (IST)

    आजमगढ़ में पूर्व विधायक सर्वेश सिंह 'सीपू' हत्याकांड के बाद हुए बवाल में 63 आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस ले लिए गए हैं। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. सीपू हत्याकांड के बाद 63 आरोपियों पर मुकदमे वापस।

    2. पूर्व विधायक वंदना सिंह की मांग पर सरकार का निर्णय।

    3. आगजनी और बवाल के मामले में दर्ज थे मुकदमे।

    जागरण संवाददाता, आजमगढ़। सगड़ी के पूर्व विधायक सर्वेश सिंह ‘सीपू’ हत्याकांड के बाद उपजे जनआक्रोश में हुई आगजनी और बवाल के मामले में 63 लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमें को शासन ने वापस ले लिया है। अभियोजन विभाग के प्रार्थना पत्र पर शनिवार को अदालत ने मुकदमा वापस लेने की अनुमति दे दी।

    इस मामले में दो मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसमें एक मुकदमें में 49 लोगों को नामजद एवं लगभग 1,000 (एक हजार) अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया था। इसमें 42 आरोपितों के विरुद्ध पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी। दूसरे मुकदमें में पुलिस ने 21 आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट प्रस्तुत की थी।

    इन दोनों मुकदमों को वापस लेने की पुष्टि स्व. सीपू सिंह की पत्नी पूर्व विधायक वंदना सिंह ने इंटरनेट मीडिया के फेसबुक एकाउंट पर पोस्ट करके किया है। पूर्व विधायक ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने जनहित में निर्णय लिया है, जिसकी सराहना क्षेत्रीय लोग कर रहे हैं।

    बता दें कि विधानसभा क्षेत्र सगड़ी के पूर्व विधायक सर्वेश सिंह उर्फ सीपू की हत्या 19 जुलाई 2013 की सुबह जीयनपुर स्थित आवास पर हुई थी। इस मामले में माफिया ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू सिंह समेत 11 लोगों को आरोपित बनाया गया था। सीपू सिंह की हत्या के बाद जीयनपुर कस्बे में आक्रोशित लोगों ने काफी बवाल मचाया था।

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    आक्रोश इस कदर था कि स्थानीय जनता और पुलिस आमने-सामने आ गई थी। पुलिस वालों के हथियार लूटे गए थे। पुलिस और पीएसी के वाहनों को जला दिया गया था।

    इस मामले में जीयनपुर कोतवाली में तत्कालीन इंस्पेक्टर विजय सिंह ने 49 नामजद और करीब एक हजार अज्ञात लोगों के खिलाफ लूट, डकैती, आगजनी, हत्या के प्रयास एवं लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।

    इसी बवाल को लेकर 36 वीं वाहिनी पीएसी के वाहन चालक संजय सिंह ने 21 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा जीयनपुर कोतवाली में ही दर्ज कराया था। इस मामले में स्व.सीपू सिंह की पत्नी पूर्व विधायक वंदना सिंह ने प्रदेश सरकार से मुकदमा वापस लेने की मांग की थी।

    इनका कहना था कि पुलिस ने सीपू सिंह की हत्या के बाद उपजे आक्रोश को गलत रंग देते हुए निर्दोष लोगों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत किया और चार्जशीट भेजी है। जनहित में इस मुकदमें को वापस लिया जाए।

    शासन ने वंदना सिंह की मांग को स्वीकार करते हुए अभियोजन कार्यालय को मुकदमा वापस लेने का आदेश दिया। इसके बाद अभियोजन कार्यालय ने इन दोनों मुकदमों में फरवरी-2026 में कोर्ट में मुकदमा वापस लेने का प्रार्थना पत्र दिया।

    इस पर सुनवाई पूरी करने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट सीनियर डिवीजन के जज अतुल पाल ने शनिवार को मुकदमा समाप्त कर दिया।

    पहले मामले में इनके ऊपर दर्ज मुकदमा हुआ वापस

    प्रभुनाथ सिंह (मृतक), ज्ञानेंद्र मिश्रा, पवन सिंह, रिजवान मेंहदी, जितेंद्र सोनकर, बलजीत उर्फ बालचंद, सोनू यादव उर्फ कुलदीप, फैयाज अहमद, नियाज, अशोक तिवारी, मनीष चौरसिया, मनोज चौरसिया, केशव सिंह, नागेंद्र सिंह, अमरनाथ सिंह, अजय सिंह, रमेश चतुर्वेदी, धर्मेंद्र सोनकर, पारस सोनकर, रमेश सोनकर, अशोक निषाद, राजकुमार मिठाई वाला, पप्पू पाठक उर्फ दिनेश पाठक, चुन्नी सिंह उर्फ संजय सिंह, गुड्डू सिंह, विश्वप्रकाश सिंह, राहुल सिंह, पंकज सिंह, डब्लू गुप्ता, रामजन्म सिंह, बलवंत सिंह, भुल्लन सिंह, अबू खैर उर्फ गुड्डू, संतोष जायसवाल, मनोज जायसवाल, रामसेवक, अजीत बर्नवाल, बबलू, देवेंद्र उर्फ मेहलू, भुंवर यादव, अंबर कपड़ा वाले उर्फ मंगल जायसवाल और मेहताब कपड़ा वाला पर दर्ज मुकदमा वापस हुआ।

    दूसरे मामले में इन पर दर्ज मुकदमा हुआ वापस

    मुकेश जायसवाल, रमेश जायसवाल, सुबास राय, गोपाल, मुकेश सिंह, योगेंद्र सिंह, सोनू सोनकर, अजय उर्फ पिंटू, संतोष चौरसिया, शरीफ, विरेंद्र साहनी, विजई राजभर, प्रमोद यादव उर्फ पम्मी, अजय यादव, राधेश्याम कन्नौजिया, राजेश उर्फ किशनू, नरसिंह, रमेश, जनार्दन, हरिश्चंद और सूरजभान के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस हुआ है।

    सात दोषी काट रहे आजीवन कारावास की सजा

    पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू हत्याकांड के मामले में तत्कालीन विशेष सत्र न्यायाधीश गैंगस्टर कोर्ट रामानंद की अदालत ने फैसला सुनाया था। जिसमें माफिया ध्रुव कुमार सिंह कुंटू समेत सात आरोपितों को आजीवन कारावास व 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई थी। अन्य छह दोषियों में मृत्युंजय सिंह, दिनेश, शिव प्रकाश उर्फ प्रकाश, राजेंद्र यादव, संग्राम सिंह, दुर्गविजय शामिल हैं।