आजमगढ़ में अतिक्रमण हटने से बेघर हुए सैकड़ों परिवार, रोजी-रोटी पर मंडराया संकट
आजमगढ़ में लोक निर्माण विभाग और रेलवे की भूमि पर चले अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद सैकड़ों परिवारों के सामने ...और पढ़ें

अतिक्रमण हटने से उजड़े सैकड़ों परिवार।
HighLights
फूलपुर, आजमगढ़ में अतिक्रमण हटाओ अभियान चला।
सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट आया।
लाखों का सामान नष्ट, नए ठिकाने की तलाश।
जागरण संवाददाता, फूलपुर (आजमगढ़)। फूलपुर नगर में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और रेलवे की भूमि पर चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद सैकड़ों परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। वर्षों से सड़क किनारे अस्थायी और स्थायी दुकानें बनाकर जीवनयापन करने वाले दुकानदार अब बेघर और बेरोजगार होने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
खुरासो मोड़ से उदपुर बच्चूलाल पेट्रोल पंप तक पीडब्ल्यूडी और रेलवे की खाली पड़ी भूमि पर दशकों से चाय, मिठाई, मछली, मुर्गा, बढ़ईगीरी, बाइक मरम्मत, पंचर, साइकिल, मोची, माली समेत अन्य छोटे-छोटे व्यवसाय संचालित हो रहे थे। समय के साथ कई लोगों ने पक्के निर्माण कर लिए और लाखों रुपये खर्च कर दुकानों का विस्तार भी किया।
पूर्व में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान केवल टीनशेड या अस्थायी निर्माण हटाए जाते थे, जिसके चलते इस बार भी अधिकांश लोगों को बड़ी कार्रवाई की उम्मीद नहीं थी। प्रशासन द्वारा नोटिस दिए जाने के बावजूद कई दुकानदार अपना सामान नहीं हटा सके।
हाल ही में उपजिलाधिकारी और क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में चले अभियान के दौरान बड़ी संख्या में दुकानें और मकान ध्वस्त कर दिए गए। इससे कई दुकानों में रखा लाखों रुपये का सामान मलबे में दबकर नष्ट हो गया।

अभियान खुरासो मोड़ से रेलवे स्टेशन मुख्य द्वार तक चला, जबकि आगे की कार्रवाई की सूचना मिलते ही उदपुर बच्चूलाल पेट्रोल पंप तक के अधिकांश दुकानदारों ने रातों-रात अपनी दुकानें खाली कर दीं और दरवाजे, शटर व अन्य सामान निकाल लिया।
अभियान के बाद कई दुकानदार अपने टूटे प्रतिष्ठानों के मलबे में दबा सामान तलाशते नजर आए। सबसे बड़ी चुनौती अब उनके सामने रोजगार की है।
एक साथ बड़ी संख्या में दुकानें हटने से किराये पर व्यावसायिक स्थान मिलना भी मुश्किल हो गया है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है और परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो गया है।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना आवश्यक था और यह कार्रवाई पूर्व में जारी नोटिसों के बाद नियमानुसार की गई है। दूसरी ओर प्रभावित परिवारों को अब अपने रोजगार के लिए नए ठिकाने की तलाश है।
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