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सीमांत गांवों में सेना का 'रेडियो संवाद': हिमाचल और उत्तराखंड के 50 युवाओं को मिला रोजगार और नया मंच

Published: Mon, 26 Oct 2026 01:20 PM (IST)

भारतीय सेना ने हिमाचल और उत्तराखंड के सीमांत गांवों में पांच रेडियो स्टेशन स्थापित किए हैं, जिनसे 50 स्थानीय युवाओं ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में सेना की ओर से स्थापित सामुदायिक रेडियो स्टेशन और उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सेना की ओर से संचालित ‘आइबेक्स हर्षिल’ रेडियो की आरजे पर्यटकों से बात करती हुई। सौ. सेना

हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में सेना की ओर से स्थापित सामुदायिक रेडियो स्टेशन और उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सेना की ओर से संचालित ‘आइबेक्स हर्षिल’ रेडियो की आरजे पर्यटकों से बात करती हुई। सौ. सेना

HighLights

  1. हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में संचालित हो रहे पांच रेडियो स्टेशन

नीलेश प्रताप सिंह, बरेली। दुर्गम सीमांत क्षेत्रों में भारतीय थल सेना रेडियो की तरंगों से संवाद, रोजगार और कौशल विकास का रास्ता सरल कर रही है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में पांच करोड़ रुपये से बनाए गए पांच रेडियो स्टेशन से 50 स्थानीय युवा जुड़े हैं।

इनमें कुछ युवाओं को बतौर रेडियो जाकी (आरजे) तो कुछ को क्षेत्रीय सूचना-कार्यक्रम प्रस्तुतिकरण के जरिये रोजगार मिला है। सेना की यह पहल सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हिमालयी क्षेत्रों में जनसंपर्क मजबूत करने के साथ लोकसंस्कृति को बढ़ावा दे रही है।

हिमालयी क्षेत्रों में मौसम का अचानक बदलना, भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में स्थानीय भाषा में मौसम संबंधी चेतावनी, सुरक्षा उपाय और आपदा के समय सावधानियों का प्रसारण लोगों को सतर्क करने में मददगार बनता है।

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सामुदायिक रेडियो स्टेशन में बना रिकार्डिंग स्टूडियो। सौ. सेना

इसे ध्यान में रखकर बरेली स्थित सेना के उत्तर भारत मुख्यालय ने हिमाचल प्रदेश में वायस आफ किन्नौर, वायस आफ स्पीति, उत्तराखंड में आइबेक्स तराना, आइबेक्स हर्षिल और पंचशूल पल्स नाम से सामुदायिक रेडियो स्टेशन की स्थापना की।

दो-तीन वर्ष पहले इन रेडियो स्टेशन के आरंभ के समय अतिथि आरजे की मदद ली गई। बाद में क्षेत्रीय युवाओं को जोड़ा जाने लगा। वे उत्तर भारत मुख्यालय पहुंचकर साक्षात्कार देते हैं। इसके बाद नियुक्ति होने पर अपने क्षेत्र में सक्रिय हो जाते हैं।

अब ये रेडियो स्टेशन श्रोताओं को स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, सरकारी योजनाओं, स्थानीय आजीविका और पर्यटन से जुड़े कार्यक्रम और रोजमर्रा की आवश्यक जानकारियां सहज उपलब्ध करा रहे हैं।

लोकगीतों और स्थानीय बोली-भाषा को मिल रही पहचान

सेना के अधिकारियों ने बताया कि रेडियो के माध्यम से हिमालय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी सहेज रहे हैं। स्थानीय बोलियों, लोकगीतों, त्योहारों, परंपराओं और लोककथाओं का प्रसारण किया जा रहा, ताकि नई पीढ़ी अपने सांस्कृतिक वैभव को समझ सके।

स्थानीय कलाकारों, लोकगायकों और कहानीकारों को भी मंच मिल रहा। युवाओं को कार्यक्रम प्रस्तुति, साक्षात्कार और सामग्री निर्माण जैसे क्षेत्रों से जुड़ने का अवसर मिला है।

महिलाओं, विद्यार्थियों, किसानों और स्थानीय उद्यमियों से जुड़े विषयों को प्रमुखता देकर उनकी जरूरतों और अनुभवों को सामने लाया जाता है। भारतीय सेना की यह पहल उसकी सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों के साथ स्थानीय समुदायों से संपर्क और सहभागिता को भी महत्व दे रही है।

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