मजबूरी ऐसी भी! किडनी पेशेंट बेटे का जीवन बचाने को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनने पहुंची मां
बागपत में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भर्ती के लिए पहुंची महिलाएं अपनी पारिवारिक मजबूरियों के कारण आवेदन कर रही हैं। किडनी पीड़ित ...और पढ़ें

विकास भवन में कागजों का सत्यापन करातीं आंगनबाड़ी की आवेदक। जागरण
HighLights
बागपत जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भर्ती का सत्यापन हुआ।
महिलाएं पारिवारिक मजबूरियों के कारण नौकरी ढूंढ रही हैं।
किडनी पीड़ित बेटे के इलाज हेतु पिंकी ने आवेदन किया।
जागरण संवाददाता, बागपत। मजबूरी है...क्या करूं? दस साल का बेटे के किडनी खराब है, जो पचास-साठ हजार रुपये पास थे वो इलाज में लगा दिए...प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराने को पैसे नहीं और सरकारी अस्पतालों में कोई पूछता नहीं। एक साल से बेटे का इलाज करवा रहीं हूं। डाक्टर ने बोला है कि 14 वर्ष उम्र तक बेटे को दवाई खिलानी होगी तब किडनी ठीक होगी। लेकिन पैसा पास नहीं इसलिए सोचा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनने को आवेदन किया, ताकि बेटे का इलाज करातीं रहूं। यह कहना है ढिकाना निवासी पिंकी का...।
फिर पिंकी लाइन में लगी दूसरी महिला से बोलीं कि चार बच्चे हैं जिनमें तीन बेटे। खेती की जमीन है नहीं। बेटे के इलाज और घर खर्च का एक मात्र सहारा मेरी और पति की मजदूरी से मिलने वाली आय है। बेटे की बीमारी की मजबूरी नहीं होती तो मैं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के लिए आवेदन ही नहीं करतीं। इंटर पास हूं, लेकिन अब देखतीं हूं कि यहां किस्मत साथ देती है या नहीं। फिर अपना नाम सुन सीडीपीओ को अपने शैक्षिक एवं जाति-आय प्रमाण दिखाने लगी, लेकिन मजबूरी की मारी पिंकी इकलौती नहीं है।
बावली की पूजा पास में खड़ी महिला से बोलीं कि बीए तक पढ़ी हूं। पैरालाइसिस होने से पापा चारपाई पर हैं। छोटा भाई है, जो कक्षा 10 में पढ़ रहा है। कमाने वाला कोई नहीं। मां थोड़ी बहुत मजदूरी कर लेती है, जिससे घर चल रहा है। इसलिए सोचा कि जब तक कहीं अच्छी नौकरी नहीं लगती तब तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बन जाऊं लेकिन गारंटी नहीं कि नियुक्ति होगी या नहीं...।
बिराल की नीतू की परेशानी भी कम नहीं। कागजों का सत्यापन कराने के लिए लाइन में लगी नीतू ने बोलीं कि बीए और बीएड तक पढ़ी हूं लेकिन वर्ष 2023 में पापा की सड़क दुर्घटना में मौत हो गईं। घर का बोझ मां और मेरे पर है। तीन छोटी बहनें हैं जिनकी अब मां को शादी की चिंता खाए जा रही है। तब मैने सोचा कि छोटी मोटी नौकरी कर लूं इसलिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पद पर आवेदन किया था लेकिन पता नहीं कि मेरा नंबर आएगा या नहीं...।
यह महज बानगी है वरना मजबूरी बयां करने वालों की वहां कमी नहींथी लेकिन दुखों का पहाड़ ढो रही नारी शक्ति में जज्बा और हौसला कम नहीं, क्योंकि अपने संघर्ष पर पक्का भरोसा है कि एक दिन जीवन की राह आसान होगी।
इनका हुआ भौतिक सत्यापन
जिला कार्यक्रम अधिकारी नागेंद्र मिश्रा ने बताया कि विकास भवन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती के लिए सत्यापन कराया गया है। जिले में 261 पदों के लिए 341 आवेदिकाओं में से 343 के अभिलेखों का सत्यापन हो गया। बाकी का रविवार को सत्यापन किया जाएगा। सीडीओ गौरखनाथ पांडेय ने कहा कि सत्यापन का कार्य अच्छे से हुआ है।
