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फर्जी IAS विप्रा शर्मा का एक और कारनामा! रिटायर्ड कर्मचारी से 8 लाख की ठगी, दिए नकली जॉइनिंग लेटर

Published: Fri, 14 Aug 2026 07:33 PM (IST)

फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा और उसके पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा के खिलाफ बरेली में एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से 8 लाख ...और पढ़ें

व‍िप्रा शर्मा

व‍िप्रा शर्मा

HighLights

  1. जनपद न्यायालय में चतुर्थ श्रेणी पद से सेवानिवृत हैं पीड़ित, घर पर दिए रुपये

जागरण संवददाता, बरेली। फर्जी आइएएस विप्रा शर्मा व उसके पिता के विरुद्ध आठ लाख रुपये ठगने की एक और प्राथमिकी पंजीकृत हो गई। यह प्राथमिकी जनपद न्यायालय में चतुर्थ श्रेणी पद से सेवानिवृत राधेश्याम ने बारादरी थाने में लिखाई है। आरोप है कि आरोपितों ने उनके दोनों बेटों की सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा दिया था।

बारादरी के अशोक विहार निवासी राधेश्याम ने पुलिस को बताया कि वह जनपद न्यायालय से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद से सेवानिवृत्त हैं। नौकरी के दौरान उनकी जान-पहचान सिंचाई विभाग के तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी वीरेंद्र कुमार शर्मा से हुई थी।

आरोप है कि वीरेंद्र ने बताया कि उनकी पुत्री विप्रा शर्मा सचिवालय लखनऊ में आइएएस अधिकारी है और वह उनके दोनों बेरोजगार बेटों की सरकारी नौकरी लगवा सकती हैं। इसके लिए 10 लाख रुपये मांगे गए। राधेश्याम के मुताबिक, अगस्त 2022 में वीरेंद्र ने उन्हें अपने ग्रेटर ग्रीन पार्क स्थित आवास पर बुलाया।

वहां वीरेंद्र और उनकी बेटी विप्रा मौजूद थीं। आरोप है कि वहां दोनों ने 10 लाख रुपये की मांग की। विश्वास में आकर राधेश्याम ने सात लाख रुपये नकद, दोनों बेटों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की छायाप्रति और फोटो दे दिए। इसके बाद 29 अगस्त 2022 और 20 सितंबर 2022 को दोनों बेटों के नाम से नियुक्ति पत्र भेजे गए।

इसके बाद तीन लाख रुपये और मांगे गए, जिन्हें 20, 21 और 22 सितंबर को विप्रा के खाते में आनलाइन ट्रांसफर कराया गया। आरोप है कि करीब एक साल बाद चार अक्टूबर 2023 को उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, लखनऊ के नाम से दोनों बेटों के लिए दो और नियुक्ति पत्र भेजे गए।

राधेश्याम दोनों बेटों को लेकर नियुक्ति स्थल पहुंचे तो वहां नियुक्ति पत्र फर्जी बताते हुए ज्वाइनिंग कराने से मना कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने आयोग पहुंचकर जानकारी की तो नियुक्ति पत्र संदिग्ध और फर्जी बताए गए।

राधेश्याम का आरोप है कि फर्जी नियुक्ति पत्रों के जरिए उनके साथ जालसाजी और धोखाधड़ी की गई। विरोध करने पर दोनों ने उन्हें धमकी भी दी। बाद में रुपये वापस मांगने पर दो लाख रुपये लौटा दिए गए, लेकिन शेष आठ लाख रुपये नहीं लौटाए गए।

जून 2026 में जब वह आरोपितों के आवास पर पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला। कालोनी के लोगों से उन्हें जानकारी हुई कि विप्रा शर्मा फर्जी आइएएस है और नौकरी के नाम पर लोगों से ठगी करने की वजह से जेल में है। जबकि उसके पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा फरार हैं। मामले में पुलिस ने दोनों के विरुद्ध प्राथमिकी लिख ली है।

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