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बलिया : सरयू का बढ़ा जलस्तर, बस्तियों में घुसा पानी; तटवर्ती गांवों में फिर बढ़ा मड़राया का खतरा

Published: Thu, 27 Aug 2026 04:21 PM (IST)

बलिया में तीन दिन की राहत के बाद सरयू नदी का जलस्तर फिर बढ़ गया है, जिससे तटवर्ती गांवों में ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

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HighLights

  1. तीन दिन की राहत के बाद सरयू का जलस्तर फिर बढ़ा।

  2. सुल्तानपुर पोखरा में आवागमन के लिए नाव ही एकमात्र सहारा।

  3. महाराजपुर में नदी कटान से ग्रामीणों की चिंताएं बढ़ीं।

जागरण संवाददाता, बांसडीह (बलिया)। तीन दिनों तक जलस्तर में गिरावट के बाद गुरुवार को सरयू नदी के तेवर एक बार फिर तल्ख हो गए। डीएसपी हेड पर जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी से बाढ़ प्रभावित तटवर्ती गांवों में फिर चिंता बढ़ गई है।

चांदपुर में पानी कुछ नीचे खिसका है, लेकिन सुल्तानपुर पोखरा, भोजपुरवा और महाराजपुर में हालात अब भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। बाढ़ से उबरने की उम्मीद लगाए ग्रामीणों को नदी के बढ़ते जलस्तर ने फिर आशंकित कर दिया है। गुरुवार को सरयू का जलस्तर सुबह आठ बजे 64.06 मीटर दर्ज किया गया जबकि खतरा बिंदु 64.01 मीटर है। गतबुधवार शाम को जलस्तर घटकर 64.03 मीटर तक पहुंच गया था।

सुल्तानपुर पोखरा में नाव बनी जीवन की डोर

सुल्तानपुर पोखरा में कई घर चारों ओर से पानी से घिर गए हैं। आंगन, गलियों और संपर्क मार्गों पर पानी भरा होने से ग्रामीणों का सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित है। सड़क मार्ग बंद होने के कारण नाव ही आवागमन का प्रमुख सहारा बनी हुई है। जरूरी सामान लेने से लेकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। पानी के बीच घिरे परिवारों के लिए हर दिन किसी चुनौती से कम नहीं है।

भोजपुरवा में अपनों से दूरी, फिर भी हौसला कायम

भोजपुरवा में बाढ़ ने परिवारों को अलग-अलग रहने को मजबूर कर दिया है। महिलाएं और बच्चे सुरक्षा की दृष्टि से पर्वतपुर स्थित बाढ़ शरणालय में रह रहे हैं, जबकि पुरुष जलमग्न गांव में अपने घर और पशुओं की रखवाली कर रहे हैं।

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इसके बावजूद ग्रामीणों का हौसला कायम है। पशुपालक प्रतिदिन करीब डेढ़ क्विंटल दूध नाव के जरिये बांसडीह कस्बे और आसपास के बाजारों तक पहुंचा रहे हैं। बाढ़ के बीच जारी दूध आपूर्ति उनकी जीवटता की मिसाल बनी हुई है।

महाराजपुर में कटान ने बढ़ाई चिंता

महाराजपुर में बाढ़ के साथ कटान का खतरा भी ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रहा है। पानी के उतार-चढ़ाव के बीच नदी की धारा से अंदरूनी कटान होने की बात सामने आ रही है। इससे ग्रामीणों को घर और जमीन के नदी में समाने का डर सताने लगा है। ग्रामीण नदी के रुख पर लगातार नजर रखे हुए हैं।

तीन दिन की राहत के बाद सरयू के बढ़ते तेवर ने उनकी चिंता फिर बढ़ा दी है। ग्रामीण प्रशासन से सुरक्षा और कटान रोकने के प्रभावी इंतजाम की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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