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    बलरामपुर : भूम अधिग्रहण बना ROB निर्माण में रोड़ा, मुआवजा और रेलवे जमीन विवाद में फंसा मामला

    Updated: Tue, 09 Jun 2026 03:01 PM (IST)

    बलरामपुर के हरैया तिराहे पर 9 करोड़ रुपये के रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण छह दुकानों के भूमि अधिग्रहण विवाद के कारण रुका हुआ है। राजस्व विभाग कृषि दर पर ...और पढ़ें

    इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

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    HighLights

    1. हरैया तिराहे पर रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण रुका।

    2. छह दुकानों के भूमि अधिग्रहण पर विवाद जारी।

    3. मुआवजे की दर और रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण का मामला।

    संवाद सूत्र, तुलसीपुर (बलरामपुर)। हरैया तिराहे पर करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से बन रहे रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के निर्माण कार्य में छह दुकानों के अधिग्रहण को लेकर उत्पन्न विवाद बाधा बन गया है। स्थिति यह है कि विवादित हिस्से के दोनों ओर लगभग 80 प्रतिशत पुल का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन बीच के हिस्से में कार्य शुरू नहीं हो सका है।

    जानकारी के अनुसार अधिग्रहण की जद में आने वाली भूमि को राजस्व विभाग अपने अभिलेखों में कृषि भूमि मानते हुए उसी श्रेणी के अनुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया चला रहा था। इसी दौरान प्रभावित मकान स्वामियों ने क्षेत्र के नगर सीमा में शामिल होने का हवाला देते हुए व्यावसायिक दर से मुआवजे की मांग कर दी, जिससे मामला उलझ गया।

    क्या है रेलवे अधिकारियों का दावा?

    विवाद के बीच रेलवे विभाग ने भी अपनी पैमाइश कराई। रेलवे अधिकारियों का दावा है कि संबंधित मकानों ने रेलवे की भूमि पर आठ से 12 मीटर तक अतिक्रमण कर रखा है। विभाग ने प्रत्येक भवन की दीवार पर अतिक्रमित भूमि का विवरण अंकित करते हुए उसे शीघ्र खाली करने के निर्देश दिए हैं। उपजिलाधिकारी राकेश कुमार जयंत ने बताया कि राजस्व अभिलेखों में भूमि कृषि श्रेणी में दर्ज है, इसलिए उसी आधार पर मुआवजे का निर्धारण किया जा रहा था।

    हालांकि, प्रभावित लोगों द्वारा व्यावसायिक दर से मुआवजे की मांग किए जाने के कारण मामला लंबित है। उन्होंने बताया कि लोगों की भूमि और भवनों को कम से कम क्षति पहुंचे, इसके लिए आरओबी की डिजाइन में भी आंशिक संशोधन कराया गया है। इस बदलाव के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट स्वीकृत किया गया, लेकिन इसके बावजूद सहमति नहीं बन सकी।

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    अधिग्रहण से प्रभावित गणेश जायसवाल ने बताया कि संबंधित भवन ही उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन है। उनका कहना है कि यदि प्रस्तावित हिस्से का अधिग्रहण हो जाता है तो न तो दुकान चलाने की जगह बचेगी और न ही परिवार के रहने की पर्याप्त व्यवस्था।

    उन्होंने कहा कि क्षेत्र नगर सीमा में शामिल हो चुका है, इसलिए उन्हें व्यावसायिक दर से मुआवजा मिलना चाहिए। मामले को लेकर उन्होंने न्यायालय की शरण ली है और अब कोर्ट के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।