जो कल तक थे जमींदार… आज कुदरत ने बनाया भूमिहीन, सिर्फ कागजों में बची उनके नाम जमीन
बाराबंकी में सरयू नदी की कटान से कई गांव गैर आबाद हो गए हैं, जिसमें रामसनेहीघाट तहसील का गुनौली गांव ...और पढ़ें

HighLights
बाराबंकी में सरयू नदी की कटान से भारी तबाही।
तीन साल में दो हजार बीघे से अधिक जमीन कटी।
कई गांव गैर आबाद, जमींदार हुए भूमिहीन।
जागरण संवाददाता, बाराबंकी। जिले में सरयू नदी की बाढ़ से नुकसान का आंकड़ा जब से रखा जाने लगा तब से 22 गांव गैर आबाद हो गए। यानी सरयू नदी की कटान ने इन गांवों को अपनी आगोश में ले लिया। यहां के रहने वाले लोग आसपास के गांवों में रहते हैं।
ऐसे ही गैर आबाद गांवों की श्रेणी में रामसनेहीघाट तहसील का गुनौली गांव आने वाला है। बीते तीन साल से नदी पहले गांव की जमीन अब गांवों के घर व खेती लायक जमीन दोनों निगल रही है। इस गांव के कई जमींदार अब हकीकत में भूमिहीन हो गए। सिर्फ कागजों पर उनके नाम जमीन बची है।
गुनौली के प्रधान राम अभिलाख के अनुसार बीते तीन साल में दो हजार बीघा से ज्यादा खेती लायक जमीन कट गई। उनके परिवार की 50 बीघा जमीन इस बार ही कट चुकी है। इससे पहले भी कटान में शेष जमीन कट गई। अब वह कागजी जमींदार बचे हैं। उन्होंने बताया कि जिस गति से कटान हो रही है, उसे देखते हुए अगले साल तक यह गांव भी गैर आबाद घोषित हो सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि इसी साल गोमती व जगराम का पक्का मकान और 20 बीघा खेत नदी में कट गया। निरहू, अन्नी, बाबादीन, अयोध्या, परसू, गोट्टी, ननके के छप्पर वाले घर जहां थे, वह जमीन भी कट गई और इनके खेत भी करीब 50 बीघा कट गए।
बीते 15 दिन में करीब 150 बीघा जमीन कट चुकी है। क्षेत्र के पत्रा, मल्दहा व गढ़ी गैरआबाद हो चुके हैं। मल्हदा की बची जमीन इस बार भी कट रही है। रामराज रावत के घर के निकट तक नदी की धारा पहुंच चुकी है। बांसगांव में पांच हजार बीघा खेत जलमग्न हैं। इनमें धान, गन्ना व चरी लगी है। चरी और धान सड़ने लगा है।
केदारीपुर में चल रही कटान
सूरतगंज ब्लाक के केदारीपुर, बबुरी गांव और नचना में बीते साल करीब पांच सौ बीघा जमीन कटी थी, यह तीनों गांव भी उजड़ गए। गुड्डू मिश्रा ने बताया कि बाढ़ के बाद ग्रामीण नदी के किनारे छप्पर रखे थे, एक हफ्ते से फिर कटान जारी है।
जिन गांवों में फसलें बर्बाद हुई हैं या जमीन और घर कटे हैं, उनका सर्वे चल रहा है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर सहायता दी जाएगी।
-निरंकार सिंह, एडीएम, बाराबंकी
