Banda Heat 47.6°C: बेलगाम खनन और पहाड़ों की ब्लास्टिंग, नदियां सूखीं, चट्टानें उगल रहीं आग, देश का Hottest District बना बांदा
बेलगाम खनन, पहाड़ों का विनाश और वृक्षारोपण की कमी के कारण बांदा देश के सबसे गर्म जिलों में से एक बन गया है। नदियों से अवैध मौरंग निकासी और गर्मी में ख ...और पढ़ें

ये फोटो बांदा में खनन की वास्तविक फोटो के साथ एआई से जनरेट किया गया है।
HighLights
बेलगाम खनन के कारण देश के सबसे गर्म जिलों में शुमार हो रहा बांदा
हर वर्ष जिले में रोपे जाते हैं 60 से 70 लाख पौधे, जनप्रतिधि करवाते हैं शुरुआत
एनजीटी के नियमों को दरकिनार कर नदी के अंदर से निकाली जा रही मौरंग
परंपरागत तरीके से अलग वर्ष भर होने वाले फसल चक्र प्रणाली को अपनाना होगा
शनिवार को 44.8, रविवार को 46.4 व सोमवार को 46.8 डिग्री सेल्सियस रहा तापमान
जागरण टीम, बांदा। देश में झुलसाने वाली गर्मी पड़ रही है। मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी है। वहीं, इस गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है बांदा। देश में ही नहीं एशिया में सबसे ज्यादा गर्म रहने वाले बांदा का तापमान 47 डिग्री सेल्सियस पार कर गया है।
बांदा के 'तंदूर' बनने की असली कहानी अब सामने आ चुकी है। जिस जिले की पहचान केन और यमुना जैसी नदियों से थी, वह आज बेहिसाब खनन, पहाड़ों के विनाश और कागजी वृक्षारोपण की वजह से देश के सबसे गर्म जिलों में शुमार हो गया है। जलवायु परिवर्तन तो एक बहाना है, असली कारण मानवीय लालच और नियमों की अनदेखी है।
नरैनी क्षेत्र में बिना मानक के तोड़े जा रहे पहाड़। जागरण
इस वजह से अधिक हो रहा तापमान
जलवायु परिवर्तन से तापमान में बढोत्तरी होना ताे सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन देश में सबसे अधिक बांदा का ही तापमान अधिक क्यों हो रहा है? यह एक विचार करने वाली बात है। आखिर बांदा के सबसे गर्म होने को लेकर जब हम कुछ पहलुओं पर विचार करते हैं व मौसम विज्ञानी समेत कुछ विचारकों से बात करते हैं तो पाते हैं कि जिले के अधिक गर्म होने के मुख्यतया तीन कारण हैं, एक तो पेड़ पौधों की कमी दूसरा बेहिसाब मौरंग खनन, पहाड़ों को तोड़ना व तीसरा है गर्मी के दिनों में खेतों का खाली पड़े रहना।
कहां गए पौधे
हर वर्ष जिले में 60 से 70 लाख पौधे वन विभाग रोप रहा है, बाकायदा अभियान की शुरूआत जनप्रतिनिधि करते हैं। इसके बाद उन पौधों का पता ही नहीं चलता है। वहीं जिले में केन, यमुना, बागेन व चंद्रावल नदियां हैं, इन नदियों से मौरंग निकालने का काम वर्षा काल के कुछ माह छोड़कर वैध व अवैध रूप से वर्ष भर चलता है।
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नदी से मौरंग लेने के लिए लगी ट्रकों की लाइन। जागरण
सैंकड़ों अवैध खनन
इस समय 26 वैध व करीब आधा सैकड़ा अवैध रूप से मौरंग निकालने का कारोबार दिन रात चल रहा है। यहां लिफ्टर के जरिए नदी के अंदर से भी मौरंग निकाली जाती है। नरैनी के गिरवां स्थित पहाड़ों को अवैध तरीके से ब्लास्टिंग कर उन्हें ध्वस्त कर क्रेशर के जरिए गिट्टियां बनाई जा रही है। लिहाजा यहां पर्यावरण में बेहताशा बदलाव हो रहे हैं। नदियों सूख रही हैं, चट्टानें दिखने लगी हैं। इन सबके कारण जिले का तापमान देश में सबसे ज्यादा गर्म है।
विश्व के सबसे गर्म जिले में शामिल
जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 4408 वर्ग किलोमीटर है। यहां की जलवायु उपोष्णकटिबंधीय है, जिसमें गर्म ग्रीष्मकाल और सर्दी कड़ाके वाली होती है। गर्मी का मौसम मार्च से जून के मध्य तक रहता है, जबकि सर्दी नवंबर से फरवरी के मध्य तक रहती है। इन दिनों मई माह में कई बार देश में सबसे अधिक तापमान जिले का रहा है। बांदा विश्व के सबसे गर्म देशों में से अपना स्थान बनाया है।
तीन नदियां फिर भी गर्मी से बेहाल लोग
