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बाराबंकी के 'बनाना मैन' का नया प्रयोग, एक्वाडोर प्रजाति के केले ने दी बंपर पैदावार; बाजार में मिला ढाई रुपये ज्यादा दाम

Published: Tue, 01 Sep 2026 06:58 AM (IST)

बाराबंकी में पद्मश्री राम सरन वर्मा के एक्वाडोर केले के नवाचार से प्रति घार 10 किलो तक वजन बढ़ा और ...और पढ़ें

एक्वाडोर प्रजाति के केले से बढ़ी पैदावार।

एक्वाडोर प्रजाति के केले से बढ़ी पैदावार।

HighLights

  1. एक्वाडोर केले की घार का औसत वजन 35 किलो निकला।

  2. केला लंबा, चमकदार और ढाई रुपये प्रति किलो महंगा बिका।

  3. पद्मश्री राम सरन वर्मा का नवाचार किसानों की आय बढ़ाएगा।

जागरण संवादादाता, बाराबंकी। हरख के दौलतपुर में पद्मश्री राम सरन वर्मा के नवाचार से केला घार का वजन औसत 10 किलो तक बढ़ा। केला लंबा और चमकदार भी निकला। जिसके चलते पंजाब और दिल्ली के कारोबारियों की पहली पसंद बन गया। यही नहीं सामान्य प्रजाति के केला से ढाई रुपये प्रति किलो ज्यादा की दर पर बिका भी। अगले साल पद्मश्री इस प्रजाति का केला ज्यादा रकबे में लगाएंगे, अन्य किसानों को भी प्रेरित करेंगे।

ताकि किसान कम लागत में अधिक उत्पादन कर खेती से आय दोगुणा करने संबंधी पीएम नरेंद्र मोदी के मिशन को आगे बढ़ाने में सहयोगी बने। राम सरन ने इस बार अपने तीन स्थानों के खेतों में 60 एकड़ (कच्चा 240 बीघा) केला की फसल लगा रखी है। पांच तरह की प्रजातियां लगी हैं। इनमें दौलतपुर कृषि फार्म पर एक्वाडोर देश की प्रजाति का केला डेढ़ एकड़ में पहली बार नवाचार के रूप में बीते साल 25 जुलाई लगाया।

अन्य प्रजाति के केला की तरह खाद व पानी दिया। अगस्त माह के अंतिम सप्ताह केला की फसल कट गई। डेढ़ एकड़ में 1600 पौधे थे। अन्य प्रजातियों में जहां केला की औसत घार 25 किलो की निकलती है। वहीं एक्वाडोर केला की घार का औसत वजन 35 किलो निकला है। खास बात यह है कि घार में सबसे नीचे का 20, बीच का 24 और सबसे ऊपर के पंजे का केला 26 सेंटीमीटर तक लंबा है। इसकी लंबाई के साथ चमक भी ग्राहकों और व्यापारियों को आकर्षित करती है।

इसलिए जहां अन्य प्रजातियों का केला 15 रुपये किलो बिका वहीं यह केला साढ़े 17 रुपये किलो पंजाब व दिल्ली के कारोबारी ने खरीदा। पद्मश्री सम्मान के साथ बनाना मैन की संज्ञा : केला उत्पादन के लिए बनाना मैन संज्ञा कई मंचों पर मिली, वहीं वर्ष 2019 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों राम सरन वर्मा को पद्मश्री सम्मान मिला था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इनकी कृषि तकनीकि की खुलकर तारीफ कई बार कर चुके हैं।