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    बागपत औद्योगिक गलियारा: जमीन के मुआवजे पर गतिरोध, जुलाई में फिर होगी बातचीत

    Updated: Wed, 17 Jun 2026 06:57 PM (GMT+05:30)

    बागपत में औद्योगिक गलियारे के लिए जमीन के मुआवजे पर किसान और यूपीसीडा के बीच सहमति नहीं बन पाई। किसानों ने 12 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की मांग की, ज ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. औद्योगिक गलियारे के लिए जमीन के रेट पर विवाद।

    2. किसानों की मांग 12 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर।

    3. जुलाई के पहले सप्ताह में फिर होगी वार्ता।

    जागरण संवाददाता, बागपत। खेकड़ा तहसील क्षेत्र के 12 गांव में 2 हजार हेक्टेयर जमीन पर औद्योगिक गलियारे को विकसित किया जाना है। मगर जमीन के रेट को लेकर एडीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक बेनतीजा रही। अब जुलाई के प्रथम सप्ताह में किसने और अधिकारियों के बीच फिर वार्ता होगी।

    एडीएम राजस्व विनीत कुमार उपाध्याय की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में विधायक योगेश धामा की मौजूदगी में यूपीसीडा के अधिकारियों तथा किसानों के बीच जमीन के मुआवजे को लेकर बैठक हुई।

    किसानों ने कहा कि 10 साल पहले ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे में गई जमीन का मुआवजा काफी ऊंचे रेट पर मिला था। औद्योगिक गलियारे के लिए ऊंचे रेट पर मुआवजा क्यों नहीं मिल सकता? किसानों ने 12 हजार रुपये वर्ग मीटर के दर से मुआवजा की मांग की। इससे कम रेट पर जमीन देने से इनकार कर दिया।

    वही, यूपीसीडा कानपुर मुख्यालय के भूमि अधिग्रहण अधिकारी उमेश कुमार तथा यूपीसीडा के अधिकारी नवीन कुमार और शर्मिला पटेल ने सर्किल रेट का चार गुना रेट से ज्यादा मुआवजा देने में असमर्थता जताई।

    अधिकारियों ने कहा कि 12 हजार रुपए वर्ग मीटर का रेट हम नहीं दे सकते। यदि किसान जमीन नहीं देंगे तो इस प्रोजेक्ट को कहीं और ले जाया जाएगा।

    विधायक योगेश धामा ने किसानों को आश्वासन दिया कि वे संबंध में जल्द ही मुख्यमंत्री से बात करेंगे ताकि किसानों को उचित मुआवजा मिल सके। एसडीएम खेकड़ा मनीष यादव ने बताया कि दोनों पक्षों को 15 दिन का समय दिया गया है। इस दौरान किसान भी रेट को लेकर मंथन कर सके तथा यूपीसीडी के अधिकारी किसानों की मांग को लेकर अपने उच्च अधिकारियों को अवगत करा सके।

    यूपीसीडा के अधिकारियों ने कहा कि इन 12 गांव में औसतन सर्किल रेट 1.40 करोड़ रुपए है, जबकि किसान 12 करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा मांग रहे हैं, जो संभव नहीं है। अब जुलाई के प्रथम सप्ताह में दोनों पक्षों के बीच फिर वार्ता होगी। इस दौरान उद्यमी अश्वनी कुमार शर्मा तथा किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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