दिल्ली-देहरादून काॅरिडोर पर आधा किलोमीटर के बीच सात जगह गड्ढे, NHAI के अधिकारी बोले- पहली बरसात में होता है
बागपत में दिल्ली-देहरादून इकोनामिक कारिडोर पर मानसून की पहली बारिश ने गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ...और पढ़ें

HighLights
दिल्ली-देहरादून कारिडोर पर बारिश से गुणवत्ता उजागर हुई।
गांगनौली-मौजिजाबाद के बीच सात जगह सड़क धंस गई।
एनएचएआइ ने मरम्मत का आश्वासन दिया, सुरक्षा का दावा।
जागरण संवाददाता, बागपत। मानसून की वर्षा ने दिल्ली-देहरादून इकोनामिक कॉरिडोर की गुणवत्ता की परतें उधेड़ दी हैं। मंगलवार को वर्षा में एक बार फिर गांगनौली से मौजिजाबाद नांगल के बीच आधा किलोमीटर के दायरे में सात स्थानों पर कॉरिडोर की पटरी नीचे से दरक गई है।
कई जगह मिट्टी का कटाव इतना अधिक हो चुका है कि सड़क के किनारे सुरंगनुमा खाली जगह बन गई है। इंटरनेट मीडिया पर यूजर्स इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं।
12 हजार करोड़ की लागत से तैयार हुए कॉरिडोर का इसी वर्ष 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्घाटन किया था। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी दिल्ली से देहरादून तक कार से इसी मार्ग से यात्रा की थी।
बीते एक जुलाई को इसी हाईवे के दिल्ली से देहरादून की ओर जाने वाली लेन पर मुजफ्फरनगर क्षेत्र के गांव खेड़ा मस्तान के ऊपर फ्लाईओवर के पास मुख्य सड़क बीचोंबीच धंस गई थी। इसकी वजह से एक बस समेत चार वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।
एनएचएआई की ओर से कार्यदायी संस्था से इनकी मरम्मत कराकर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन इसी बीच मंगलवार को कई घंटे की बरसात ने कॉरिडोर पर फिर वही तस्वीर सामने ला दी।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उन्हें इन खतरनाक गड्ढों की जानकारी है, लेकिन दिल्ली और देहरादून के बीच तेज गति से गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों को इसका अंदाजा नहीं है। यदि किसी कारण वाहन सड़क के किनारे चला गया तो बड़ा हादसा हो सकता है।
गांगनौली से मौजिजाबाद नांगल के बीच ही नहीं बल्कि बड़ौत के आसपास भी कॉरिडोर के किनारों पर जगह-जगह मिट्टी दरकने से गड्ढे हो गए हैं। आने वाले दिनों में जिस तरह बरसात ज्यादा होगी, उसी तरह कॉरिडोर पर गड्ढों की संख्या बढ़ने की आशंका बन गई है।
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एनएचएआई के परियोजना निदेशक नरेंद्र सिंह का कहना है कि कॉरिडोर के निर्माण के बाद यह पहली बरसात है, इसमें मिट्टी धंसने की संभावना रहती है। कॉरिडोर पूरी तरह सुरक्षित है। किनारों से मिट्टी धंस गई है, उसे ठीक कराया जा रहा है। कॉरिडोर का निरीक्षण लगातार किया जा रहा है। मैंने खुद भी मौके पर पहुंचकर कॉरिडोर की व्यवस्थाएं देखी हैं।