बलरामपुर के देवीपाटन मार्ग के चौड़ीकरण में भू-स्वामियों को हाई कोर्ट से राहत, आदेश-परेशान न करें
तुलसीपुर के ग्राम पाटन स्थित गाटा संख्या 271, 272 एवं 305 की भूमि सड़क चौड़ीकरण के लिए बिना वैधानिक अधिग्रहण प्रक्रिया अपनाए और उचित मुआवजा दिए जमीन ल ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ
HighLights
हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप आगे की कार्रवाई नियमानुसार
तुलसीपुर क्षेत्र में होना है मार्ग का चौड़ीकरण, विवाद में भूमि अधिग्रहण
संवाद सूत्र, बलरामपुर। देवीपाटन–तुलसीपुर मार्ग के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने भू-स्वामियों को राहत देते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भू-स्वामी अपनी भूमि स्वेच्छा से बेचने को तैयार नहीं है तो उसे किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं लाया जा सकता। ऐसी स्थिति में सरकार को भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013 के तहत विधिक प्रक्रिया अपनानी होगी।
न्यायमूर्ति पंकज भाटिया एवं न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने यह आदेश रिट याचिका संख्या 6489/2026, अनिल कुमार गुप्ता एवं आठ अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य की सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में कहा था कि तुलसीपुर के ग्राम पाटन स्थित गाटा संख्या 271, 272 एवं 305 की भूमि सड़क चौड़ीकरण के लिए बिना वैधानिक अधिग्रहण प्रक्रिया अपनाए और उचित मुआवजा दिए जमीन लेने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि परियोजना के लिए लगभग 80 प्रतिशत भूमि बिक्री विलेख के माध्यम से खरीदी जा चुकी है तथा करीब 100 रजिस्ट्रियां भी हो चुकी हैं। सरकार ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं से सहमति बनाने के प्रयास सफल नहीं हो सके। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि वे प्रस्तावित मूल्य पर भूमि बेचने को तैयार नहीं हैं तथा उन पर सहमति के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
कोर्ट ने कहा कि यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से मूल्य तय कर लें तो बिक्री विलेख कराया जा सकता है, लेकिन सहमति न बनने पर सरकार को कानून के अनुसार भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया अपनानी होगी। न्यायालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को किसी भी प्रकार से परेशान न किया जाए और उनकी सहमति जबरन प्राप्त करने का प्रयास न हो। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जो भू-स्वामी स्वेच्छा से भूमि बेचना चाहते हैं, उन पर यह आदेश लागू नहीं होगा। निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया।एसडीएम राकेश कुमार जयंत ने बताया कि हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी तक कुछ मामलों में नियमों से हटकर राहत देने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन अब कोर्ट के निर्देशों के अनुसार जिस मकान की जितनी पुरानी आयु होगी, उसी के आधार पर उसका मूल्यांकन कर मुआवजा निर्धारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया विधिक प्रावधानों के अनुरूप और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराई जाएगी।