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'डिजिटल इंडिया पर भारी है MDR का बोझ, हम पहले ही कम मार्जिन पर कर रहे हैं काम'; व्यापारियों ने PM और CM को लिखा पत्र

By Naveen Chikara Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Tue, 22 Sep 2026 06:52 PM (IST)

Baghpat News: व्यापारियों ने 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4% एमडीआर लागू होने पर ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो

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HighLights

  1. 15 अक्टूबर से 0.4% एमडीआर यूपीआई लेनदेन पर लागू।

  2. व्यापारियों ने इसे कारोबार पर अतिरिक्त बोझ बताया।

  3. सरकार से एमडीआर व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग।

संवाद सहयोगी, बड़ौत (बागपत)। 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने की घोषणा के बाद व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। उनका मानना है कि इससे उनके कारोबार पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, खासकर तब जब वे पहले से ही कम मार्जिन पर काम कर रहे हैं।

जिले में हजारों की संख्या में ऐसे व्यापारी हैं, जिनका प्रति व्यक्ति लेनदेन 2000 रुपये से अधिक होता है। विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय यह शुल्क छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए मुश्किलें खड़ी करेगा।

व्यापारियों के अनुसार वे पहले से ही एक से दो प्रतिशत के मुनाफे पर कारोबार कर रहे हैं और ऐसे में यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगने से उनकी लागत बढ़ जाएगी। बड़ौत व्यापार संगठन के अध्यक्ष अंकुर जैन का कहना है कि पहले से कम मार्जिन पर कारोबार कर रहे व्यापारियों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ पड़ेगा।

ऐसे में ग्राहकों की जेब पर भी बोझ पड़ेगा, क्योंकि वह ग्राहकों से ही वसूलेगा। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष मुदित जैन ने कहा कि एमडीआर की व्यवस्था को लेकर व्यापारी और ग्राहक दोनों के मन में कई सवाल हैं और इस पर प्रतिनिधियों से संवाद कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

इंडस्ट्रीज ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन के संरक्षक डाॅ. योगेश जिंदल ने कहा कि मार्जिन पहले ही सीमित है और जीएसटी व आयकर के दायित्वों का पालन करने के बाद डिजिटल लेनदेन पर एमडीआर की व्यवस्था से व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल महामंत्री संदीप गर्ग टीटू प्रधान ने कहा कि डिजिटल भुगतान से जुड़े शुल्क की व्यवस्था से चिंता है और संगठन की ओर से सरकार को पत्र भेजकर नियम पर पुनर्विचार की मांग की गई है।