बदायूं में बड़ा सियासी उलटफेर: पूर्व MLA कुशाग्र सागर ने छोड़ी BJP, आशुतोष मौर्य की नजदीकियों के बीच लिया फैसला
पूर्व विधायक कुशाग्र सागर ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, जिससे बदायूं की सियासत में बड़ा ...और पढ़ें

कुशाग्र सागर और आशुतोष मौर्य
HighLights
कुशाग्र ने फेसबुक पर पोस्ट कर इसे आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने की नई शुरुआत बताया
जागरण संवाददाता, बदायूं। करीब 20 दिन से जिले की सियासत में जिस उलटफेर के कयास लगाए जा रहे थे, वह हो गया। वर्ष 2017 में भाजपा से चुनाव लड़कर प्रदेश में सबसे कम उम्र में विधायक बनने वाले कुशाग्र सागर ने बुधवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। करीब 11 वर्षों तक भाजपा से जुड़े रहे कुशाग्र ने फेसबुक पर पोस्ट कर इसे आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने की नई शुरुआत बताया।
उनके इस फैसले ने जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को हवा दे दी है। खास बात यह है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब उनके चुनावी प्रतिद्वंद्वी और सपा विधायक आशुतोष मौर्य की भाजपा से बढ़ती नजदीकियों को लेकर अटकलें तेज हैं।
राजनीतिक हलकों में कुशाग्र के फैसले को केवल संगठन छोड़ने के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसके पीछे बिसौली की बदलती सियासी परिस्थितियों को भी एक संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, कुशाग्र ने अपने इस्तीफे में किसी नेता का नाम नहीं लिया है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के आशुतोष मौर्य ने कुशाग्र सागर को करीब 1,834 मतों से हराया था। इसके बाद राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग और अब भाजपा के कार्यक्रमों में उनकी खुली भागीदारी को लेकर जिले में राजनीतिक चर्चाएं तेज होने लगी थीं।
सपा विधायक को अब पूरी तरह से भाजपा का ही माना जाने लगा था और जल्द ही पार्टी में शामिल होने की अटकलें भी लगाई जा रही थीं। इसी सियासी माहौल के बीच कुशाग्र का भाजपा से इस्तीफा सामने आया है।
2017 में बने विधायक, पिता भी रहे हैं विधायक
कुशाग्र सागर ने 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर बिसौली सुरक्षित सीट से जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया था। वर्ष 2022 में पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
उनके पिता योगेंद्र सागर भी बिल्सी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। हालांकि, वर्ष 2021 में छात्रा के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अदालत ने योगेंद्र सागर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
कुशाग्र ने अपने इस्तीफे में लिखा कि 11 वर्षों तक पूरी निष्ठा और समर्पण से संगठन के लिए काम करने के बावजूद अपेक्षित सम्मान और अपनापन नहीं मिला। उन्होंने पार्टी में बिताए समय और मिले अवसरों के लिए आभार जताया।
मगर उन्होंने आगे की राजनीतिक राह को लेकर कोई घोषणा नहीं की। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कुशाग्र का अगला कदम क्या होगा और बिसौली में बदलते समीकरणों का 2027 के विधानसभा चुनाव पर कितना असर पड़ेगा।
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