बलिया में एक साल में बिजली ने ली 19 लोगों की जान, 95 लाख रुपये मिला मुआवजा
बलिया में विद्युत दुर्घटनाओं में वर्ष 2025-26 में 19 लोगों की मौत हुई, जिसके लिए 95 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया। ...और पढ़ें

बलिया में बिजली के झटकों से 19 मौतें, 95 लाख रुपये का मुआवजा वितरित।
HighLights
बलिया में 19 लोगों की बिजली से मौत।
मृतकों के परिजनों को 95 लाख रुपये मुआवजा।
90 दिनों के भीतर मुआवजे के लिए आवेदन करें।
जागरण संवाददाता, बलिया। विद्युत सुरक्षा निदेशालय से विद्युत दुर्घटनाओं के मामलों में हर्जाना या आर्थिक सहायता देने का प्राविधान है। यदि बिजली के झटके या करंट लगने से किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है या कोई अंग भंग होता है तो पीड़ित या उसके स्वजन आर्थिक मुआवजे के लिए निदेशालय में आवेदन कर सकते हैं।
सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा कार्यालय बलिया के अनुसार वर्ष 2025-26 में विद्युत तार से स्पर्श होने की 18 घटनाओं में 19 लोगों की मौत हुई है। स्वजन की ओर से निदेशालय में शिकायत करने के बाद प्रति मृतक पांच लाख रुपये के हिसाब से उनके स्वजन को 95 लाख रुपये मकी आर्थिक सहायता दी गई है।
इसके अलावा पूरे साल में सात अन्य घटनाओं में 11 पशुओं की भी मौत हो गई। छह साधारण घटनाओं में सात लोग घायल हुए, जो उपचार से ठीक हो गए। बिजली से हुई घटना के बाद विद्युत सुरक्षा निदेशालय की जांच में पुष्टि होने के बाद ही मुआवजा मिलता है। जनपद में सुरक्षित विद्युत आपूर्ति के लिए संचालित तमाम योजनाओं के बावजूद घटनाओं का ग्राफ बढ़ा है।
जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 2981 वर्ग किलोमीटर है, जिसके पूरे क्षेत्र में बिजली विभाग द्वारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में व्यापक विद्युतीकरण नेटवर्क फैलाया गया है, लेकिन गर्मी के दिनों में अचानक तार टूट कर गिर जाते हैं। शहर में भी बिजली के तारों को ठीक तरीके से नहीं खींचा गया है। कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर भी सुरक्षित तरीके से नहीं रखे गए हैं। जिसके चलते हादसे होते रहते हैं।
क्या है मुआवजे का नियम
-हादसे के बाद पीड़ित पक्ष को 90 दिनों के भीतर विद्युत सुरक्षा निदेशालय के पोर्टल या स्थानीय कार्यालय में आवेदन करना अनिवार्य है। इसमें पुलिस रिपोर्ट व पोस्टमार्टम अनिवार्य है।
-घायल होने की स्थिति में सरकारी अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट के साथ निर्धारित प्रारूप में आवेदन पत्र के साथ फोटोग्राफ और ट्रेजरी चालान संलग्न करना भी आवश्यक होता है।
-अगर फसल जलती है तो विद्युत सुरक्षा निदेशालय की टीम जांच करती है। लेखपाल अपनी रिपोर्ट लगाता है, उसके हिसाब से उसका मुआवजे का निर्धारण किया जाता है।
-करंट से व्यक्ति की मौत पर पांच लाख रुपये प्रति व्यक्ति मुआवजा निर्धारित है, जबकि मवेशी करंट से मरता है तो उसकी नस्ल के अनुसार मुआवजा देने का प्राविधान है।
सुरक्षा को लेकर जारी होती है गाइड लाइन
निदेशालय हमेशा सुरक्षा को लेकर गाइड लाइन जारी करता है। विद्युत वितरण से जुड़े अभियंताओं को बताया जाता है कि कैसे दुर्घटनाओं का ग्राफ शून्य पर लाएं। इसके अलावा हर जांच में सेफ्टी को लेकर अवगत कराया जाता है।
विद्युत से हुई घटनाओं में लोग जागरूकता के अभाव में आवेदन नहीं कर पाते हैं। किसी भी दुर्घटना की सूचना तुरंत टोल-फ्री नंबर 1912 पर भी दी जा सकती है ताकि जांच की प्रक्रिया समय पर शुरू हो सके।
-हरगोविंद प्रसाद, सहायक निदेशक, विद्युत सुरक्षा कार्यालय, बलिया।
बिजली से दुर्घटनाओं को शून्य करने की दिशा में काम चल रहा है। एलटी लाइन को लगभग स्थानों पर केबल में तब्दील कर दिया गया है। ट्रांसफार्मरों पर टललेस यूनिट और फ्यूज बाक्स लगाया गया है ताकि घटनाओं के समय लाइन स्वत: कट जाए।
-विनोद कुमार जयसवाल, अधीक्षण अभियंता, विद्युत विभाग, बलिया।