UP: बलरामपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में संसाधनों की कमी से मरीजों की बढ़ी परेशानी
बलरामपुर के रेहराबाजार और महदेइया बाजार में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन तैयार हैं, पर संसाधनों की कमी से वे पूरी तरह संचालित नहीं हो पा रहे हैं।

2013-14 से बन रहे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन तो पूर्ण हो गया, लेकिन यहां संसाधन नहीं हैं।
HighLights
रेहराबाजार व महदेइया बाजार सीएचसी भवन बनकर तैयार।
संसाधनों की कमी से अस्पताल पूरी तरह संचालित नहीं।
13 साल बाद भी मरीजों को नहीं मिल रहा लाभ।
जागरण संवाददाता, बलरामपुर। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की उम्मीद पूरी नहीं हो सकी है। 2013-14 से बन रहे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेहराबाजार व महदेइया बाजार का भवन तो पूर्ण हो गया, लेकिन यहां संसाधन नहीं हैं। अस्पताल को संचालित दर्शाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक व कर्मियों को नवीन भवन में स्थानांतरित कर दिया गया है।
सीएचसी के संसाधन नहीं मिल सके। 13 वर्ष बाद भी अस्पताल शुरू न होने से मरीजों को ग्राम स्तर पर इलाज देने की मंशा अधर में है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (वर्तमान में प्रधानमंत्री जन विकास योजना) से सामुदायिक व प्राथमिक चिकित्सालय के भवनों के लिए बजट आवंटित किया था। बजट मिलने के बाद भवनों का निर्माण कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) को जिम्मेदारी दी गई।
सीएचसी रेहराबाजार का निर्माण सितंबर 2014 में शुरू किया गया था। पहली किस्त के रूप में 3 करोड़ 74 लाख 14 हजार रुपये आवंटित किए गए। कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस उप्र जल निगम नगरीय बस्ती को जनवरी 2024 तक कार्य पूर्ण करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का मुख्य भवन बनकर तैयार है। आवास नहीं बन सका है। यहां कुल 31 पदों के सापेक्ष चिकित्सक सहित 16 कर्मचारियों की नियुक्त है। 37 प्रकार की जांच, प्रसव एवं इमरजेंसी सुविधा उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है। होम्योपैथिक चिकित्सक के लिए सीएचसी में एक कक्ष अलग से उपलब्ध है।
सीएचसी बनने के बाद, फिर पीएचसी में तब्दील
कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस सीएचसी महदेइया का निर्माण अक्टूबर 2014 में कार्य शुरू किया गया था। 8 वर्ष तक निर्माण पूर्ण रूप से बंद था। दोबारा कार्य शुरू होने पर 2025 में पूरा हुआ। भवन तैयार हुआ, लेकिन आवास नहीं बन सके हैं।
भवन तैयार होने के साथ कमरों की पेंटिंग भी कराई गई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम आने पर सीएचसी का नाम हटाकर पुन: पीएचसी लिख दिया गया। बताया जाता है कि सीएचसी की मान्यता न मिलने पर पीएचसी के रूप में संचालन हो रहा है।
यहां डॉ. अरुण कुमार, डॉ. मंजू गुप्ता (आयुष), फार्मासिस्ट मनीष यादव, दीपक कौशल, लैब टेक्नीशियन अशफाक अहमद सहित 14 लोगों की तैनाती है। यहां प्रतिदिन करीब 100 मरीजों की ओपीडी होती है। एक्स-रे मशीन लगी है, लेकिन अब तक किसी मरीज का एक्स-रे नहीं हुआ है।
एक्स-रे टेक्नीशियन रुखसार मेडिकल अवकाश पर हैं। वहीं, एचबी, एचआइवी, शुगर, पेशाब और बलगम आदि की जांच होती है। यहां प्रतिमाह लगभग 100 प्रसव होते हैं, लेकिन एमबीबीएस महिला डॉक्टर सहित किसी अन्य की तैनाती नहीं है। निष्प्रयोज्य भवन में होम्योपैथिक चिकित्सक अपनी टीम के साथ बैठकर मरीजों का इलाज करते हैं।
सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी का कहना है कि सीएचसी की मान्यता व संसाधनों के लिए शासन को कई बार पत्र लिखा गया है। मान्यता मिलने पर सीएचसी के रूप में अस्पताल संचालित होगा, जिसका लाभ मरीजों को मिलेगा।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।