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    बदायूं HPCL हत्याकांड: आरोपी के मोबाइल में छिपे कई राज, ढूंढने गई पुलिस तो परिवार भी मिला गायब

    Updated: Mon, 16 Mar 2026 03:41 PM (GMT+05:30)

    बदायूं में एचपीसीएल अधिकारियों की हत्या के आरोपी अजय प्रताप सिंह का मोबाइल अभी तक नहीं मिला है। पुलिस को संदेह है कि इसमें कई राज छिपे हैं। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. आरोपी अजय प्रताप का मोबाइल फोन अब भी लापता है।

    2. पुलिस को मोबाइल में कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।

    3. आरोपी का परिवार और करीबी भी पुलिस की पहुंच से दूर।

    जागरण संवाददाता, संवाददाता, बदायूं। हिंदुस्तान पेट्रोलियम के सीबीजी प्लांट के उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता और सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा की हत्या का आरोपित अजय भले ही जेल चला गया हो। लेकिन अब भी कई सवाल पीछे छोड़ गया है। जिनके जवाब उसके मोबाइल में हो सकते हैं। लेकिन उसका मोबाइल अब तक नहीं मिला है।

    पुलिस टीमें जब उसके मोबाइल की तलाश में उसके व चाचा के घर पहुंची तो सब गायब मिले। इसके अलावा आरोपित के सभी नजीदीकियों की तलाश कर रही पुलिस को अब तक सफलता नहीं मिली है। पुलिस की सख्त कार्रवाई के चलते सभी छिप गए हैं।

    सीबीजी प्लांट के दो अधिकारियों की हत्या के बाद अजय प्रताप सिंह जिस बोलेरो कार से प्लांट से बाहर निकला वह मूसाझाग थाने में खड़ी है। पुलिस का दावा है कि आरोपित के पास कोई मोबाइल नहीं था। इसके बाद 12 मार्च की रात को ही आरोपित से पुलिस की मुठभेड़ भी हुई, लेकिन पुलिस को उसका मोबाइल नहीं मिला।

    अब तक तो पुलिस इसे लेकर ज्यादा चिंतित नहीं थी, लेकिन जब हत्याकांड पर सवाल खड़े होने लगे तो पुलिस ने उसका मोबाइल ढूंढना शुरू किया। बताते हैं कि पुलिस ने 13 मार्च को जब उसके घर दबिश दी थी, तब तो उसकी मां व एक मानसिक मंदित भाई मिला था। लेकिन इसके बाद से वह भी नहीं मिल रहे हैं।

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    आरोपित के चाचा व उसके राकेश सिंह का भी कोई पता अब नहीं चला है। पुलिस को जानकारी मिली कि गांव में उसके अन्य नजदीकी भी है, उनकी तलाश करने पर वह भी गायब मिले। पुलिस ने जब लोकेशन निकालने का प्रयास किया तो उसका मोबाइल नंबर बंद निकला। ऐसे में आरोपित का मोबाइल तलाश करना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है।

    गांव में आरोपित और उसके परिवार की दहशत

    आरोपित के बारे में जब गांव के लोगाें से बातचीत करने की कोशिश की गई तो कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं था। ग्रामीणाें ने बिना नाम बताए बताया कि पूरे गांव में उनके अलावा न किसी के पास पैसा है, न जमीन। एक यही परिवार है जिसका पूरे गांव में रसूख है।

    परिवार के लोग अलग अलग मामले में पूर्व में मुकदमे भी दर्ज हुए, लेकिन राजनीतिक और रुआब के चलते हर बार उनके मुकदमे छूट गए। बरेली के आंवला थाने में भी एक मुकदमा दर्ज था। जिसमें पुलिस आरोपित के भाई पर गुंडा एक्ट बनाना चाह रही थी, लेकिन बाद में वह भी नहीं हो सकी।

    चौकी अंदर या बाहर अभी संशय बरकरार

    प्लांट में चौकी बना दी गई है, ऐसा बताया तो गया, लेकिन रविवार को कहीं चौकी स्थापित नजर नहीं आई। हालांकि चौकी के लिए तैनात किए गए पुलिस कर्मी प्लांट के बाहर बने एक कमरे के बाहर जरूर बैठे नजर आए। लेकिन चौकी के लिए कौन सी जगह है, इस बारे में उन्हें भी कोई जानकारी नहीं थी।

    लापरवाही सबकी गाज पुलिस पर

    सीबीजी प्लांट में दो अधिकारियों की हत्या में सिर्फ पुलिस ही जिम्मेदार नहीं बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी भी पूरी बनती है। अधिकारियों ने डीएम को जो प्रार्थना पत्र दिया था, उसमें डीएम ने सीओ दातागंज और एसडीएम दातागंज को जांच के लिए लिखा था। बताते हैं कि एसआइटी इन सभी बिंदुओं पर प्रमुखता से जांच करेगी। इसके अलावा पुलिस के एक और अधिकारी जिनकी सीधी जवाबदेही इस मामले में बनती थी, उन्होंने पूरे मामले में क्या किया, यह भी बड़ा सवाल बन गया है।

    जल्द शुरू हो सकता है प्लांट संचालन

    सीबीजी प्लांट संचालन अब तक बंद है। इसे लेकर अहमदाबाद में एचपीसीएल के सभी वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई है। जिसमें सीबीजी प्लांट से संबंधित सभी अधिकारी भी मौजूद रहे। माना जा रहा है कि एक या दो दिन में प्लांट संचालन शुरू हो सकता है।

    चिन्हित किए जा रहे लाइसेंस

    आरोपित अजय प्रताप और उसके परिवार में कितने असलाह है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने अब तक अजय के परिवार में सिर्फ एक असलाह होने की पुष्टि की है। लेकिन जिस तरह से उनके पूरे परिवार का भय और आतंक है, इसे लेकर उनके पूरे परिवार के लाइसेंस की जांच की जा रही है। उन सभी को निरस्त किया जाएगा।

    वहीं, अजय प्रताप की दुकानों को ढहाए जाने से पहले नोटिस चस्पा की कार्रवाई की जानी थी। रविवार देर शाम टीम ने पहुंच कर नोटिस चस्पा कर दिया है। जल्द ही इन दुकानों का ध्वस्तीकरण किया जा सकता है।