शनिवार को 44.8, रविवार को 46.4 व सोमवार को 46.8 डिग्री सेल्सियस रहा। इन परिस्थितियों में आमजन ही नहीं बल्कि जीव-जंतुओं भी बेहाल हैं। ऐसे में जब हम भौगोलिक स्थितियों का आकलन करते हैं, तो पाते हैं कि जिले के भौगोलिक क्षेत्रफल में यमुना, केन, बागेन व चंद्रावल नदियां हैं। यहां पर इन नदियों से वर्ष भर वर्षा काल को छोड़कर बेरोकटोक नियमों को दरकिनार कर माैरंग खनन लिफ्टर आदि लगा कर किया जाता है।
एनजीटी के मानक दरकिनार कर नदी के बीच से निकालते मौरंग
जिले में कुल वैध रूप से 26 मौरंग खदानें हैं। लेकिन इसके अलावा करीब आधा सैकड़ा अवैध मौरंग खदानें संचालित हैं। कहने को तो वैध रूप से संचालित खदानें एनजीटी के नियमों का पालन करती हैं पर वास्तव में यह इन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए नदी के अंदर से खनन होता है। यही नहीं माप के अनुसार पट्टे से अधिक क्षेत्रफल का खनन होता है।
एक करोड़ का वसूला था जुर्माना
बीते माह में तत्कालीन डीएम जे.रीभा ने क्षेत्रफल से अधिक खनन पर कई खदानों पर करीब एक करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया। इस पर जानकारों का कहना है कि नदियों के अधिक खनन से हर साल पानी कम हो रहा है लिहाजा कम पानी के कारण पठार व चट्टानों का भाग अधिक हुआ। पानी कम होने और चट्टानों के अधिक तपने से तापमान में वृद्धि हुई है।
गर्मी के कारण केन नदी का घटा जल स्तर। जागरण
अवैध तरीके से हो रही ब्लास्टिंग, गिट्टियाें के लिए तोड़े जा रहे पहाड़
जिले में मौरंग खनन ही नहीं पत्थर व गिट्टियों का कारोबार भी वर्ष भर अवैध तरीके से फलता- फूलता रहता है। पत्थर व गिट्टियां के लिए पहाड़ भी तोड़ जा रहे हैं। नरैनी व गिरवां क्षेत्र में ही करीब आधा दर्जन से अधिक क्रेशर संचालित हैं। पत्थर कारोबारी इस क्षेत्र के पहाड़ों में गलत तरीके से ब्लास्टिंग कर पहाड़ों को तोड़कर खत्म कर रहे हैं।
कई बार शिकायत लेकिन कोई कार्रवाई नहीं
स्थानीय लोग प्रशासन को कई बार इससे होने वाली परेशानियों से रूबरू करवा चुके हैं। लेकिन पत्थर के सौदागरों के कारोबार की नियमावली में कोई बदलाव नहीं आया है। मनमानी तरीके से ध्वस्त किए जा रहे पहाड़ों के अस्तित्व के खतरे में आना भी बेहताशा तापमान बढ़ने की वजह बन रही है। इसी प्रकार जिले में एक भी ऐसी खदान नहीं है जहां मानकों के अनुरूप खनन किया जा रहा है। पैलानी क्षेत्र में खप्प्टिहाकला क्षेत्र अवैध खनन का गढ़ है।
जिले के किसान परंपरागत खेती पर ही निर्भर
गर्मी के मौसम में जिले का ज्यादातर किसान ज्यादातर एक फसली खेती ही करता है। नवंबर दिसंबर में बुआई करने के बाद मार्च अप्रैल में गेहूं, अरहर, चना, मटर आदि की तैयार फसलों को काट कर अपने खेत खाली छोड़ देता है। खाली खेतों में जब तेज धूप पड़ती है तो यह और अधिक गर्म होते हैं लिहाजा तापमान पर असर पड़ता है यह अधिक बढ़ रहा है। लेकिन यदि इन्हीं खेतों में फसलों की बुआई कर दी जाय तो यह धूप से जमीन गर्म नहीं होगी और तापमान भी अधिक नहीं बढ़ेगा।
तापमान असंतुलित होना पर्यावरण सबसे महत्वपूर्ण कारक है। हमें पौधारोपण में भले ही एक पौध लगाए पर उनके तैयार होने तक एक बेटे की तरह देखभाल करें।
डा. सबीहा रहमानी, विभागाध्यक्ष, समाज शास्त्र, राजकीय महिला डिग्री कालेज
जिले का तापमान देश के सबसे अधिक तापमान होना चिंता जनक है। यहां गर्मी के दिनों में खेती करने समेत पौधों को रोपित करने व एनजीटी के नियमों के अनुसार खनन होने पर ध्यान देना चाहिये।
पद्मश्री उमाशंकर पांडेय
डा. दिनेश साहा।
जिले का तापमान तो पिछले वर्ष भी बढ़ा था, लेकिन देश में सबसे अधिक होने पर यहां के कई कारण हैं। जिन्हें गंभीरता से लेकर विचार करना चाहिये।
डा. दिनेश साहा, मौसम विज्ञानी, कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा