बागपत में दिव्यांग दोस्त और उसके साथी की पुजारी ने की हत्या, मंदिर परिसर में शव दफनाकर ऊपर लगा दी टाइल्स
बागपत के सिंगोली तगा गांव में दिव्यांग अंकित और उसके दोस्त इसरार की पुजारी नरेश नाथ ने हत्या कर दी। हत्या से पहले उन्हें नशीली चाय पिलाई गई और फिर जहरीले इंजेक्शन दिए गए।
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सिंगोली तगा गांव में दिव्यांग अंकित की हत्या के बाद रोती बिलखती बहनें।
HighLights
दिव्यांग अंकित और दोस्त इसरार की पुजारी ने की हत्या।
नशीली चाय पिलाकर जहरीले इंजेक्शन से ली जान।
लापता होने के बाद अंकित के एटीएम से निकाले गए पैसे।
इंशाद अली, चांदीनगर। सिंगौली तगा गांव में दो दोस्तों की दोस्ती का दर्दनाक अंत हो गया। दिव्यांग अंकित और इसरार की लगभग 10 साल से गहरी दोस्ती थी। दोनों के मकान आसपास होने के कारण प्रतिदिन घंटों साथ रहते थे। अंकित के दिव्यांग होने के बाद इसरार उसका और भी करीबी दोस्त बन गया था।
दोनों अक्सर साथ ही कहीं आते-जाते थे। घटना वाले दिन भी दोनों एक साथ घर से निकले थे, लेकिन परिवार को क्या पता था कि अब उनकी वापसी नहीं होगी। दोनों के शव बरामद होने के बाद गांव में मातम पसरा है।
छह वर्ष पहले अंकित थ्रेसर मशीन की चपेट में आ गया था। हादसे में उसकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई और उसके दोनों पैर खराब हो गए। इसके बाद वह दिव्यांग हो गया।
अंकित के दिव्यांग होने के बाद इसरार उसका हर कदम पर साथ देने लगा, वह उसे अकेला नहीं छोड़ता था। अंकित को कहीं जाना होता तो इसरार उसके साथ जाता था। दोनों की दोस्ती गांव में भी चर्चा का विषय थी।
दोनों के स्वजन का कहना है कि अंकित और इसरार की दोस्ती महज साथ घूमने तक सीमित नहीं थी। दोनों एक-दूसरे का सहारा थे। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन दोनों साथ निकले थे और उन्हें जरा भी अंदेशा नहीं था कि कोई अनहोनी हो सकती है।
दोनों के शव मिलने की सूचना से परिवार में कोहराम मच गया। स्वजन का कहना है कि इसरार तो केवल अपने दोस्त का साथ देने गया था, लेकिन उसे क्या पता था कि दोस्ती की कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी।
इसरार की माली हालत ठीक नहीं है, वह मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करता था। रोजी-रोटी कमाने के लिए उसके पास कोई स्थाई रोजगार नहीं था, वह कभी मजदूरी तो कभी रंगाई-पुताई कर परिवार के लिए रोजी-रोटी का इंतजाम करता था, लेकिन अब उसकी हत्या के बाद पत्नी फिरदौस, छह वर्षीय बड़ी बेटी इसरा, चार वर्षीय बेटा अयान और तीन वर्षीय छोटी बेटी अन्नू के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
अंकित लापता था और बहन-बहनोई निकाल रहे थे एटीएम से नकदी
सिंगोली तगा गांव से लापता दिव्यांग और उसके दोस्त को तब लापता हुए 15 दिन हुए थे, पुलिस की जांच में सामने आया है कि लापता अंकित के खाते से एटीएम के जरिए रकम निकाली जा रही थी। दो बार में दो लाख 30 हजार रुपये की नकदी निकाली गई थी।
सिंगोली तगा निवासी अंकित और दोस्त इसरार 25 जुलाई को खेकड़ा के लिए कहकर गए थे। पुलिस सीसीटीवी कैमरों, सीडीआर और लापता युवक के बैंक खातों को चेक कर रही थी, तभी पुलिस जांच में सामने आया कि लापता दिव्यांग के मोदीनगर और फुलेरा की कैनरा बैंक की शाखा में दो खाते हैं।
