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    1965 युद्ध में पाकिस्तानी सेना के छुड़ाए थे छक्के, बलरामपुर के सपूत अमर बलिदानी वीर विनय कायस्था

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 07:21 PM (IST)

    वीर विनय कायस्था ने 1965 के भारत-पाक युद्ध में 21 वर्ष की आयु में अदम्य वीरता दिखाते हुए बलिदान दिया। बलरामपुर में जन्मे इस वीर को मरणोपरांत वीर चक्र ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. वीर विनय कायस्था ने 1965 युद्ध में अदम्य साहस दिखाया।

    2. 21 वर्ष की आयु में बलिदान, मरणोपरांत वीर चक्र।

    3. बलरामपुर में प्रतिमा युवाओं को राष्ट्र सेवा हेतु प्रेरित करती।

    श्लोक मिश्र, बलरामपुर। भारत पाक युद्ध 1965 में महज 21 वर्ष की आयु में भारतीय सेना के सेकेंड लेफ्टिनेंट विनय कायस्था ने अपना बलिदान दे दिया था। उनके बलिदान से आज बलरामपुर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। बलिदानी वीर विनय कायस्था ने बलरामपुर के साथ-साथ पूरे देश का नाम रोशन किया।

    भारतीय सेना में राइट इन्फेंट्री में बतौर सेकेंड लेफ्टिनेंट ने 1965 के भारत पाक युद्ध में पाकिस्तान में घुसकर पाकिस्तानी सेनाओं के छक्के छुड़ा दिए थे। कायस्था अपनी अंतिम सांस तक लड़ते रहे। दो अगस्त 1944 को उनका जन्म बलरामपुर में हुआ था।

    नगर के मुख्य चौराहा पर शहीद स्मारक युवा ऊर्जा केंद्र के रूप में काम कर रहा है। वीर विनय कायस्था की जीवनी से यहां के युवा प्रेरणा लेकर अपने देश और समाज की रक्षा के लिए आगे आने का काम कर रहे हैं।

    पाकिस्तान में घुसकर दिखाई थी वीरता

    विनय कायस्था का जन्म दो अगस्त 1944 को बलरामपुर स्थित उनके ननिहाल में हुआ था। भारतीय सेना की 16 लाइट कैवेलरी, आर्म्ड कोर में भर्ती होकर उन्होंने वीरता की शौर्य गाथा लिखी। 21 वर्ष की अल्पायु में ही अपनी वीरता से पाकिस्तान में घुसकर भारत के शौर्य का प्रदर्शन किया था।

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    युद्ध के दौरान फिल्लौरा सेक्टर में उन्होंने पाकिस्तानी टैंकों पर धावा बोला और अपनी अंतिम सांस तक लड़ते रहे। आठ सितंबर 1965 को पाकिस्तान के फिल्लौरा में उनका बलिदानी शरीर टैंक के ट्रिगर पर हाथ रखे हुए पाया गया था।

    मरणोपरांत मिला परमवीर चक्र

    अमर बलिदानी वीर विनय कायस्था को उनके बलिदान के बाद मरणोपरांत वीर चक्र से नवाजा गया। उनकी स्मृति में बलरामपुर के मुख्य चौराहे का नाम वीर विनय चौक रखा गया है। उनके बलिदान 45 वर्ष बाद 30 अगस्त 2010 को सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था पैगाम की तरफ से वीर विनय चौक पर उनकी प्रतिमा स्थापित कराई गई।

    तत्कालीन मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, सेना के वरिष्ठ अधिकारी आरएस शेखावत, चीनी मिल के मुख्य महामप्रबंधक एनके खेतान व पैगाम संस्था के संयोजक स्व. आजाद सिंह ने प्रतिमा का अनावरण कर जिले का मान बढ़ाने वाले वीर विनय कायस्था को श्रद्धांजलि दी थी।

    वर्तमान में वीर विनय चौराहा पर स्थापित उनकी प्रतिमा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। उनके संघर्ष और बलिदान को जानकर नई पीढ़ी में राष्ट्र सेवा की भावना जागृत होती है। स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं में उनकी गाथा को विशेष स्थान दिया जाता है।