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गंगा को निर्मल बनाने की अनोखी पहल, नदी में छोड़ी जाएंगी रोहू और कतला जैसी 1 लाख मछलियां

Published: Sat, 15 Aug 2026 02:34 PM (IST)

बिजनौर में गंगा की जैव विविधता बढ़ाने और निर्मलता बनाए रखने के लिए एक लाख शाकाहारी मछली के बच्चे छोड़े जाएंगे।

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

HighLights

  1. गंगा में एक लाख शाकाहारी मछली के बच्चे छोड़े जाएंगे।

  2. ये मछलियां जैव विविधता बढ़ाएंगी और नदी को स्वच्छ रखेंगी।

  3. मांसाहारी मछलियों के दबदबे को कम कर संतुलन बनाएंगी।

जागरण संवाददाता, बिजनौर। गंगा में जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए देशी प्रजातियों की मछलियों के एक लाख बच्चे छोड़े जाएंगे। ये मछलियां शाकारी होंगी। ये गंगा की सफाई करेंगी और बाकी प्रजातियों की खुराक का भी काम करेंगी। शाकाहारी मछलियां मांसाहारी मछलियों के साथ मिलकर गंगा में जीवन के संतुलन को बनाकर रखेंगी।

जलीय जीव सुरक्षित रहेंगे तो नदी में जीवन की धारा भी बहती रहेगी। मत्स्य पालन विभाग जल्दी ही गंगा में मछलियों के बच्चे प्रवाहित करेगा।

गंगा, गाय और गायत्री को भारतीय संस्कृति का वाहक माना जाता है। गंगा की धारा को निर्मल रखने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। मछली, मगरमच्छ, घड़ियाल और कछुए गंगा के प्राकृतिक सफाईकर्मी आती है। जिले में गंगा की धारा 115 किलोमीटर में बहती है। यहां भी गंगा की धारा को निर्मल रखने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

गंगा में पिछले काफी समय मांसाहारी मछलियों का दबदबा था। इससे गंगा की जैव विविधिता भी प्रभावित हो रही थी। साथ ही बाकी सभी जलीय जीवों के लिए भोजन की भी कमी होती है और गंगा की निर्मलता भी प्रभावित होती है।

इसे देखते हुए रीवर रेंचिंग कार्यक्रम के अंतर्गत गंगा की धारा में बीते चार वर्ष से शाकाहारी प्रवृत्ति कीं रोहू, कतला और नैन प्रजाति की मछली छोड़ी जा रही हैं। इस वर्ष भी गंगा में इन प्रजाति की मछली के एक लाख बच्चे प्रवाहित किए जाएंगे। ये गंगा की धारा को निर्मल रखने में सहयोग करेंगे और जैव विविधता को भी संतुलित करेंगे।

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मांसाहारी मछलियों का हो गया था कब्जा

गंगा में रोहू, कतला और नैन मछलियां खरपतवार को खाती हैं। ये गंगा से खत्म होती जा रहीं थी। इनकी जगह गंगा में सिंघाड़ा, सोल, लाची आदि मांसाहारी प्रजाति की मछलियों का कब्जा होता जा रहा था। इन मछलियों को आम भाषा में जंगली मछली भी कहा जाता है। रोहू, कतला, नैन की संख्या कम होने पर आहार श्रंखला भी गड़बड़ा गई थी।

गंगा की धारा में रोहू, कतला और नैन प्रजाति कीं मछली के एक लाख से अधिक बच्चे छोड़े जाएंगे। अगस्त या सितंबर में ही नदी में बच्चे छोड़ दिए जाएंगे। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।

                                                                               शिव कुमार, सहायक निदेशक मत्स्य