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    म्यांमार की 'साइबर गुलामी' से लौटे बरेली के 4 युवा: थाईलैंड में 5-स्टार होटल का झांसा देकर ऐसे बनाया था बंधक

    Updated: Fri, 23 Jan 2026 06:05 PM (IST)

    म्यांमार में साइबर स्लेवरी के शिकार बरेली के चार युवाओं को भारतीय खुफिया एजेंसियों ने बचाया है। उन्हें मोटी सैलरी का झांसा देकर थाईलैंड बुलाया गया, फि ...और पढ़ें

    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

    HighLights

    1. पुलिस ने सभी के बयान दर्ज कर किया परिवार के सुपुर्द, नौकरी के नाम पर दिया था झांसा

    2. साइबर थाना पुलिस के साथ नेशनल एजेंसियां भी रखी हैं पूरे मामले पर नजर

    जागरण संवाददाता, बरेली। म्यांमार में भारतीयों को बंधक बनाकर साइबर स्लेवरी कराई जाती है। वहां पर बैठे ठग भारत के लोगों को मोटी सैलरी का झांसा देकर फंसाते हैं और उन्हें वहां बुलाकर बंधक बना लेते हैं। इसके बाद उनसे साइबर स्लेवरी कराई जाती है। ऐसे ही बरेली के चार युवाओं को भारत की खुफिया एजेंसियों ने साइबर ठगों के चंगुल से छुड़ाया है। सभी को उनके स्वजन को सुपुर्द कर दिया गया है। इसके अलावा लोकल स्तर पर पूरे प्रकरण की जांच के लिए साइबर थाना पुलिस को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    साइबर एक्सपार्ट नीरज सिंह ने बताया कि नवंबर 2025 में म्यांमार से 270 भारतीयों को मुक्त कराया गया था, जिनमें से बरेली के चार युवा शामिल थे। इसमें से एक युवती व एक युवक किला और दो युवक सुभाषनगर थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि चारों युवा आइटी सेक्टर से जुड़े हैं और इन्हें डाटा इंट्री आपरेटर, गेमिंग प्रोग्रामिंग आदि का काम बताकर उन्हें बुलाया था।

    पूछताछ में स्पष्ट हुआ कि पहले सभी को थाईलैंड बुलाया। फि‍र वहां से पहले ट्रक से और इसके बाद नदी के रास्ते वह म्यांमार लेकर चले गए थे। सभी को हर माह कम से कम 70 से 80 हजार रुपये वेतन प्रति माह देने का झांसा दिया गया था। पुलिस की पूछताछ में पीड़ितों ने बताया कि थाइलैंड पहुंचने के बाद सभी को फाइव स्टार होटल में ठहराया जाता है।

    इसके बाद पहले ट्रक फिर नदी के रास्ते म्यांमार लेकर चले जाते हैं। युवाओं ने बताया कि वहां काम कराने वाले सभी लोग चाइनीज थे। पहले तो उन्होंने ट्रेनिंग दी और बाद में पासपोर्ट वीजा आदि सब छीनकर बंधक बना लिया। पूछताछ में पीड़ितों ने बताया कि उन्हें सबसे पहले काम दिया गया कि वह फेसबुक पर भारतीय लड़की के नाम से आइडी बनाएं।

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    उसके बाद युवाओं को अपने जाल में फंसाए जब कोई फंस जाए तो उसकी आइडी पासवर्ड अपने सीनियर को देना होता था। इसके बाद उसे कैसे ब्लैकमेल करता है कैसे रुपये निकलवाने है यह सभी सीनियर का काम होता था। हालांकि, सभी युवा अब अपने घर पर सुरक्षित हैं।


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