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दो पुराने विरोधियों के घर बढ़ीं नजदीकियां, श्रुति गंगवार की इस एक तस्वीर से बदले बरेली के सियासी मायने

Published: Mon, 12 Oct 2026 05:45 AM (IST)

राज्यसभा सांसद श्रुति गंगवार ने बरेली में भाजपा के पूर्व कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया और विकास ...और पढ़ें

नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य श्रुति गंगवार को आशीर्वाद देते भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल। इंटरनेट मीडिया

नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य श्रुति गंगवार को आशीर्वाद देते भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल। इंटरनेट मीडिया

HighLights

  1. पूर्व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल से मिलीं निर्विरोध निर्वाचित श्रुति गंगवार, लिया आशीर्वाद, विकास के मुद्दों पर भी हुई चर्चा

अशोक आर्य, बरेली। सियासत में मुलाकातें महज शिष्टाचार तक सीमित नहीं होतीं, उनके अपने मायने भी होते हैं। बरेली की राजनीति के दो प्रमुख स्तंभ संतोष कुमार गंगवार और राजेश अग्रवाल के बीच बढ़ती नजदीकी को भी इसी नजरिये से देखा जा रहा है।

मौजूदा समय में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी निर्विरोध निर्वाचित राज्यसभा सदस्य श्रुति गंगवार का भाजपा के पूर्व कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल से मिलना और उनका आशीर्वाद लेना जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

इस मुलाकात ने पुराने सियासी समीकरणों और भविष्य की संभावनाओं पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। राजेश अग्रवाल शहर विधानसभा सीट से चार बार और कैंट विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं।

नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य श्रुति गंगवार को आशीर्वाद देते भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल। इंटरनेट मीडिया

संगठन से लेकर सरकार तक विभिन्न भूमिकाओं में उनका लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। राज्यसभा सदस्य बनने के बाद शहर आईं श्रुति गंगवार ने शनिवार को उनके घर जाकर आशीर्वाद लिया।

मुलाकात के दौरान राजेश अग्रवाल ने उच्च सदन के सदस्यों की जिम्मेदारियों और उनके कार्यों की गंभीरता बताई। साथ ही बरेली के विकास की जरूरतों की ओर भी ध्यान दिलाया।

उनका कहा कि बरेली को आज तक वह दर्जा नहीं मिल पाया, जिसकी उसे आवश्यकता है। श्रुति के पिता संतोष गंगवार बरेली लोकसभा सीट से आठ बार सांसद रह चुके हैं।

जिले की राजनीति में उनका अपना प्रभाव रहा है, वहीं राजेश अग्रवाल भी लंबे समय तक विधानसभा और संगठन की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

दोनों नेताओं को कभी अलग-अलग राजनीतिक खेमों में देखा जाता था। ऐसे में अब उनके परिवारों के बीच बढ़ता संवाद राजनीतिक नजरिये से अहम माना जा रहा है।

हालांकि, इसे किसी नए राजनीतिक गठजोड़ या साझा रणनीति का संकेत मानना फिलहाल जल्दबाजी होगी। वहीं, राजेश अग्रवाल की राजनीतिक विरासत को लेकर भी समय-समय पर चर्चा होती रही है।

उनके बेटे मनीष अग्रवाल को सक्रिय राजनीति में आगे बढ़ाने की संभावनाएं भी इसी संदर्भ में देखी जाती हैं। हालांकि, उन्हें लेकर अभी कोई ऐसा स्पष्ट राजनीतिक पड़ाव सामने नहीं आया है, जिसे भविष्य की दिशा का संकेत माना जा सके।

ऐसे में गंगवार परिवार के साथ राजेश अग्रवाल की बढ़ती निकटता को लेकर भी तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। राजेश अग्रवाल के इंटरनेट मीडिया अकाउंट पर फोटो साझा होने के बाद जिले की सियासत में संभावित नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

अब देखना होगा कि यह नजदीकी भविष्य में केवल व्यक्तिगत संबंधों तक सीमित रहती है या जिले की राजनीति में भी कोई नई दिशा तय करती है।

भाजपा के पूर्व कोषाध्यक्ष का कहना है कि श्रुति मेरे लिए बच्चों की तरह हैं। उन्हें पहले भी आशीर्वाद दिया और हमेशा देंगे। उनसे बरेली के विकास के लिए बहुत अपेक्षाएं हैं।

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