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कौन हैं प्रो. केपी सिंह, जो बने गोरखपुर विश्वविद्यालय के VC, बागपत जिले का बढ़ाया मान

By Manoj Kalina Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Sun, 06 Sep 2026 01:58 PM (IST)

प्रो. कृष्णपाल सिंह को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का नया कुलपति नियुक्त किया गया है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति ...और पढ़ें

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कृष्णपाल सिंह।

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कृष्णपाल सिंह।

HighLights

  1. प्रो.केपी सिंह गोरखपुर विश्वविद्यालय के नए कुलपति नियुक्त।

  2. बायोफिजिक्स और नैनो टेक्नोलॉजी के अनुभवी विशेषज्ञ हैं।

  3. बागपत जिले के मूल निवासी, पैतृक गांव में हर्ष का माहौल।

संवाद सूत्र, बिनौली (बागपत)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कमान शोध और अकादमिक प्रशासन के अनुभवी प्रो. कृष्णपाल सिंह (केपी सिंह) को सौंपी है। प्रो. केपी सिंह मूल रूप से बागपत क्षेत्र के बड़ौत के रहने वाले हैं। उन्हें कुलपति नियुक्त किए जाने से गांव में खुशी है। वहीं इस उपलब्धि से जिले का भी मान बढ़ा है। कंडेरा के शिक्षक सुखबीर सिंह के घर जन्मे प्रो. कृष्णपाल सिंह की प्रारंभिक शिक्षा गांव में हुई।

हाईस्कूल बामनौली इंटर कालेज से किया। इंटर व बीएससी अलीगढ़ से की। इसके बाद एमएससी, एमफिल और पीएचडी की पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से की। कृष्णपाल ने आरके कालेज शामली से अध्यापन कार्य शुरू किया था। फिर मुजफ्फरनगर के डीएवी कालेज में सेवा दी। इसके बाद पश्चिम की नामचीन संस्था जेवी कालेज बड़ौत में वर्ष 1998 में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्य शुरू किया। इसके बाद विभिन्न विश्वविद्यालयों में कुलपति रहे।

अब दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किए जाने से गांव में खुशी का माहौल है। उन्होंने लगातार जिले का मान बढ़ाया है। शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ उन्होंने लोकसभा चुनाव में बागपत आकर स्थानीय सांसद डा. राजकुमार सांगवान के चुनाव में भी कार्य किया था। प्रो. केपी सिंह तीन भाई हैं। बड़े भाई वीरपाल सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं, जो बड़ौत में रहते हैं। तीसरे भाई शामली में निवासरत हैं। प्रो. केपी सिंह खुद बरेली में रहते हैं। पिछली वर्ष होली पर वह गांव आए थे। मूल रूप से बड़े किसान हैं। तीनों भाइयों के पास 150 बीघा खेती की जमीन है।

शिक्षक दिवस पर मिली नई जिम्मेदारी
प्रदेश की राज्यपाल द्वारा शनिवार को जारी आदेश में प्रो. केपी सिंह को अब दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त मिली है। छपरौली विधायक डा. अजय कुमार, पूर्व विधायक सहेंद्र सिंह, रालोद के राष्ट्रीय सचिव डा. कुलदीप उज्ज्वल, रमाला सहकारी चीनी मिल के उपसभापति जयदेव सिंह, डा. यशवीर सिंह, डा. दुष्यंत कुमार ने हर्ष व्यक्त किया। उधर, उनके भाई इंजीनियर वीरपाल सिंह ने भी खुशी जताई है।

रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के कुलपति रह चुके प्रो. सिंह
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के नेतृत्व को लेकर चल रहा इंतजार शनिवार को समाप्त हो गया। राजभवन ने विश्वविद्यालय की कमान शोध और अकादमिक प्रशासन के अनुभवी प्रो. कृष्णपाल सिंह (केपी सिंह) को सौंप दी। कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने उन्हें कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष के लिए कुलपति नियुक्त किया है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के कुलपति रह चुके प्रो. सिंह की पहचान बायोफिजिक्स और नैनो टेक्नोलाजी के विशेषज्ञ के रूप में है।

प्रो. केपी सिंह मूल रूप से मेरठ के बागपत क्षेत्र के बड़ौत के रहने वाले हैं। उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में लंबा अनुभव रखने वाले प्रो. सिंह वर्ष 2005 में गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर से जुड़े। उन्होंने वहां बायोफिजिक्स में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यभार संभाला और बाद में प्रोफेसर बने। उनका प्रमुख अकादमिक कार्य विश्वविद्यालय के कालेज आफ बेसिक साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज की बायोफिजिक्स यूनिट में रहा।

प्रो. सिंह ने पंतनगर में बायो-नैनोटेक्नोलाजी और नैनो-बायोसेंसर से जुड़े शोध को नई दिशा दी। उनके शोध का दायरा कृषि क्षेत्र तक भी पहुंचा। नैनो-सिलिका में यूरिया को समाहित कर नैनो उर्वरक तैयार करने और उसके फसलों पर प्रभाव का अध्ययन उनके प्रमुख शोध कार्यों में शामिल रहा। इसके अलावा ग्राफीन आक्साइड, नैनोपोरस मेम्ब्रेन और इलेक्ट्रोकेमिकल बायोसेंसर के माध्यम से जैव-अणुओं की पहचान, कैंसर उपचार में लक्षित दवा वितरण व बायोमेडिकल नैनो टेक्नोलाजी पर भी उन्होंने शोध किया।

पंतनगर से कुलपति तक का लंबा प्रशासनिक अनुभव
प्रो. सिंह 2014 से 2016 तक उत्तराखंड काउंसिल फार बायोटेक्नोलाजी के निदेशक रहे। वह जीबी पंत-क्रैनफील्ड रिसर्च सेंटर के निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। पंतनगर के बाद उन्होंने विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रशासनिक दायित्व निभाए। इसी क्रम में वह चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। इसके बाद वह महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के कुलपति बने। इस विश्वविद्यालय में उन्होंने दो टर्म यानी छह वर्ष तक कुलपति के रूप में सेवा दी।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हुई उच्च शिक्षा
प्रो. केपी सिंह ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में एमएससी, एमफिल और पीएचडी की। उनकी पीएचडी का क्षेत्र मेम्ब्रेन बायोफिजिक्स रहा। इसके बाद स्लोवाकिया की टेक्निकल यूनिवर्सिटी, ब्रातिस्लावा, क्रोएशिया के रूडर बोस्कोविक इंस्टीट्यूट और ब्रिटेन की क्रैनफील्ड यूनिवर्सिटी में उन्होंने बायोमोलेक्यूल्स, नैनो-सिग्नलिंग, टार्गेटेड ड्रग डिलीवरी और नैनो-बायोसेंसर से संबंधित शोध किया। अब गोरखपुर विश्वविद्यालय की कमान मिलने के साथ उनसे शोध, नवाचार और शैक्षणिक गुणवत्ता को नई दिशा देने की उम्मीद है।

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