बागपत में मां की गवाही पर इकलौते बेटे को उम्रकैद की सजा, पिता और दो बहनों की थी निर्मम हत्या
बागपत में पिता और दो बहनों की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने इकलौते बेटे अमर उर्फ लक्ष्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में मां शशिप्रभा की गवाही अहम रही, जिसने अपने बेटे के खिलाफ बयान दिया था।

मां की गवाही पर इकलौते बेटे को मिली आजीवन कारावास की सजा।
HighLights
बेटे अमर को पिता-दो बहनों की हत्या में उम्रकैद।
मां शशिप्रभा की गवाही ने बेटे को दिलाई सजा।
संपत्ति विवाद और बहनों पर शक था हत्या का कारण।
जागरण संवाददाता,बागपत। पिता व दो बहन की निर्मम हत्या के मामले में अदालत युवक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई तथा 10 हजार रुपये के अर्थदंड लगाया है। इकलौते बेटे के खिलाफ अदालत में महिला ने दी गवाही है।
एडीजीसी अशोक सैनी व वादी अधिवक्ता अशोक दलाल के मुताबिक बड़ौत की पट्टी चौधरान निवासी शशिप्रभा ने 15 अगस्त 2022 को बड़ौत कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया था कि उनके पति 60 वर्षीय बृजपाल तोमर, बेटा अमर उर्फ लक्ष्य तोमर व बेटी 22 वर्षीय ज्योति मकान के कमरे में 14 अगस्त की रात लेटे हुए थे।
दूसरे कमरे में उनकी दूसरी बेटी 17 वर्षीय अनुराधा उर्फ मिट्ठू सोई हुई थीं। वह मकान की छत पर लेटी हुई थी। बेटा मोबाइल देख रहा था। आरोप है कि रात करीब 9.30 बजे ज्योति की अचानक चीख सुनाई दी।
वह कमरे में पहुंची तो अमर उर्फ लक्ष्य बसाका (फाली) से अपने पिता बृजपाल पर लगातार वार कर रहा था। उसी समय अमर ने अपनी बहन अनुराधा और ज्योति की भी हत्या कर दी थी। बचाव करने पर बेटे ने उनका भी गला पकड़ लिया था। धमकी दी थी कि तुम्हें भी इनके पास ही पहुंचा दूंगा। इसके बाद मकान के पीछे के दरवाजे से बाइक लेकर भाग गया था।
आरोप है कि अमर उर्फ लक्ष्य को एक माह पहले पति ने संपत्ति से बेदखल कर दिया था। इकलौता बेटा अपनी दो बहनों को बाहर आने-जाने और नौकरी करने से रोकता था, जिन पर शक करता था। इसी के चलते बेटे ने इस घटना को अंजाम दिया है।
वहीं पुलिस ने आरोपित अमरपाल उर्फ लक्ष्य को गिरफ्तार कर घटना में प्रयुक्त बसाका बरामद किया था। आरोपित के विरुद्ध अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई थी। पत्रावली अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम शाबिस्ता आकिल की अदालत में विचाराधीन थी। वादी समेत छह गवाहों की गवाही हुई।
अदालत ने अमरपाल उर्फ लक्ष्य को गुरुवार शाम दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई तथा दस हजार रुपये के अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अर्थदंड की आधी धनराशि वादी शशिप्रभा को दी जाएगी।
