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बल‍िया में 1400 से अधिक लोगों के मकान एक दशक में कटान में हुए समाहित, 750 लोगाें को मदद की आस

By Lavkush Singh Edited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 31 Aug 2026 03:10 PM (IST)

बलिया में गंगा और सरयू नदियों के कटान से पिछले एक दशक में 1400 से अधिक मकान बह गए हैं, ...और पढ़ें

बलिया में गंगा-सरयू कटान से तबाही जारी, सीएम योगी के ऐलान से जगी स्थायी समाधान की आस।

बलिया में गंगा-सरयू कटान से तबाही जारी, सीएम योगी के ऐलान से जगी स्थायी समाधान की आस।

HighLights

  1. बलिया में गंगा-सरयू कटान से 1400 से अधिक घर बहे।

  2. मुख्यमंत्री योगी ने ड्रेजिंग, स्थायी तटबंध बनाने की घोषणा की।

  3. लोगों को कटान के स्थायी समाधान की उम्मीद जगी।

जागरण संवाददाता, बलिया। जिले में गंगा का बहाव क्षेत्र लगभग 90 व सरयू का 120 किलोमीटर में है। यहां गंगा और सरयू के कटान से उजड़ने-बसने का सिलसिला पिछले कई दशक से चल रहा है। हर साल नदियां तबाही की अलग दास्तां लिख जातीं हैं। लगभग 35 लाख की आबादी वाले जनपद में हर साल किसी का घर नदी में चला जाता है तो कोई अपनी उपजाऊ भूमि गंवा देता है।

नदियों में आशियाना गिरने के बाद पूरे परिवार की जिंदगी सड़क पर आ जाती है। कटान रोकने के लिए सरकार की ओर से हर साल औसतन 100 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, लेेकिन कटान का स्थायी निदान नहीं हो पाता है, लेकिन अब सरकार की ओर से नदियों में ड्रेजिंग कर जलधारा को एक-दूसरे नदी से जोड़ने की तैयारी की है।

जिले के बांसडीह तहसील में दो दिन पहले आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से नदियों में ड्रेजिंग कार्य के बाद किनारे पर स्थायी तटबंध बनवाने की घोषणा की तो लोगों में उम्मीद जगी है कि इस व्यवस्था से कटान का स्थायी निदान हो जाएगा। दरअसल, ड्रेजिंग कार्य से गंगा और सरयू की जलधारा का स्थायी बहाव रूट तैयार होगा, और उसके किनारे पर पक्का तटबंध बनाया जाएगा।

ऐसा प्रयोग बिहार की ओर से छपरा रिविलगंज में बहुत पहले किया गया है, उससे सरयू उस पार कभी भी कटान से वैसी तबाही नहीं होती है, जिस तरह से नदी इस पार बलिया की सीमा में होती है। पिछले एक दशक की तबाही पर नजर डालें तो जिले में 1400 से अधिक लोगों के मकान गंगा और सरयू में समाहित हो चुके हैं। हजारों किसान भूमिहीन हो चुके हैं। पिछले वर्षों में बेघर हुए लगभग 650 लोगों को सरकार की ओर से बसने के लिए जमीन की व्यवस्था नहीं की जा सकी है, शेष 750 लोग बसने के लिए जमीन के इंतजार में हैं।

पिछले वर्ष कटान में गिरे 196 मकान व 1449 हेक्टेयर भूमि
पिछले वर्ष सदर, बैरिया और बांसडीह तहसील में 196 मकान भी नदी में समा गए थे। लगभग 1449 हेक्टेयर भूमि भी कटान में चली गई थी। इससे लगभग 7,415 किसान प्रभावित हुए थे।

इस वर्ष भी कटान से उजड़ गए 160 से अधिक मकान
इस वर्ष भी अभी तक बांसडीह के भोजपुरवा और बैरिया के गोपालनगर टांड़ी गांव में सरयू कटान के चलते 160 से अधिक मकान उजड़ गए हैं। बाढ़ और कटान से तबाही अभी दशहरा तक रहने की संभावना है।

ड्रेजिंग कार्य होने से नदियों का स्थायी गर्भ तैयार हो जाएगा। किनारे पर तटबंध होने पर बाढ़ व कटान की संभावना नहीं रहेगी। अभी नदियों में जगह-जगह बालू के टीले होने के कारण जब पानी बढ़ता है तो नदियां जहां जगह मिलता है कटान करने लगतीं हैं।

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संजय कुमार मिश्र, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड़, बलिया।