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यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क से बढ़ सकती है टैक्स चोरी, बाजारों में फिर लौट सकता है 'कच्चे बिल' का दौर

Published: Tue, 22 Sep 2026 05:11 PM (IST)

यूपीआई और डिजिटल भुगतान पर एमडीआर लगने की चर्चा से व्यापारी नगद लेनदेन की ओर मुड़ सकते हैं, जिससे कर ...और पढ़ें

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HighLights

  1. दो हजार से अधिक के डिजिटल लेनदेन पर शुल्क से व्यापारियों में नाराजगी

जागरण संवाददाता, बदायूं। यूपीआई और डिजिटल भुगतान पर एमडीआर लगने की चर्चाओं से शहर के बाजारों में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। बैंक शुल्क और टैक्स से बचने के लिए व्यापारी एक बार फिर नगद लेनदेन की ओर रुख कर सकते हैं।

ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का पूरा डेटा बैंकों के जरिए सरकार के पास रहता है, जबकि कैश लेनदेन का कोई पक्का लेखा-जोखा नहीं होता। नगदी का चलन दोबारा बढ़ने से जिले में जीएसटी चोरी का रास्ता खुल सकता है।

डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के बाद अब मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होने की आहट से व्यापारी चिंतित हैं। दो हजार से अधिक के ऑनलाइन भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क से बचने को व्यापारी ग्राहकों को कैश में भुगतान करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।

बैंकिंग व्यवस्था से बाहर होने वाला यह नगद पैसा सीधे तौर पर समानांतर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है। नगद लेनदेन की आड़ में व्यापारी कच्चे बिलों पर सामान बेचने और अपना सालाना टर्नओवर छिपाने में सक्षम हो जाते हैं।

इससे न केवल जीएसटी की चोरी बढ़ती है, बल्कि आयकर में भी सरकार को सीधे राजस्व का नुकसान उठाना पड़ता है। बीते कुछ वर्षों में यूपीआइ की सहजता के कारण छोटे-बड़े सभी दुकानदारों ने डिजिटल पेमेंट अपनाया था, जिससे कर संग्रह में सुधार हुआ था।

यदि व्यापारी फिर से पुराने ढर्रे पर लौटे, तो बाजारों में नगदी की मांग अचानक बढ़ जाएगी। इससे पारदर्शिता खत्म होगी और कच्चे पर्चे पर कारोबार करने का रुझान दोबारा जोर पकड़ेगा।

व्यापारियों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों को बढ़ावा देने के लिए शुल्क मुक्त व्यवस्था ही रहनी चाहिए, ताकि कर चोरी पर लगाम लगी रहे और पारदर्शी बैंकिंग बनी रहे।

कच्चे बिल के कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

ऑनलाइन भुगतान का रिकार्ड बैंक में दर्ज होता है, जिसे छिपाना कठिन है। इसके विपरीत, नगद मिले पैसों को बही-खातों से बाहर रखकर आसानी से कच्चे पर्चे पर बिक्री दिखाई जा सकती है। इससे व्यापारी अपना टर्नओवर कम दिखाकर जीएसटी दायरा छिपाने में कामयाब हो जाते हैं, जो राजस्व के लिए बड़ा झटका है।

ग्राहकों पर पड़ सकता है दोहरा बोझ

जानकारों को मानना है कि जब व्यापारी एमडीआर शुल्क का बोझ खुद न उठाकर ग्राहकों पर डालेंगे, तो आम लोग भी आनलाइन पेमेंट से कतराने लगेंगे। अतिरिक्त जेब ढीली करने के बजाय ग्राहक नगद भुगतान चुनेंगे। इस तरह डिजिटल इंडिया के अभियान को झटका लगेगा और बाजारों में एक बार फिर नगदी का बोलबाला देखने को मिल सकता है।

 

यह पालिसी बनाई गई है। व्यापारी वर्ग को इसे मानना पड़ेगा। हालांकि अगर व्यापारियों ने नकद भुगतान लेना शुरू किया तब टैक्स पर थोड़ा प्रभाव पढ़ सकता है। टैक्स व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। यदि कोई व्यापारी डिजिटल भुगतान से मना करता है या जीएसटी से बचने के लिए कच्चे बिल पर बिक्री करता है, तो शिकायत मिलने पर जांच कर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

- संजीव पाठक उपायुक्त, राज्य कर विभाग


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