भूमि रजिस्ट्री में पारदर्शिता: भूलेख पोर्टल पर अब वास्तविक रकबा दर्ज करना होगा अनिवार्य
भूमि रजिस्ट्री से पहले भूलेख पोर्टल पर जमीन का वास्तविक रकबा दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे भूमि संबंधी विवादों में कमी आएगी और खरीद-बिक्री म ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
रजिस्ट्री से पहले भूलेख पोर्टल पर वास्तविक रकबा दर्ज होगा।
भूमि संबंधी विवादों और धोखाधड़ी में कमी आएगी।
क्रेता-विक्रेता दोनों को जमीन की हकीकत पता चलेगी।
जागरण संवाददाता, बलरामपुर। भूमि बैनामा कराने से पहले खरीददारों को जमीन की सच्चाई की जानकारी भूलेख पोर्टल पर दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे भूमि संबंधी विवाद में कमी आयेगी। भू-रजिस्ट्री कराने वाले क्रेता व विक्रेता दोनो के लिए जमीन की हकीकत जानकारी मिल जाएगी और मुकदमेबाजी से बचा जा सकेगा।
जिले में अक्सर देखने में आता था कि विक्रेता एक ही जमीन को कई लोगो को बेच देते थे। क्रेता बैनामा कराकर भी कब्जा नहीं पाते थे। सालो साल कचेहरी के चक्कर लगाते रहते थे।
विवाद की मुख्य वजह थी कि बैनामे के समय रियल टाइम रकबा और भूमि उपयोगी की जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाती थी। पहले खतौनी में दर्ज रकबा और मौके का रकबा अलग अलग होने पर भी रजिस्ट्री हो जाती थी।
नई व्यवस्था में गाटा संख्या, ग्राम, तहसील, व जिला के साथ यह भी अंकित करना होगा कि भूमि किस विकास क्षेत्र या विनियमित क्षेत्र की स्थित है या नहीं। यदि कोई भूमि महायोजना में पार्क, हरित पट्टी, खुले स्थल, क्रीड़ा स्थल या प्रस्तावित मार्ग के रूप में आरक्षित है तो इसका उल्लेख अभिखेल में करना अनिवार्य है।
इससे खरीददार को पहले ही पता चल जाएगा कि वह जिस जमीन को खरीद रहा है उसका भविष्य में अधिग्रहण तो नहीं होगा। उपनिबंधक कार्यालय के वरिष्ठ सहायक अजय कुमार ने बताया कि पहले वास्तविक रकबा दर्ज नहीं होता था, इससे एक ही जमीन की कई बार रजिस्ट्री हो जाती थी।
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बाद में जानकारी होने पर विवाद उत्पन्न हो जाता था। अब रजिस्ट्री से पहले भूलेख पोर्टल के माध्यम से वास्तविक रकबा दर्ज किया जाता है। जमीन खरीद फरोख्त में पारदर्शिता आएगी और फर्जीवाड़ा रूकेगा। क्रेता-विक्रेता दोनो को भूमि की वास्तविक स्थित पता होगी। कहा कि फरवरी से जून 2026 तक कुल 2767 बैनामा हुआ, जिसमें अभी तक कोई फर्जीवाड़ा नहीं हुआ।
अधिवक्ता सत्यराम मौर्य ने बताया कि इस व्यवस्था से जमीन संबंधी 70 प्रतिशत मुकदमे कम हो जाएगें। आमजन की गाढ़ी कमाई सुरक्षित होगी और भू-माफियाओं पर लगाम लगेगी। विभाग का लक्ष्य है कि सभी रजिस्ट्रियों को शतप्रतिशत पारदर्शी बना दिया जाए।