बस्ती में बंदरों का उत्पात, अस्त-व्यस्त हुआ जनजीवन; व्यापारियों ने जताई चिंता
रुधौली कस्बे में बंदरों के आतंक से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, जिससे स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में दहशत है। नागरिकों ने प्रशासन से जल्द से जल ...और पढ़ें
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प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
रुधौली कस्बे में बंदरों का आतंक, जनजीवन अस्त-व्यस्त।
बंदरों के हमलों से राहगीर घायल, व्यापार प्रभावित।
प्रशासन से बंदरों को पकड़ने की मांग, कार्रवाई अपेक्षित।
जागरण संवाददाता, रुधौली(बस्ती)। स्थानीय क्षेत्र के रुधौली कस्बे में इन दिनों बंदरों के आतंक से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। कस्बे के विभिन्न वार्डों और मुख्य बाजारों में बंदरों का झुंड खुलेआम उत्पात मचा रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों में भारी दहशत का माहौल है। छतों पर जाना और पैदल चलना हुआ मुहाल हो गया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बंदरों ने छतों पर घूमना और गलियों से निकलना मुश्किल कर दिया है। स्थिति यह है कि महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे अकेले घर से बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। बंदरों द्वारा आए दिन राहगीरों का सामान छीनने, उन्हें दौड़ाकर काटने और घरों में घुसकर खाने-पीने की सामग्री नष्ट करने की घटनाएं आम हो गई हैं।
कई लोग इनके हमलों का शिकार होकर घायल भी हो चुके है है। कस्बे के दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों पर बंदरों के हमले के डर से उनके व्यापार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कई बार इस समस्या से स्थानीय प्रशासन और नगर पंचायत के अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
प्रेमचंद कुमार,नीरज कुमार संतोष कुमार,रामदेव,अमित कुमार धीरज, प्रदुम्न, मोहन सहित कस्बेवासी ने जल्द से जल्द विशेष अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ा जाए और उन्हें घने जंगलों में सुरक्षित छोड़ा जाए।
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