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    चकबंदी से हैदरगढ़ के किसानों की बढ़ी मुश्किलें, फार्मर रजिस्ट्री न बनने से खाद-बीज का संकट गहराया

    Updated: Sun, 26 Jul 2026 04:25 PM (IST)

    हैदरगढ़ तहसील के 12 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया अधूरी होने से किसानों को फार्मर रजिस्ट्री नहीं मिल पा रही, जिससे उन्हें खाद-बीज और सरकारी योजनाओं का ल ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. चकबंदी के कारण फार्मर रजिस्ट्री नहीं बन पा रही।

    2. किसानों को सरकारी खाद, बीज और एमएसपी लाभ नहीं मिल रहा।

    3. निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीदने को मजबूर किसान।

    जागरण संवाददाता, बाराबंकी। हैदरगढ़ तहसील के 12 ग्राम पंचायतों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी न होने से राजस्व परिषद से संबंधित गांवों की खतौनी निकाले जाने पर प्रतिबंध लगा है। साथ ही सभी गांवों में फार्मर रजिस्ट्री नहीं बन पा रही। यही वजह है कि बिना फार्मर रजिस्ट्री के किसानों को खाद, सरकारी कर केंदों पर बीज नहीं मिल पा रहे।

    और तो और यहां के किसान सरकारी दर पर अपने कृषि उत्पाद भी नहीं बेच पा रहे और समर्थन मूल्य के लाभ से वंचित हो रहे हैं। सरकारी बीज भंडारों पर छूट पर बीज व कृषि यंत्र किसान सम्मान निधि जैसी अहम सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा है।

    रानीखेर मजरे लाही निवासी किसान राम अचल ने बताया कि चकबंदी की वजह से फार्मर रजिस्ट्री नहीं बन पाई। साधन सहकारी समिति पोखरा पर खाद नहीं दी गई। निजी दुकानदार 430 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से यूरिया और उसके साथ दो पैकेट जिंक और दो पैकेट सल्फर भी मजबूरी में खरीदना पड़ा।

    टिकरा गांव के निवासी अयोध्या नाथ शुक्ला, कैलाश नाथ शुक्ला, केदारनाथ शुक्ला भी फार्मर रजिस्ट्री न बन पाने से निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद लेने को विवश हैं। बताया कि गेहूं, धान भी औने पौने में बेचने को मजबूर होते।

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    किसान नेता विश्राम राज पासी ने बताया कि हैदरगढ़ में बगैर फार्मर रजिस्ट्री खाद सहकारी केंद्रों से उपल्बध करवाई जाए, इसके लिए मांग कर रहे हैं।

    चकबंदी लेखपाल अंकित सिंह ने बताया कि ग्राम दौलतपुर,कान्हीपुर, तेजवापुर ,बिजौली,सहावर, लाही, बबुआ पुर, जासेपुर, पैकौली, पलौली, शरीफाबाद में चकबंदी प्रक्रिया चल रही है यहां के किसानों को खाद की जरूरत पड़ने पर हाथ से खतौनी बनाकर हिस्सा प्रमाणित करके दिया जाता है, ताकि वह सहकारी समिति पर खतौनी दिखाकर खाद ले सकें।

    किसान यूनियन के राष्ट्रीयता वादी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर रामचंद्र सिंह का कहना है कि एक गरीब किसान को एक बोरी खाद लेना है तो वह पहले लेखपाल को ढूंढे। कभी-कभार कई दिनों तक चक्कर काटने पर लेखपाल नहीं मिलते। जब लेखपाल मिले तो बिना रुपये लिए खतौनी के हिस्सा का प्रमाण पत्र नहीं मिल पाता।

    परेशान होकर किसान निजी दुकानों पर महंगे दामों पर खाद व साथ में जिंक सल्फर ले रहे हैं। चकबंदी वाले गांवों के किसानों के लिए कोई सरल उपाय से खाद के लिए दिए मांग पत्र पर सुनवाई नहीं हुई।