महिला दिवस पर विशेष: पिता की मौत से टूटा परिवार, आज मां का सहारा बनीं बेटियां
बदायूं की सात बहनों ने पिता की मृत्यु के बाद आई आर्थिक चुनौतियों का सामना किया। वर्ष 2008 में पिता के निधन से परिवार टूट गया, पर बहनों ने हार नहीं मान ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, बदायूं। 'म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के' यह दंगल फिल्म का डाॅयलाग जरुर है, लेकिन शहर की सात बहनों ने इसे अपने जिंदगी के दंगल में उतार लिया है। जब उनके पिता का देहांत हुआ था, तो पूरा परिवार टूट गया था। कमाई के सारे साधन बंद हो गए थे।
जिन रिश्तेदारों से मदद मांगी, कोई मदद करने को तैयार नहीं हुआ। परेशानियां आती गईं और उनके हौसले बढ़ते गए। एक-एक करके बहनों ने अपने परिवार को संभाला और वह आज इस स्थिति में हैं कि वह खुद ही अपना जीवन यापन कर रही हैं और मां को भी पाल रहीं हैं।
यह बात शहर कोतवाली क्षेत्र के मुहल्ला चूना मंडी निवासी नाजिर हुसैन के परिवार की है। वर्ष 2008 में अचानक उनकी मृत्यु हो गई थी। वह चौधरी सराय मुहल्ले में परचून की दुकान चलाते थे, जिससे उनके परिवार का गुजारा चल रहा था। उनके परिवार में पत्नी नजमा बेगम और सात बेटियां शर्मिला, नाज, दरक्शा, हिरा, सिम्मी, बुसरा और आसना थीं।
जब उनके पिता की मृत्यु हुई थी, तब चार बहनें काफी छोटी थी, लेकिन तीन बहनें शादी लायक थीं। उनकी मृत्यु के बाद परचून की दुकान भी बंद हो गई थी। आमदनी का कोई साधन नहीं रहा था। जो बहनें बालिग थीं। उन्होंने रिश्तेदारों से मदद भी मांगी लेकिन उस दौरान हालात ऐसे थे कोई व्यक्ति मदद करने तक को तैयार नहीं था।
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हालांकि, किसी तरह समय बीता, बहनें बड़ी हुईं उन्होंने अपने परिवार की जिम्मेदारियाों को संभालना शुरू किया। किसी ने कपड़ों की सिलाई तो किसी ने स्कूल में डांस सिखा कर पैसे कमाए। आज सात बहनों में सबसे बड़ी बहन शर्मिला, नाज और हिरा की शादी हो चुकी है।
अभी दरक्शा, सिम्मी, बुसरा और आसना अविवाहित हैं। दरक्शा ने बताया कि वह बच्चों को कपड़ों की सिलाई सिखाती हैं। जो रुपये मिलते हैं, उससे परिवार का खर्च चलता है।
इस समय सिम्मी उझानी के एपीएस इंटर कालेज में डांस टीचर है और बुसरा रायजादा के सामने ब्यूटी पार्लर चला रहीं हैं। जबकि सबसे छोटी बहन आसना ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई भी कर रही है। चारो बहनें अब किसी के आगे हाथ नहीं फैलातीं। वह अपना परिवार खुद चला रही हैं।
स्कूल की छुट्टियों में समर कैंप लगती हैं सिम्मी
सिम्मी स्टार साइन क्रिएटिव एकेडमी भी चला रही है और हर साल स्कूल की छुट्टियों के दौरान नगर पालिका में समर कैंप भी आयोजित करती हैं, जिसमें वह मेहंदी लगाना, डांस, ढोलक, सिलाई, ब्यूटी पार्लर, आर्ट समेत कई चीजे सिखाती हैं। उनके समर कैंप में शहर के तमाम बच्चे शामिल होते हैं।