बाराबंकी में केडी सिंह ‘बाबू’ के मैदान को बचाने की मुहिम तेज, प्रशासन खंगाल रहा अभिलेख
GIC Ground Barabanki: ‘बाबू’ की मूल विरासत जीआइसी खेल मैदान बचाने के लिए उनके चाहने वाले दिल्ली, मुंबई और संयुक्तराष्ट्र अमेरिका के शिकागो से मुख्यमंत ...और पढ़ें

जीआईसी खेल मैदान
HighLights
खिलाड़ियों को जीआईसी के खेल मैदान को सौंपने की मांग इंटरनेट मीडिया पर तेज
जिला प्रशासन में कालेज प्रबंध समिति की बैठक में मैदान के उपयोग पर होना है निर्णय
जागरण संवाददाता, बाराबंकी। पद्मश्री केडी सिंह ‘बाबू’ की खेल विरासत से जुड़े जीआईसी मैदान को संरक्षित रखने की मांग अब देश की सीमाओं से निकलकर विदेश तक पहुंच गई है।
डीएम ईशान प्रताप सिंह का कहना है कि इसी सप्ताह प्रबंध समिति की बैठक में मैदान को संरक्षित कर खेल, खिलाड़ियों के हित में बेहतर उपयोग करने की योजना बनाई जानी है। ‘बाबू’ की मूल विरासत जीआइसी खेल मैदान बचाने के लिए उनके चाहने वाले दिल्ली, मुंबई और संयुक्तराष्ट्र अमेरिका के शिकागो से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक्स पर मैदान को संरक्षित करने की कर रहे हैं।
बाबू की गौरवशाली हाकी खेल के सबसे पहले मैदान को बचाने का यह मुद्दा इंटरनेट मीडिया पर छाया है। मुद्दे को खेल प्रेमियों व पुरातन छात्रों के अतिरिक्त वरिष्ठ नागरिकों का जनसमर्थन मिल रहा है। जनप्रतिनिधियों ने भी मैदान की विरासत के लिए एकमत हो रहे हैं।
एमएलसी अंगद सिंह का समर्थन व सीएम तक बात पहुंचाने के बाद अब खेलप्रेमियों को आस जगी है। उधर जिला प्रशासन ने कालेज प्रबंध समित की बैठक के लिए डीआइओएस कार्यालय में अभिलेखों को खंगाला जा रहा है।
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी सुरेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि यह मैदान केवल केडी सिंह बाबू की विरासत ही नहीं, बल्कि हजारों पूर्व छात्रों की यादों का भी हिस्सा है। आज इसकी दुर्दशा देखकर पीड़ा होती है।
अमेरिका के शिकागो में रह रहे वैज्ञानिक ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव ने वर्ष 1979 में जीआईसी से इंटरमीडिएट किया था। यही मैदान शहर के खिलाड़ियों का प्रमुख केंद्र था। इस मैदान को सुरक्षित रखना सभी का नैतिक दायित्व है। गाजियाबाद इंदिरा पुरम में रह रहे केंद्रीय प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पूर्व उपनिदेशक भूपेंद्र सिंह सिसौदिया ने बताया कि बचपन में इसी मैदान पर सैकड़ों मैच खेले।
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यहां मंडल और राज्यस्तरीय प्रतियोगिताएं और नित्य प्रार्थना सभा होती थीं। मेलों का मैदान बनाने का विरोध होना चाहिए। त्रिनेत्रपाल सिंह ने पत्र में कहा है कि हाकी के साथ फुटबाल व क्रिकेट मैच आयोजित होते थे। रसूलपुर के डा. धर्मेंद्र सिंह यहां व्यावसायिक गतिविधियों को बंद करने की बात कही है।
एक्स पर एडवोकेट गौरव मिश्र सरकार से मैदान को बचाने की गुजारिश करते हैं। पोस्ट में लिखते हैं जिले के हृदय में बसा खेल का मैदान केवल प्रदर्शनी और प्राइवेट वाहनों के खड़े होने का स्थान बन कर रह गया है। राहुल ने प्रशासन से स्कूल मैदान को वापस कालेज प्रबंधन को देने का अनुरोध करते हैं। अमित सिंह व वैभव शरण पोस्ट करते हैं कि आने वाली पीढ़ियों को बाबू की विरासत सुरक्षित मिले, इसके लिए सबको आगे आना चाहिए।