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देवीपाटन मंदिर में चढ़ावे की राशि की सुरक्षा अभेद्य, 80 सीसीटीवी कैमरों की रहती है नजर

Published: Mon, 15 Jun 2026 08:01 PM (GMT+05:30)

देवीपाटन मंदिर में चढ़ावे की राशि की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं, जिसमें 80 सीसीटीवी कैमरे और महंत की सीधी निगरानी शामिल है।

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HighLights

  1. मंदिर में चढ़ावे की सुरक्षा हेतु 80 सीसीटीवी कैमरे।

  2. महंत मिथलेशनाथ योगी मोबाइल से करते हैं सीधी निगरानी।

  3. चढ़ावे की राशि जनकल्याणकारी कार्यों में होती उपयोग।

जागरण संवाददाता, बलरामपुर। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा की चोरी का मामला सुर्खियों में आने के बाद मंदिरों में दान और चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था चर्चा में है। ऐसे में उत्तर भारत के प्रसिद्ध सिद्ध शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर तुलसीपुर में चढ़ावे की राशि की सुरक्षा के लिए किए गए व्यापक इंतजाम श्रद्धालुओं में विश्वास पैदा करते हैं।

मंदिर प्रशासन ने पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। मंदिर परिसर में लगभग 80 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी निगरानी में दानपात्रों सहित प्रमुख स्थलों की गतिविधियां 24 घंटे रिकार्ड होती रहती हैं।

मंदिर के महंत मिथलेशनाथ योगी स्वयं मोबाइल फोन के माध्यम से सीसीटीवी नेटवर्क से जुड़े रहते हैं। समय-समय पर व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हैं। चढ़ावे की राशि की गणना भी कैमरों की निगरानी में की जाती है। पूरी धनराशि नियमित रूप से मंदिर ट्रस्ट के बैंक खाते में जमा कराई जाती है।

देवीपाटन मंदिर के मुख्य संरक्षक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समय-समय पर मंदिर पहुंचकर व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हैं। सामान्य दिनों में प्रतिदिन चार से पांच हजार श्रद्धालु मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए आते हैं, जबकि सोमवार और शुक्रवार को यह संख्या 10 से 15 हजार तक पहुंच जाती है। नवरात्र मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु यहां माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

महंत मिथलेशनाथ योगी ने बताया कि चढ़ावे की राशि में किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जाती है। यदि कोई व्यक्ति हेराफेरी का प्रयास करता है तो वह तुरंत पकड़ में आ जाता है। उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाती है।

बताया कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित चढ़ावे की राशि का उपयोग जनकल्याणकारी कार्यों में भी किया जाता है। मंदिर ट्रस्ट द्वारा विद्यालय, अस्पताल, गोशाला और थारू जनजाति के छात्रावास का संचालन किया जा रहा है। छात्रावास में 140 थारू जनजाति के छात्र भोजन, वस्त्र और शिक्षा की सुविधा निश्शुल्क उपलब्ध कराते हैं।

मंदिर परिसर की गोशाला में एक हजार से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। मंदिर के चढ़ावे की राशि समाज सेवा और जनहित के कार्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

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