इसके अलावा दो खाते बागपत स्थित इंडस बैंक और आईडीबीआई की शाखा में हैं। पुलिस को यह भी जानकारी मिली थी कि एक खाता दिव्यांग अंकित ने अपने पड़ोसी के नाम से खोला हुआ था, जबकि कई लोगों के बैंक खातों का संचालन भी अंकित करता था।
हैरान करने वाली बात यह है कि मां के कहने पर लापता अंकित की बड़ी बहन और बहनोई ने 29 और 31 जुलाई को बड़ागांव और खेकड़ा स्थित कैनरा बैंक और पीएनबी बैंक से अंकित के एटीएम कार्ड का इस्तेमाल कर दो लाख 30 हजार रुपये की नकदी निकाल ली। इस पैसे से घर के लिए नया फर्नीचर खरीदने की भी जानकारी सामने आई।
चौकी इंचार्ज धौली प्याऊ कृष्णबीर सिंह का कहना है कि लापता अंकित के पांच खातों की जानकारी मिली थी। साथ ही जांच में ये भी पता चला कि लापता होने के चंद दिन बाद ही उसके खातों से नकदी निकाली गई थी।
पुलिस को एटीएम के सीसीटीवी की फुटेज में अंकित की बहन और बहनोई द्वारा रकम निकालने की पुष्टि हुई। यह रकम क्यों निकाली गई और उससे फर्नीचर खरीदने के पीछे क्या राज है, यह अभी तक सामने नहीं आया है।
पुजारी ने जहरीला इंजेक्शन लगाया...शिष्य ने पिलाई थी नशीला पदार्थ मिलाकर चाय
फिल्मी अंदाज में अंकित व इसरार को मौत की नींद सुलाया गया है। पुजारी नरेश नाथ ने उन्हें पहले जहरीले इंजेक्शन लगाए, इससे पहले शिष्य ने नशीली चाय पिलाई थी। चारों ने करीब साढ़े चार फीट गड्ढे की खोदाई कर शवों को दबाया। इसके बाद ऊपर से टाइल्स लगा दी। गेट पर पहरेदारी पुजारी के करीबी ने की थी। घटना के बाद उनकी बाइक को यमुना व मोबाइल को नहर में फेंककर आए थे। पुलिस बाइक व मोबाइल बरामद करने के प्रयास में लगी है।
चांदीनगर थाना प्रभारी राजेश कुमार के मुताबिक अविवाहित दिव्यांग अंकित प्रजापति का किसी महिला से प्रेम प्रसंग चल रहा था। महिला से संपर्क तुड़वाने के लिए अंकित की मां ने इसी पुजारी से संपर्क किया था।
इसी दौरान पुजारी का अंकित की एक बहन से प्रेम प्रसंग शुरू हो गया। इस दौरान पुजारी ने एक फोटो अपने इंस्टा एकाउंट पर डाल दिया था, इसको लेकर अंकित ने विरोध किया। अंकित और पुजारी के बीच झगड़ा हुआ था। पुजारी ने अंकित को रास्ते से हटाने की ठान ली थी। 25 जुलाई को अंकित अपने साथी इसरार के साथ मंदिर पहुंचा। उस समय पुजारी वहां पर नहीं था।
पुजारी ने योजनाबद्ध तरीके से अपने शिष्य उज्ज्वल को बुलाया और खुद वहां पर पहुंचा। उसके शिष्य कृष्णा यादव ने चाय बनाई, जिसमें पुजारी ने नींद की गोलियां डाल दी थीं। चाय पीने के बाद जैसे ही इसरार व अंकित बाइक से चले, तो उन्हें नींद आने लगी, वह दोनों मंदिर में ही सो गए। इस दौरान पुजारी ने उन दोनों को जहरीले इंजेक्शन लगाए।
इसके बाद गड्ढे की खोदाई कर दोनों को उसमें दबा दिया था। किसी को पता न चले, इसलिए पुजारी ने अपनी स्विफ्ट कार मंदिर के गेट के सामने खड़ी कर दी थी और अपने करीबी किशोर को पहरेदारी में लगा दिया था।
घटना के बाद पुजारी अपना मोबाइल मंदिर में रखकर और हेलमेट लगाकर इसरार की बाइक बड़ागांव के निकट पूर्वी यमुना नहर में मोबाइल तथा मवीकलां पहुंचकर यमुना में बाइक फेंक दी, बाकी आरोपित भी कार से पीछे-पीछे गए।
इसके बाद वापस लौट आए थे। पुलिस मोबाइल व बाइक बरामद करने के लिए दोनों स्थान पर पहुंची, लेकिन पानी अधिक होने की वजह से बरामदगी नहीं कर पाई। मंदिर की तलाशी के दौरान नींद की गोली का रैपर व एक सिरिंज मिली है, लेकिन इंजेक्शन नहीं मिले हैं।

