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    बस्ती में पूर्व सैनिकों की दुकानों का आवंटन रद, कमिश्नर ने दिए कब्जा हटवाने के निर्देश

    Updated: Sat, 18 Jul 2026 09:50 AM (IST)

    बस्ती में पूर्व सैनिकों को आवंटित 27 दुकानों का आवंटन हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद रद कर दिया गया है। तीस साल का अनुबंध समाप्त होने और किराया न चुक ...और पढ़ें

    जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी कार्यालय व दुकानें।- जागरण

    जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास अधिकारी कार्यालय व दुकानें।- जागरण

    HighLights

    1. पूर्व सैनिकों की 27 दुकानों का आवंटन रद्द, हाईकोर्ट से राहत नहीं।

    2. तीस साल का अनुबंध समाप्त, 2006 से किराया भी नहीं दिया।

    3. वीर नारियों, विधवाओं व विकलांगों के 70 आवेदन लंबित।

    ब्रजेश पांडेय, बस्ती। जिले के 27 पूर्व सैनिकों के नाम दुकानों का आवंटन समय पूरा होने पर रद्द कर दिया गया है। उन्हें हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिल सकी है। सैनिक कल्याण बोर्ड एवं पुनर्वास निदेशालय ने नए सिरे से सैनिकों के आश्रित वीर नारी, विधवा व विकलांग के आवंटन के लिए निर्देश दिया है। दुकान पर काबिज पूर्व सैनिक व उनके आश्रित कब्जा नहीं हटा रहे हैं, जिसके कारण 70 पूर्व सैनिकों के आवेदन लटके हैं।

    जिलाधिकारी कार्यालय के सामने सैनिक कल्याण बोर्ड एवं पुनर्वास कार्यालय परिसर में वर्ष 1995 में 29 दुकानें बनी थीं। जिसमें दो पूर्व सैनिकों को आवंटन राज्य सरकार की तरफ से आजीवन कर दिया गया है। 27 पूर्व सैनिकों को स्थानीय स्तर पर इस शर्त के साथ 30 वर्ष के लिए अनुबंध किया गया था कि वह जमीन पर दुकान बनाएंगे और जब तक उसकी लागत पूरी नहीं हो जाय वह किराया नहीं देंगे। उसके बाद किराया अदा करेंगे।

    पूर्व सैनिकों के दिवंगत होने के बाद उनकी पत्नी और फिर आश्रितों को भी अपने पक्ष में आवंटन की प्रक्रिया पूरी करनी थी। आठ पूर्व सैनिक और उनकी पत्नी दिवंगत होने के बाद भी आश्रितों ने काेई कागजी कोरम पूरा नहीं किया है। पहले किराया 140 रुपये से तीन सौ रुपये तक निर्धारित था, बाद में वर्ष 2006 में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बनी कमेटी में नया किराया चार से आठ सौ तक निर्धारित किया था, लेकिन तबसे किसी ने किराया नहीं जमा किया।

    अब दुकानों का किराया भी डेढ़ से ढाई लाख तक पहुंच गया है। कुछ ऐसे पूर्व सैनिक के पुत्र हैं, जिन्होंने दुकान को 10 हजार रुपये से अधिक किराया में दूसरों को उठा दिया है। कब्जा न हटाने को लेकर चार पूर्व सैनिक उच्च न्यायालय इलाहाबाद खंडपीठ लखनऊ में मुकदमा दायर कर किए थे, जिसे न्यायालय ने 4 सितंबर 2025 को खारिज कर दिया है।

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    जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल देविन्द्र गोहानी ने कब्जा खाली कराने के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को 14 मई 2025 को पत्र लिखा, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। मामला मंडलायुक्त अखिलेश सिंह के पास पहुंचने पर उन्होंने डीएम को कब्जा हटवाने के लिए कहा है। कमिश्नर ने जिलाधिकारी को वह सूची भी सौंपी है, जिनके दुकान खाली कराए जाने हैं।

    पूर्व सैनिकों को 30 साल के लिए दुकान लीज पर दी गई थी। पांच सितंबर 2025 को लीज की डीड समाप्त हो चुकी है। कब्जा हटाने के लिए मैं जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक से मिला था, उन्होंने आश्वासन दिया, लेकिन हटा नहीं। अनुस्मारक पत्र भी दोनों अधिकारियों को सात जुलाई 2026 को मैंने दिया है। सैनिक कल्याण बोर्ड के आदेशानुसार कारगिल या अन्य लड़ाई में बलिदानी की पत्नी वीर नारी, विधवा नारी और विकलांगों को आवंटन होना है। बिना दुकान खाली कराए आवंटन मुश्किल है।

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    -कर्नल देविन्द्र गोहानी, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी