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    प्रतिबंध के बावजूद इकोनॉमिक कारिडोर पर पहुंची कांवड़ यात्रा, हादसे में सात कांवड़िये घायल... फार्च्यूनर बुरी तरह क्षतिग्रस्त

    By Rajeev Kumar Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Sun, 02 Aug 2026 01:05 PM (GMT+05:30)

    दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर प्रतिबंध के बावजूद कांवड़ियों के जत्थे को फॉर्च्यूनर ने टक्कर मार दी, जिसमें सात कांवड़िये घायल हो गए। इस घटना ने ...और पढ़ें

    दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कारिडोर पर हादसे के बाद पहुंची पुलिस व अन्य राहगीर। जागरण

    दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कारिडोर पर हादसे के बाद पहुंची पुलिस व अन्य राहगीर। जागरण

    HighLights

    1. स्कार्पियों में रखी थी भगवान शिव की विशाल मूर्ति, पीछे से तेज रफ्तार फॉर्च्यूनर ने मारी टक्कर

    2. हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, रोक के बावजूद कारिडोर पर कैसे पहुंचे कांवड़िये

    जागरण संवाददाता, बड़ौत (बागपत)। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कारिडोर पर कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध होने के बावजूद रविवार सुबह कांवड़ियों का एक जत्था कारिडोर से गुजर रहा था। इसी दौरान हिलवाड़ी गांव के पास पीछे से तेज रफ्तार फार्च्यूनर ने स्कार्पियो में टक्कर मार दी। हादसे में सात कांवड़िये घायल हो गए, जबकि फार्च्यूनर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद फार्च्यूनर सवार लाक कर मौके से फरार हो गए। हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंध के पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    दिल्ली के द्वारका क्षेत्र के श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर तुंगनाथ धाम जा रहे थे। उनकी स्कार्पियो में बड़ी शिव मूर्ति स्थापित थी, जिसे सुरक्षित ढंग से वाहन के पीछे रखा गया था। रविवार सुबह करीब पांच बजे हिलवाड़ी गांव के पास पीछे से तेज रफ्तार फार्च्यूनर ने कांवड़ में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पूरी कांवड़ क्षतिग्रस्त हो गई और उसके साथ मोनू, योगेश गंभीर रूप सें घायल हो गए, जबकि दिनेश, विकास, आकाश, मोनू व अमित को भी चोट लगी है।

    हादसे के बाद फार्च्यूनर लगभग 50 मीटर आगे जाकर रुकी। टक्कर के प्रभाव से कार के एयरबैग खुल गए, जिससे उसमें सवार लोगों की जान बच गई। इसके बाद फार्च्यूनर को लॉक कर मौके से फरार हो गए। घायल कांवड़ियों को उपचार के लिए दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल, शाहदरा में भर्ती कराया गया। सूचना मिलने पर बड़ौत कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त फार्च्यूनर को कारिडोर से नीचे उतरवाया। बाद में कांवड़िये अपनी क्षतिग्रस्त स्कार्पियो और कांवड़ को साथ लेकर रवाना हो गए।

    सवाल यह है कि...
    घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रशासन की ओर से दिल्ली-देहरादून इकोनामिक कारिडोर पर कांवड़ यात्रा पूरी तरह प्रतिबंधित घोषित की गई है, तब कांवड़ियों का जत्था इस मार्ग पर कैसे पहुंच गया। यदि प्रतिबंध प्रभावी था तो पुलिस ने उन्हें कारिडोर पर प्रवेश करने से क्यों नहीं रोका। वहीं दूसरी ओर प्रतिबंधित मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही भी जारी रही, जिससे यह गंभीर हादसा हो गया।
    अब इस दुर्घटना के बाद प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंध के अनुपालन पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी और बैरिकेडिंग प्रभावी होती तो इस हादसे से बचा जा सकता था। क्राइम इंस्पेक्टर मधुर श्याम का कहना है कि सातों कांवडिया दिल्ली में द्वारका से इकोनामिक कारिडोर पर चढ़े थे और हिलवाड़ी गांव के पास सुबह फॉर्च्यूनर ने कावड़ को टक्कर मारकर क्षतिग्रस्त कर दिया। घायलों को गुरु तेग बहादुर अस्पताल शाहदरा में भर्ती कराया गया है।

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