बलिया में खनन माफिया काट रहे पुलिया का एप्रोच, कार्रवाई के लिए प्रशासन के साधा मौन
बैरिया, बलिया में खनन माफिया एक महत्वपूर्ण पुलिया के एप्रोच मार्ग की मिट्टी काट रहे हैं, जिससे बाढ़ के दौरान ...और पढ़ें

बलिया में खनन माफिया से पुलिया का एप्रोच मार्ग खतरे में, प्रशासन मौन।
HighLights
खनन माफिया बैरिया में पुलिया के एप्रोच मार्ग की मिट्टी काट रहे।
सरयू नदी की बाढ़ से पुलिया को बड़ा खतरा।
ग्रामीणों ने अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
जागरण संवाददाता, बैरिया (बलिया)। तटवर्ती इलाके में खनन से कटान का आमंत्रण होता है। ऐसे में सरयू के बाढ़ प्रभावित इलाके में स्थित चार गांवों शिवाल मठिया, गोपाल नगर, वशिष्ठ नगर व मानगढ़ को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण पुलिया एक बार फिर संकट में घिरती दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि खनन माफिया पुलिया के एप्रोच मार्ग की मिट्टी ट्रैक्टर व लोडर मशीन से काटकर बेच रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाया गया तो आने वाली बाढ़ में पुलिया के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। सरयू के छाड़न के समीप बनी यह पुलिया पहले भी दो बार बाढ़ की तेज धारा में बह चुकी है। इसके बाद सरकार द्वारा दोबारा पुलिया का निर्माण कराया गया, ताकि शिवाल मठिया, गोपाल नगर, वशिष्ठ नगर और मानगढ़ सहित आसपास के गांवों के लोगों का संपर्क बना रहे। क्षेत्र की हजारों की आबादी इसी मार्ग और पुलिया पर निर्भर है।
शिवाल मठिया निवासी राकेश सिंह ने बताया कि पुराने पुल के समीप ही करोड़ों रुपये की लागत से नया पुल भी बनाया गया है। एप्रोच मार्ग की मिट्टी लगातार काटे जाने से बाढ़ के समय नदी की धारा सीधे पुलिया के अप्रोच एवं पाये से टकरा सकती है। इससे नए पुल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद प्रशासन व संबंधित विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। खनन माफियाओं के डर से कई लोग खुलकर सामने आने से बच रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने बाढ़ विभाग व सेतु निगम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग केवल बाढ़ आने या पुल टूटने के बाद ही सक्रिय होता है। यदि अभी से एप्रोच मार्ग की सुरक्षा नहीं की गई, तो आने वाले बाढ़ व बरसात में बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से अवैध मिट्टी खनन पर तत्काल रोक लगाने, एप्रोच मार्ग को सुरक्षित कराने तथा पुल की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। ताकि बाढ़ प्रभावित इलाके में लोगों की यातायात सुविधा बनी रहे।
