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हाथों से हुई नाकाम तो बल‍िया की पायल के पैरों ने क‍िया कमाल, गढ़ रहे सफलता की इबारत

By Dilip Kumar Singh Edited By: Abhishek sharma
Published: Wed, 02 Sep 2026 03:07 PM (IST)

बलिया के नवानगर की कक्षा सात की छात्रा पायल जन्म से दिव्यांग होने के बावजूद अपने पैरों से लिखती, चित्र ...और पढ़ें

HighLights

  1. पायल जन्म से दिव्यांग, पैरों से करती है सभी काम।

  2. कक्षा सात की छात्रा, पैरों से लिखती और चित्र बनाती।

  3. शिक्षिका बनने का सपना, दूसरों के लिए प्रेरणा बनी।

जागरण संवाददाता, नवानगर (बलिया)। अगर इरादे मजबूत हों तो शारीरिक चुनौतियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। नवानगर क्षेत्र के डुहा बिहरा गांव की कक्षा सात की छात्रा पायल ने अपने हौसले, मेहनत और आत्मविश्वास से इस बात को सच साबित कर दिखाया है। जन्म से दोनों हाथों से दिव्यांग पायल अपने पैरों से लिखती है, सुंदर चित्र बनाती है और रोजमर्रा के कई काम बिना किसी सहारे के करती है।

उसकी संघर्ष की कहानी आसपास के लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। बनखंडीनाथ इंटर कालेज, डुहा बिहरा में कक्षा सात पढ़ने वाली पायल पुत्री मुकेश कुमार पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर है। वह अपने पैरों की मदद से कापी पर लिखती है और गृहकार्य भी खुद पूरा करती है। इतना ही नहीं, चित्रकारी में भी उसकी अच्छी रुचि है। घर के छोटे-मोटे काम भी वह आत्मनिर्भरता के साथ पूरा करती है।

जिस काम को सामान्य लोग हाथों से करते हैं, उसे पायल अपने पैरों से पूरी सहजता और दक्षता के साथ करती है। पायल की मेहनत और आत्मविश्वास देखकर लोग उसकी प्रशंसा किए बिना नहीं रह पाते। शारीरिक चुनौती के बावजूद उसके चेहरे पर आत्मविश्वास और आगे बढ़ने का जज्बा साफ दिखाई देता है। वह अपनी पढ़ाई को लेकर किसी तरह की हीनभावना नहीं रखती और अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत कर रही है।

सरकारी मदद का इंतजार
ग्रामीणों के अनुसार पायल को अब तक किसी सरकारी योजना का लाभ अथवा विशेष सहायता नहीं मिल सकी है। लोगों का कहना है कि दिव्यांग बच्चों के लिए संचालित योजनाओं का लाभ ऐसे जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचना चाहिए, ताकि उनकी प्रतिभा को उचित मंच मिल सके। पायल जैसी प्रतिभाशाली और संघर्षशील बेटी को प्रोत्साहन मिलने से उसका आत्मविश्वास और बढ़ेगा।

शिक्षिका बनना चाहती है पायल
पायल का सपना बड़ी होकर शिक्षिका बनने का है। वह चाहती है कि पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हो और अपने जैसे बच्चों के लिए प्रेरणा बने। उसका कहना है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मेहनत और हौसले से मंजिल हासिल की जा सकती है। पायल की कहानी यह संदेश देती है कि शारीरिक सीमाएं इंसान के सपनों की सीमा तय नहीं करतीं। उसका आत्मविश्वास और संघर्ष न केवल उसके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।