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जब धर्मेंद्र बोले...अरे! आप तो असली जाट अफसर निकले, इस पुलिस अधिकारी से थी खास दोस्ती

Published: Tue, 25 Nov 2025 06:10 AM (IST)

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के निधन से लोगों को बड़ा झटका लगा। 50 साल बाद भी उनका शोले में ...और पढ़ें

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जहीर हसन, बागपत। बालीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का निधन होने से हर किसी को बड़ा झटका लगा। 50 साल बाद उनका शोले फिल्म में निभाया गया किरदार हर किसी को याद है। यूं तो धर्मेंद्र कभी बागपत नहीं आए लेकिन मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर एवं पूर्व सांसद डा. सत्यपाल सिंह से उनकी गहरी मित्रता रही। मित्रता के नाते ही एक बार बेटे सनी देओल को उनका लोकसभा चुनाव प्रचार करने के लिए बागपत भेजा था।

दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र की मौत बागपत के बासौली गांव निवासी डा. सत्यपाल सिंह मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर डा. सत्यपाल सिंह के लिए किसी झटके से कम नहीं है। जैसे ही निधन की खबर आती है, वैसे ही डा. सत्यपाल सिंह अतीत के उस सुनहरे दौर में खो जाते हैं। जब मुंबई पुलिस में रहते उनकी धर्मेंद्र से गप-शप होती रहती थी। वे बताते हैं कि 1996 में वे दिल्ली सीबीआई से लौटने के बाद मुम्बई में पुलिस के डिप्टी कमिश्नर पद पर कार्यरत थे।

चल रहा था फिल्म फेयर अवार्ड शो

तब वहां फिल्म फेयर अवार्ड समारोह चल रहा था, मगर कुछ ऐसी बात थी कि जिसे रोकना जरूरी हो गया था। उन्होंने रात में 10 बजे का हवाला देकर फिल्म फेयर अवार्ड समारोह बंद करा दिया। इससे फिल्म इंडस्ट्री में खलबली मच गई थी। यह देख धर्मेंद्र ने मेरी हिम्मत की दाद देकर कहा कि सत्यपाल जी! आप तो असली जाट अफसर निकले...। ऐसा बड़ा फंक्शन रोकने की हिम्मत जाट अफसर ही कर सकता है।

बालीवुड, मीडिया और सत्ता की पावर के सामने ऐसा साहस कोई दिल वाला ही दिखा सकता है। धर्मेंद्र जी कौम पर फिदा थे। नासिक में 22 गांव जाटों के हैं, जहां धर्मेंद्र ने अपनी मां के नाम स्कूल बनवाया था। जिसके उद्घाटन में मुझे अपने साथ वहां लेकर गए। वर्ष 2014 में मुंबई पुलिस कमिश्नर से त्याग पत्र देकर उन्होंने भाजपा से बागपत में लोकसभा चुनाव लड़ा। तब धर्मेद्र जी ने अपने बेटे सनी देओल से कहा कि सत्यपाल जी हमारे मित्र हैं, इसलिए बागपत जाकर इनका चुनाव प्रचार करो।

सनी देओल बागपत चुनाव प्रचार करने आए जिन्हें देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा था। पूर्व सांसद बोले कि धर्मेंद्र जी के साथ उनकी न जाने कितनी यादें हैं। धर्मेंद्रजी से हर जाति-मजहब के लोगों को प्यार था। उनका जाना बेहद दुखद घटना है। धर्मेंद्रजी बहुत बड़े शायर तथा असली देशभक्त थे। उनके निधन से देश, समाज व साहित्य को बड़ी क्षति है।

जब डॉ. राजपाल को पिलाया मट्ठा

शूटिंग के अंतरराष्ट्रीय कोच रहे डा. राजपाल सिंह बताते हैं कि 15 साल पहले वे मुंबई में डा. सत्यपाल सिंह से मिलने के लिए गए। मैने सत्यपाल सिंह से कहा कि अभिनेता धर्मेंद्र तो तुम्हें जानते होंगे। ये सत्यपाल जी बोले डाक्टर साहब...धर्मेंद्र जी से हमारे अच्छे संबंध हैं। फिर सत्यपाल जी ने धर्मेंद्र जी को फोन किया और हम मिलने पहुंचे। धर्मेंद्र जी हमें तुरंत बुलाया और बोले कि तुम तो युवाओं को शूटिंग सिखाने का अच्छा काम कर रहे हो। बोले कि बिना भोजन किए नहीं जाने दूंगा। भोजन कराया और मट्ठा पिलाया। उनका निधन बड़ी क्षति है।

जब शोले फिल्म ने मचाई धूम

भास्करदत्त शर्मा बताते हैं कि 1989 में उनके विष्णु प्लेस सिनेमाघर में शोले फिल्म एक माह तक चली। फिल्म देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ता था। एडवोकेट चरण सिंह खोखर, ओमबीर ढाका तथा राजू तोमर सिरसली बताते हैं कि 50 साल बाद भी लोगों के दिलो दिमाग पर जय-वीरू दोस्ती और चल बंसती तथा ठाकुर ये हाथ हमें दे दो जैसे संवाद छाए हैं।

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